निमाड़ की लोक कलाएँ
लेखक – गीतेश कुमार भार्गव
परिचय
मिट्टी की खुशबू और लोकभावना
निमाड़ क्षेत्र, मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित, अपनी समृद्ध संस्कृति, लोकगीतों और कलाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की लोककलाएँ सिर्फ सौंदर्य नहीं, बल्कि लोकजीवन की सच्ची झलक प्रस्तुत करती हैं — खेती, त्योहार, और धार्मिक आस्थाएँ सब इसमें रची-बसी हैं।
निमाड़ की चित्रकला – रंगों में जीवन की झलक
यहाँ की दीवारों और आँगनों पर बनाई जाने वाली मिट्टी की चित्रकला विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
संजा माता और गोवर्धन पूजा में स्थानीय देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और लोककथाओं का चित्रण किया जाता है।
इन कलाओं में उपयोग होने वाले रंग पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं —गाय के गोबर ,मिट्टी, चूना, कोयला और फूलों से बने।

2️⃣ लोकसंगीत और नृत्य – हृदय की धड़कन
निमाड़ी लोकसंगीत में मालवी ,गुजराती , हिन्दी और राजस्थानी शब्दो और गायन शैली का सुंदर मिश्रण मिलता है।
कलगी तुर्रा,काठी नृत्य,गणगौर गीत, सिंगाजी के भजन, निर्गुणी भजन कबीर पंथी, निमाड़ी तीज त्योहारों के गीत, निमाड़ी संतों के भजन,फाग गीत,भगोरिया ,मेला गीत और बधाई गीत यहाँ की संस्कृति का मुख्य हिस्सा हैं।
पारंपरिक , ढोलक, मंजीरा ,मंजीरा ,मृदुंग ,जैसे वाद्ययंत्रों से संगीत में लोकभावना झलकती है।
3️⃣ हस्तकला और लोकजीवन
निमाड़ के लोग मिट्टी, बांस, लकड़ी और कपड़े से सुंदर वस्तुएँ और कृषि उपकरण बनाते हैं
मिट्टी के बर्तन, हस्तनिर्मित आभूषण, माहेश्वरी साड़ियाँ ,सूती बुनाई , और गोदड़ी कला (patchwork) यहाँ के घरों में आज भी प्रचलित हैं।
पुरुष ज्यादातर सिर पर पगड़ी ,धोती कुर्ता पहनते हैं और महिलाएं साड़ी पहनती हैं
- यह सब न सिर्फ जीविका का साधन हैं बल्कि परंपरा को जीवित रखने का माध्यम भी।
4️⃣ त्योहारों और मेले का रंग
निमाड़ में गणगौर, नवरात्रि , रक्षाबंधन ,होली ,भगोरिया मेला और दीवाली विशेष उत्साह से मनाए जाते हैं।
अधिकांश निमाड़वासी स्थानीय त्यौहारों का आनंद लेते हैं, जैसे हिंदू त्यौहार, कृषि और प्रकृति को भगवान मानते हैं और वे अपने पालतू पशुओं जैसे गाय, भैंस आदि के साथ भी त्यौहारों का आनंद लेते हैं।
- इन अवसरों पर लोककलाएँ जैसे — संगीत, नृत्य और चित्रकला सब मिलकर लोकसंस्कृति का उत्सव रचते और मनाते हैं।
- मध्य प्रदेश राज्य सांस्कृतिक विभाग भी निमाड़ उत्सव जैसे कुछ उत्सवों का आयोजन करता है।
5️⃣ आधुनिक युग में निमाड़ की लोककलाओं की स्थिति
आधुनिकता के प्रभाव में इन कलाओं को चुनौतियाँ मिल रही हैं, परंतु अब युवा कलाकार और सोशल मीडिया इन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।
सांस्कृतिक संगठन ,सामाजिक संगठन और सरकारे इन परंपराओं को सहेजने का कार्य कर रहे हैं।
निष्कर्ष
निमाड़ की लोक कलाएँ सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव हैं। इनमें मिट्टी की सोंधी खुशबू, लोकविश्वास और सांस्कृतिक एकता का संगम मिलता है। इन कलाओं को संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
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