निमाड़ी कलाकार

साकेत गरबा म रमण आवजो माँ

साकेत गरबा म रमण आवजो माँ | भक्ति गरबा गीत | Saket Garba Maa Bhajan

साकेत गरबा म रमण आवजो माँ | भक्ति गरबा गीत | Raas Garba Maa Bhajan

साकेत गरबा म रमण आवजो माँ
👉 🙏 सुनो भक्तन की आस माँ | भक्ति गरबा गीत

🎶 Song Intro

“सुनो भक्तन की आस माँ” एक भावपूर्ण भक्ति गरबा गीत है, जिसे सुप्रसिद्ध गायक गितेश भार्गव ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है।
यह गीत इंदौर के पावन ‘साकेत ना गरबा आयोजन के लिए उधव यादव द्वारा विशेष रूप से लिखा गया है।

इस भक्ति गीत में माँ दुर्गा से भक्तों की करुण पुकार, श्रद्धा, विश्वास और गरबा के उत्सव का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
गीत के बोल भक्तों के मन की भावना को व्यक्त करते हैं — जहाँ वे माँ से अपने रास-गरबा में पधारने और जीवन में ज्ञान व मंगलता का प्रकाश फैलाने की प्रार्थना करते हैं।

यह भजन  गुजराती और निमाड़ी लोकशैली  गरबा के पारंपरिक रंगों से सुसज्जित है, जो नवरात्रि और भक्ति आयोजनों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

अब यह भक्ति गरबा गीत YouTube के साथ-साथ सभी प्रमुख Digital Audio Platforms पर उपलब्ध है।


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🎶साकेत गरबा म रमण आवजो माँ

(भक्ति गरबा गीत)


मुखड़ा

सुनो भक्तन की आस माँ,
करें अरदास आज।
साकेत गरबा म रमण आवजो माँ॥


1️⃣ अंतरा

कुम कुम का पग लय, मण्डप म आओ माँ,
साकेत न गरबा का साज सजाओ माँ।

थारो कण-कण म वास बड़ो,
थारो बिसवास आज।
साकेत गरबा म रमण आवजो माँ॥


2️⃣ अंतरा

सारा जगत की तू ही छे भूप माँ,
साकेत म आवजो बालिका रूप माँ।

सज्यो गरन को रास,
थारा प्रेम को आभास आज।
साकेत गरबा म रमण आवजो माँ॥


3️⃣ अंतरा

भक्ति भजन करा आठो पहर माँ,
साकेत न गरबा छे इन्दौर शहर माँ।

करो ज्ञान को प्रकाश,
गीत उधव थारो दास आज।
साकेत गरबा म रमण आवजो माँ॥

🎶 Saket garba m raman aavjo ma

Mukhda (Chorus)

Suno bhaktan ki aas maa,
Karen ardaas aaj.
Saket garba m raman aavjo ma |


1️⃣ Antara

Kum kum ka pag lai, mandap mein aao maa,
Saaket na garba ka saaj sajao maa.

Thaaro kan-kan mein vaas bado,
Thaaro biswaas aaj.
Saket garba m raman aavjo ma॥


2️⃣ Antara

Saara jagat ki tu hi chhe bhoop maa,
Saaket mein aavjo baalika roop maa.

Sajyo garan ko raas,
Thaara prem ko aabhaas aaj.
Saket garba m raman aavjo ma॥


3️⃣ Antara

Bhakti bhajan kara aatho pehar maa,
Saaket na garba chhe Indore shehar maa.

Karo gyaan ko prakaash,
Geet Udhav thaaro daas aaj.
Saket garba m raman aavjo ma॥

🎶 गीत का विस्तृत भावार्थ (Lyrics Explanation)

यह गीत माँ दुर्गा / जगदम्बा को समर्पित एक भावपूर्ण निमाड़ी भक्ति-गरबा है। पूरे गीत में भक्तों की आस्था, प्रेम, विश्वास और माँ को अपने बीच पधारने का निवेदन व्यक्त किया गया है। गरबा और रास के माध्यम से माँ की आराधना की जा रही है।


🌸 मुखड़ा का भावार्थ

 

“सुनो भक्तन की आस माँ, करें अरदास आज
साकेत गरबा म रमण आवजो माँ”

भक्त माँ से करुण पुकार कर रहे हैं। वे कहते हैं —
हे माँ! आज हम सब भक्त पूरे मन से आपकी आराधना कर रहे हैं। हमारी विनती सुनिए और हमारे रास-गरबा के उत्सव में स्वयं पधारिए।
यह मुखड़ा पूरे गीत का सार है, जिसमें भक्ति और उत्सव का संगम दिखाई देता है।


🌺 अंतरा 1 का भावार्थ

 

“कुमकुम का पग लय मण्डप म अओ माँ
साकेत न गरबा का साज सजाओ माँ”

इस अंतरे में माँ के मण्डप में आगमन का सुंदर चित्रण है।
भक्त माँ से निवेदन करते हैं कि वे कुमकुम से सजे चरणों के साथ मण्डप में प्रवेश करें और गरबा की शोभा बढ़ाएँ।

“थारो कण कण म वास, बड़ो थारो विश्वास आज”

भक्त यह स्वीकार करते हैं कि माँ का वास कण-कण में है और उन्हें माँ पर अटूट विश्वास है।
यह अंतरा श्रद्धा और आस्था को दर्शाता है।


🌼 अंतरा 2 का भावार्थ

 

“सारा जगत की तू ही छे भूप माँ
साकेत म आवजो बालिका रूप माँ”

यहाँ माँ को संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री कहा गया है।
भक्त माँ से आग्रह करते हैं कि वे बालिका रूप में साकेत (पवित्र स्थान) में पधारें।

“सज्यो गरबा को रास, थारा प्रेम को आभास आज”

गरबा का रास सज चुका है और भक्तों को माँ के प्रेम का अनुभव हो रहा है।
यह अंतरा माँ के ममतामयी स्वरूप और प्रेम भावना को उजागर करता है।


🌸 अंतरा 3 का भावार्थ

 

“भक्ति भजन करा आठो पहर माँ”

भक्त दिन-रात माँ के भजन और भक्ति में लीन हैं।
हर पल माँ का स्मरण हो रहा है।

“करो ज्ञान को प्रकाश, गीत उधव थारो दास आज”

यहाँ माँ से प्रार्थना की गई है कि वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ
गीतकार स्वयं को माँ का दास मानते हुए विनम्र भाव से अपनी रचना अर्पित कर रहे हैं।


🌺 समग्र भाव

यह गीत:

  • माँ दुर्गा की करुणा, शक्ति और प्रेम को दर्शाता है

  • नवरात्रि, गरबा और भक्ति उत्सवों के लिए अत्यंत उपयुक्त है

  • निमाड़ी लोकभाषा में लोकसंस्कृति और आध्यात्मिक भावना का सुंदर संगम है

गीत भक्तों और माँ के बीच के भावनात्मक संबंध को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।

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