निमाड़ी कलाकार

गोरी थारा बिना अच्छौ लग नी म्हारा मन क निमाड़ी पति पत्नी हास्य गीत

गोरी थारा बिना, अच्छौ लग नी म्हारा मन क | Nimadi Husband–Wife Comedy Song

गोरी थारा बिना,अच्छौ लग नी म्हारा मन क | दिल से जुड़ा निमाड़ी पति–पत्नी प्रेम गीत

गोरी थारा बिना अच्छौ लग नी म्हारा मन क निमाड़ी पति पत्नी हास्य गीत

🎵 गीत शीर्षक : गोरी थारा बिना,अच्छौ लग नी म्हारा मन क  

(निमाड़ी पति–पत्नी हास्य गीत)

✍️ गीतकार: उधव यादव
🎤 गायक: गीतेश कुमार भार्गव
🎙️ रिकॉर्डिंग स्टूडियो: कुमार स्टूडियो, खरगोन
🎶 शैली: लोक निमाड़ी / पति–पत्नी हास्य गीत

🎼 गीत परिचय | Nimadi Husband–Wife Comedy Song

निमाड़ी लोकसंस्कृति की मिठास लिए यह गीत पति–पत्नी के प्यार, रूठने-मनाने और घरेलू नोक-झोंक को  हँसी-मजाक के अंदाज़ में बड़े ही सजीव रूप में प्रस्तुत करता है।


🎵 मुखड़ा 

गुस्सो हुय न घर सी चली,
संभाल अपना धन क
छोड़ी न जाए मत सजन क

गोरी थारा बिना,
अच्छौ लग नी म्हारा मन क


🎶 अन्तरा – 1

पति-पत्नी की लड़ाई, बात छोटी-मोटी
लग पकवान गोरी, थारा हाथ की रोटी
वात मनि ल रानी, मत बढ़ाव उलझन क
छोड़ी न जाए मत सजन क

गोरी थारा बिना,
अच्छौ लग नी म्हारा मन क


🎶 अन्तरा – 2

पियर मा बन ग नी ज्यादा दिन को आसरो
भोजयी न मारग, रात-दिन को फाचरो
घर की रौनक बढ़ जो, थारी चूड़ी न खन क
छोड़ी न जाए मत साजन क

गोरी थारा बिना,
अच्छौ लग नी म्हारा मन क


🎶 अन्तरा – 3

जीवन भर का सब रिश्ता सच्चा
थारा बिना घर सुनों-सुनों, बल बच्चा
घर की मंत्री गोरी, संभालय ल सदन क
छोड़ी न जाए मत साजन क

गोरी थारा बिना,
अच्छौ लग नी म्हारा मन क


🎶 अन्तरा – 4

म्हारा साजन, तुमक छोड़ी नी जाउंगा
ना ही कभी तुमक डोला बताउंगा
प्रेमी-प्रीतम एक साथ म बितावा जीवन क
छोड़ी नी जाउंगा साजन क

पिया थारा बिना,
अच्छो लग नी म्हारा मन क


🎵 समापन 

गुस्सो हुय एन घर सी कभी,
जाऊ नी सजन क
छोड़ी नी जाऊंगा बलम क

पिया थारा बिना,
अच्छो लग नी म्हारा मन क

🎵 Song Title: Gori Thara Bina, Achchho Lag Ni Mhara Man K
(Nimadi Husband–Wife Comedy Song)

 

✍️ Lyricist: Udhav Yadav
🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
🎙️ Recording Studio: Kumar Studio, Khargone
🎶 Genre: Nimadi Folk / Husband–Wife Comedy Song

🎼 Song Introduction

Nimadi folk culture ki mithaas liye yeh geet pati–patni ke pyaar, roothna–manaana aur gharelu nok-jhok ko hasi-mazaak ke andaaz mein bade hi sajeev roop mein prastut karta hai.

🎵 Chorus

Gusso huy n ghar si chali,
Sambhaal apna dhan k
Chhodi na jaaye mat sajan k

Gori thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

🎶 Verse – 1

Pati–patni ki ladaai, baat chhoti-moti
Lag pakwaan gori, thara haath ki roti
Vaat mani l rani, mat badhaav uljhan k
Chhodi na jaaye mat sajan k

Gori thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

🎶 Verse – 2

Piyar ma ban g ni zyada din ko aasro
Bhojyi n maarag, raat-din ko faachro
Ghar ki raunak badh jo, thaari choodi n khan k
Chhodi na jaaye mat saajan k

Gori thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

🎶 Verse – 3

Jeevan bhar ka sab rishta sachcha
Thaara bina ghar suno-suno, bal bachcha
Ghar ki mantri gori, sambhaalay l sadan k
Chhodi na jaaye mat saajan k

Gori thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

🎶 Verse – 4

Mharaa saajan, tumk chhodi ni jaaunga
Na hi kabhi tumk dola bataaunga
Premi-preetam ek saath m bitaava jeevan k
Chhodi ni jaaunga saajan k

Piya thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

🎵 Ending (Outro)

Gusso huy en ghar si kabhi,
Jaau ni saajan k
Chhodi ni jaaunga balam k

Piya thara bina,
Achchho lag ni mhara man k

यह गीत निमाड़ी लोकसंस्कृति पर आधारित एक मधुर और हास्यपूर्ण पति–पत्नी गीत है, जिसमें दांपत्य जीवन की छोटी-छोटी नोक-झोंक, रूठना-मनाना और गहरा प्रेम सहज रूप से उभरकर आता है। गीत में पति अपनी पत्नी को मनाते हुए कहता है कि उसके बिना घर सूना लगता है और मन को चैन नहीं मिलता।

पत्नी का गुस्से में मायके जाना, घरेलू बातों पर तकरार और फिर प्रेमपूर्ण समझाइश—इन सभी भावों को सरल ग्रामीण भाषा में प्रस्तुत किया गया है। गीत यह संदेश देता है कि जीवन की छोटी बातों को लेकर रिश्तों में दूरी नहीं बनानी चाहिए।

पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास, प्रेम और साथ निभाने से ही मजबूत होता है। निमाड़ी बोली की मिठास, लोकजीवन की झलक और हास्य के तत्त्व इस गीत को मनोरंजक होने के साथ-साथ भावनात्मक भी बनाते हैं, जिससे श्रोता स्वयं को इससे जुड़ा हुआ महसूस करता है।

Scroll to Top