“चलती क्यों ओ राधा” जो सीधे दिल तक जाती हैं 5 Powerful Lines

🎶 चलती क्यों नी ओ राधा, चलती क्यों नई ओ 🎶
✍️ गीतकार: पंकज परमार
🎤 गायक: गीतेश कुमार
अन्तरा – 1
चलती क्यों नी ओ राधा, चलती क्यों नी ओ
थारा लें न रास रचायो, चलती क्यों नी ओ
साड़ी लायो, चूंदड़ लायो
रतन जड़्या झुमका लायो
पेरती क्यों नी वो राधा, पेरती क्यों नी वो
थारा लें न रास रचायो, चलती क्यों नी ओ
अन्तरा – 2
नथणी लायो, हार लायो
सतरंगी चुड़ला लायो
खनन-खनन चूड़ी खनकावती क्यों नी वो
थारा लें न रास रचायो, चलती क्यों नी ओ
अन्तरा – 3
कम्मर कदोरो लायो
चांदी को छल्लो लायो
घूंघट में ठुमको लगावती क्यों नी वो
थारा लें न रास रचायो, चलती क्यों नी ओ
अन्तरा – 4
क्रीम-पाउडर, काजल लायो
छन-छनाती पायल लायो
बंसी बजाऊं जल्दी आवती क्यों नी ओ
थारा लें न रास रचायो, चलती क्यों नी ओ
🎶 Chalti Kyon ni O Radha, Chalti Kyon Ni O 🎶
✍️ Geetkar: Pankaj Parmar
🎤 Gayak: Gitesh Kumar
Antara – 1
Chalti kyon ni o Radha, chalti kyon ni o
Thara len na raas rachayo, chalti kyon ni o
Saadi layo, chundad layo
Ratan jadya jhumka layo
Perti kyon ni wo Radha, perti kyon ni wo
Thara len na raas rachayo, chalti kyon ni o
Antara – 2
Nathni layo, haar layo
Satrangi chudla layo
Khanan-khanan chudi khankavti kyon ni wo
Thara len na raas rachayo, chalti kyon ni o
Antara – 3
Kammar kadoro layo
Chandi ko chhallo layo
Ghunghat mein thumko lagavti kyon ni wo
Thara len na raas rachayo, chalti kyon ni o
Antara – 4
Cream-powder, kajal layo
Chhan-chhanati payal layo
Bansi bajau jaldi aavti kyon ni o
Thara len na raas rachayo, chalti kyon ni o

गीत “चलती क्यों नी ओ राधा” : विस्तृत भावार्थ व व्याख्या
“चलती क्यों ओ राधा” एक अत्यंत मधुर, भावुक और लोकसंस्कृति से जुड़ा हुआ निमाड़ी लोकगीत है। यह गीत राधा–कृष्ण की प्रेम-लीला को लोकभाषा के माध्यम से बड़ी सहजता और आत्मीयता से प्रस्तुत करता है। इसमें श्रृंगार रस, विरह भाव और मधुर अनुराग का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
गीत का मूल भाव
इस गीत में श्रीकृष्ण, राधा से प्रेमपूर्वक प्रश्न करते हैं—
“चलती क्यों नी ओ राधा, चलती क्यों नी ओ”
अर्थात् राधा के न आने का कारण पूछा जा रहा है। यह प्रश्न केवल शाब्दिक नहीं, बल्कि प्रेम में छिपी मधुर शिकायत और अनुरोध को दर्शाता है। कृष्ण का यह भाव दर्शाता है कि उनके द्वारा रचित रास-लीला राधा के बिना अधूरी है।
1
पहले अंतरे में कृष्ण राधा के लिए अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करते हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने राधा के लिए सुंदर साड़ी, चूंदड़ और रत्न जड़ित झुमके लाए हैं। यह श्रृंगार सामग्री केवल आभूषण नहीं, बल्कि प्रेम का प्रतीक है।
राधा द्वारा इन वस्तुओं को न पहनना, कृष्ण के हृदय में छिपी पीड़ा को उजागर करता है। यहाँ कृष्ण यह अनुभव करते हैं कि उन्होंने राधा के लिए इतना कुछ किया, फिर भी राधा मौन है और दूर बनी हुई है।
2
दूसरे अंतरे में कृष्ण राधा के लिए और भी श्रृंगार सामग्री—नथनी, हार और सतरंगी चूड़ियाँ लाने की बात करते हैं। चूड़ियों की खनन-खनन ध्वनि स्त्री सौंदर्य और प्रेम की चंचलता को दर्शाती है।
यहाँ कृष्ण चाहते हैं कि राधा इन चूड़ियों को पहनकर प्रेम की स्वीकृति दे, किंतु राधा का न आना इस बात को दर्शाता है कि वह किसी भावनात्मक उलझन या मान में बंधी हुई है।
3
तीसरे अंतरे में कमर कदोरा और चांदी के छल्ले का उल्लेख आता है। यह अंतरा राधा के नृत्य और सौंदर्य की कल्पना से जुड़ा है। कृष्ण राधा को घूंघट में ठुमका लगाते हुए देखने की कामना करते हैं।
यहाँ प्रेम का स्वर और अधिक गहन हो जाता है। राधा का न आना अब केवल विरह नहीं, बल्कि कृष्ण की अधूरी इच्छा का प्रतीक बन जाता है।
4
अंतिम अंतरे में कृष्ण राधा के संपूर्ण श्रृंगार की बात करते हैं—क्रीम, पाउडर, काजल और छन-छनाती पायल। यह अंतरा प्रेम की चरम अवस्था को दर्शाता है।
कृष्ण कहते हैं कि वे बंसी (बांसुरी) बजा रहे हैं, फिर भी राधा जल्दी नहीं आ रही। बांसुरी का स्वर आत्मा की पुकार का प्रतीक है, और राधा का न आना प्रेम में धैर्य, प्रतीक्षा और समर्पण को दर्शाता है।
सांस्कृतिक और लोकमहत्व
यह गीत निमाड़ अंचल की लोकसंस्कृति, भाषा और भावनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें लोकजीवन की सादगी, प्रेम की गहराई और परंपरागत श्रृंगार का सुंदर चित्रण है।
“चलती क्यों ओ राधा” केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि लोकहृदय की आवाज़ है, जिसमें प्रेम, प्रतीक्षा, अनुराग और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
निष्कर्ष
यह गीत श्रोता के हृदय को सीधे छू जाता है क्योंकि इसमें न दिखावा है, न बनावट—सिर्फ सच्चा प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव है। राधा का मौन और कृष्ण की पुकार इस गीत को कालजयी बना देती है।


