आई गई अखाती तीज़ – निमाड़ी सफरी राग
लेखक: उद्धव भाई गायक: गीतेश कुमार भार्गव

“आई गई अखाती तीज़” निमाड़ का एक लोकप्रिय निमाड़ी सफरी राग लोकगीत है, जिसे प्रसिद्ध निमाड़ी लोकगायक उद्धव भाई यादव ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है। यह गीत अखाती तीज़ के त्योहार, पारंपरिक ग्रामीण जीवन, किसान संस्कृति, और निमाड़ी लोकभावना का सुंदर वर्णन करता है।
यहाँ आप इस गाने के पूरे lyrics को साफ़, सुंदर और आसान रूप में पढ़ सकते हैं।
🎵 आई गई अखाती तीज़ Lyrics – Uddhav Bhai Yadav
खुशियाँ छाई गई चहुं ओर देखो आई गई अखाति तीज
आई गई अखाती तीज, खरे भाई वाय दे व शगूण का बीज
(1) प्रथम अंतरा
मों धरती की पूजा करी न, प्रशुधन क नहला वजरे
खेत सी लाय न माटी का देला, चुवका म जमावजो
श्रावण भार्दो कुवार कार्तिक नाम घरी धरी न ने सजावजो
कुम्हार घर सी शुभ घड़ी म, अक्षय कलश घर लावणे
बण मीठो मी कही पकवान रे भाई, पूरण पूलय को लजीज
खुशियाँ छाई गई चहुं ओर देखो आई गई अखाति तीज
(2) दूसरा अंतरा
मन मोयरित को काम करण? करण को, दिन यो भाई खास
बिना झिझक सब काम करतो, करजो हरि बिस्वास
गली-गली सब किसान भाई भांजू अखाति की रास
रास लगय न ब्रईल्या जोड़ी क, वाई दोव मामरित चास
गीत उधव भाई पूवन नारायण आवा दहलीज
खुशियाँ छाई गई चहुं ओर देखो आई गई अखाति तीज
ENGLISH LYRICS
🎵 Aayi Gayi Akhatee Teej – Lyrics
Singer: Uddhav Bhai Yadav
Genre: Nimadi Lokgeet / Akhati Teej Song
Language: Nimadi (Roman English)
🎶 Chorus
Khushiya chhayi gayi chahun or,
Dekho aayi gayi Akhatee Teej।
Aayi gayi Akhatee Teej re bhaee,
Vay dev shagoon ka beej॥
🎵 Verse 1
Maa dharti ki pooja kari n,
Parshudhan ka nehalavjo।
Khet see lay n matee ka dela,
Chauvka mein jamavjo।
Shravan, Bhado, Kuvar, Kartik,
Naam dhari n sajavjo।
Kumhar ghar see shubh ghadi mein,
Akshay kalash ghar lavjo।
Ban meetho bado pakvaan re bhaee,
Pooran Pooly ko lajeej॥
🎶 Chorus
Khushiya chhayi gayi chahun or,
Dekho aayi gayi Akhatee Teej॥
🎵 Verse 2
Man moyarit ko kaam karna ko,
Din chhe yo bhaee khaas।
Bina jhijhak sab kaam karjo,
Karjo Hari bishvaas।
Galee-galee sab kisan bhaee,
Bhanj Akhatee kee raas।
Raas lagay n bayalya jodi k,
Vayee dev moyarit chaas।
Geet Uddhav bhaee Pavan Narayan,
Aavag dahhleej॥
🎶 Chorus (Repeat)
Khushiya chhayi gayi chahun or,
Dekho aayi gayi Akhatee Teej॥
यह गीत अखाती तीज (अक्षय तृतीया) के पावन पर्व की खुशी और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता है। भजन में बताया गया है कि इस दिन चारों ओर उल्लास और मंगलभाव फैल जाता है। अखाती तीज को शुभ कार्यों की शुरुआत का श्रेष्ठ दिन माना जाता है, इसलिए इसे शगुन और समृद्धि का बीज कहा गया है।
पहले अंतरे में धरती माता और पशुधन की पूजा का वर्णन है। किसान खेत से मिट्टी लाकर उसे सहेजते हैं, जो आने वाली अच्छी फसल का प्रतीक है। साथ ही वर्षा ऋतुओं—श्रावण, भादो, क्वार और कार्तिक—का स्मरण कर खेती-किसानी की तैयारी दिखाई गई है। कुम्हार के घर से शुभ समय में अक्षय कलश लाना समृद्धि और निरंतरता का संकेत है। घरों में मीठे पकवान, विशेषकर पूरण-पोली, बनाए जाते हैं, जिससे त्योहार की मिठास और बढ़ जाती है।
दूसरे अंतरे में यह संदेश दिया गया है कि अखाती तीज के दिन बिना संकोच शुभ कार्य करने चाहिए। यह दिन हरि-विश्वास का प्रतीक है। गांव-गांव में किसान भाई उत्साह से इस पर्व को मनाते हैं और खेती के नए कार्य आरंभ करते हैं। गीत के अंत में भगवान नारायण के आगमन की मंगल कामना के साथ पर्व की पवित्रता और लोक-आस्था को उजागर किया गया है।
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Song: आई गई अखाती तीज़
Genre: निमाड़ी सफरी राग
Language: निमाड़ी
Category: Nimaadi Folk Song
About Uddhav Bhai Yadav
उद्धव भाई यादव निमाड़ के प्रमुख लोकगायक हैं, जो विशेष रूप से सफरी राग, भजन, और निमाड़ी लोकगीतों के लिए जाने जाते हैं। उनकी गायकी में निमाड़ की सांस्कृतिक परंपरा, ग्रामीण जीवन और लोकसंगीत की असल आत्मा सुनाई देती है।


