मोक्षदायिनी मां नर्मदा : उत्पत्ति, महात्म्य और पौराणिक रहस्य
पतित पावनी, पापनाशिनी, शिवस्वरूपा नर्मदा

✍️ लेखक – राजेश रेवलिया जी
✍️ संपादन – गीतेश कुमार भार्गव
क्यों अद्वितीय हैं मां नर्मदा
भारतीय सनातन परंपरा में नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि सजीव देवियाँ हैं। किंतु इन सभी में मां नर्मदा का स्थान सर्वोच्च माना गया है।
जहाँ—
गंगा में स्नान से मोक्ष,
यमुना में सेवा से मोक्ष,
सरस्वती में ज्ञान से मोक्ष,
वहीं मां नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से ही मोक्ष प्राप्त हो जाता है।
यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया है—
“ नर्मदा दर्शनात् मोक्षः ”
अमरकंटक : शिव तपस्या और दिव्य घटना का साक्षी
प्राचीन काल में भगवान शिव अमरकंटक पर्वत पर एकांत में स्थित होकर घोर तपस्या में लीन थे। अमरकंटक केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि नर्मदा, सोन और जोहिला नदियों का उद्गम स्थल तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
उसी समय अंधकासूर नामक महाबली असुर वहाँ पहुँचा। शिवजी को ध्यानस्थ देखकर उसने—
उन्हें युद्ध के लिए ललकारा
अपशब्द कहे
तपस्या में बाधा डालने का प्रयास किया
भगवान शिव प्रारंभ में मौन रहे, किंतु जब धर्म की मर्यादा भंग होने लगी, तब उन्होंने असुर की चुनौती स्वीकार की।
अंधकासूर वध और नर्मदा का प्राकट्य

भगवान शिव और अंधकासूर के मध्य कई दिनों तक घोर संग्राम चला। युद्ध करते-करते भगवान शिव के शरीर से पसीने की एक दिव्य बूंद धरती पर गिरी।
👉 उसी क्षण,
👉 उसी स्थान पर,
👉 उसी ऊर्जा से
एक तेजस्विनी कन्या प्रकट हुई।
युद्ध के दौरान अंधकासूर को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया और वह रणभूमि छोड़कर भाग गया।
माघ शुक्ल सप्तमी : नर्मदा का अवतरण दिवस
यह दिव्य घटना माघ मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि को हुई।
इसी कारण आज भी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा जयंती के रूप में मनाया जाता है।
भगवान शिव ने कन्या से पूछा—
“हे देवी! तुम कौन हो?”
कन्या ने उत्तर दिया—
“मैं आपके पसीने की बूंद से उत्पन्न हुई हूँ।”
तब भगवान शिव ने स्नेहपूर्वक उसका नाम “नर्मदा” रखा —
अर्थात जो सभी को कोमलता से शुद्ध कर दे।
नर्मदा और शिव संवाद : संसार का भार

जब भगवान शिव कैलाश लौटने लगे, तब नर्मदा ने पूछा—
“हे प्रभु! मेरा स्थान क्या होगा? मेरा उद्देश्य क्या है?”
शिवजी बोले—
“तुम संसार के पापों का नाश करोगी, जीवों को मोक्ष दोगी।”
यह सुनकर नर्मदा ने विनम्र किंतु दृढ़ स्वर में कहा—
“प्रभु! क्या समस्त संसार के पापों का भार मैं अकेली वहन कर पाऊँगी?”
मां नर्मदा की चार दिव्य शर्तें
नर्मदा ने शिवजी के समक्ष चार शर्तें रखीं—
1️⃣ सर्वोच्च सम्मान
मेरा स्थान गंगा, यमुना और सरस्वती से भी ऊँचा होगा।
2️⃣ अविनाशी अस्तित्व
प्रलय काल में भी मैं अजर-अमर रहूँगी।
3️⃣ दर्शन से मोक्ष
जहाँ अन्य नदियों में स्नान से मोक्ष है,
वहाँ मेरे दर्शन मात्र से मोक्ष मिले।
4️⃣ कंकर-कंकर शिव
मेरे तट का हर कण नर्मदेश्वर महादेव के रूप में पूजित होगा।
भगवान शिव ने प्रसन्न होकर सभी शर्तें स्वीकार कर लीं।
त्रिदेवों का आशीर्वाद और मेकलराज को समर्पण
नर्मदा ने ब्रह्मा और विष्णु से भी आशीर्वाद की इच्छा व्यक्त की।
शिवजी के आह्वान पर ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रकट हुए।
तीनों देवों ने नर्मदा को—
पतित पावनी
पापनाशिनी
मोक्षदायिनी
का वरदान दिया और उन्हें मेकलराज को सौंप दिया।
सोनभद्र, जुहिला और नर्मदा : नदी रूपक कथा

मेकलराज ने नर्मदा का पालन-पोषण किया। विवाह हेतु शर्त रखी गई कि जो राजकुमार गुलबकावली पुष्प लाएगा, वही वर बनेगा।
यह कार्य राजकुमार सोनभद्र ने पूरा किया।
परंतु—
जुहिला (नदी)
सोनभद्र (नदी)
के बीच प्रेम हो गया।
यह देखकर नर्मदा विरक्त होकर विपरीत दिशा में प्रवाहित हो गईं।
👉 यही कारण है कि
नर्मदा पूर्व से पश्चिम बहती हैं,
जबकि अधिकांश नदियाँ पश्चिम से पूर्व।
नर्मदा का भूगर्भीय रहस्य

मान्यता है कि—
नर्मदा उत्तर व दक्षिण तट में सात-सात मील तक भूमिगत बहती हैं
पृथ्वी पर वे केवल दर्शनार्थ प्रकट होती हैं
इसी कारण नर्मदा को रहस्यमयी नदी कहा गया है।
नर्मदा का सामाजिक-धार्मिक महात्म्य
निमाड़ की जीवनरेखा
मध्यप्रदेश की आत्मा
नर्मदा तट पर दाह संस्कार के बाद गंगा जाने की आवश्यकता नहीं
गंगा स्वयं नर्मदा से मिलने आती हैं (मान्यता)
उपसंहार
मां नर्मदा शिव की करुणा, शक्ति और मोक्ष का सजीव स्वरूप हैं।
उनका प्रवाह केवल जल का नहीं, चेतना का प्रवाह है।
नर्मदा के दर्शन से जीवन शुद्ध, मन निर्मल और आत्मा मुक्त हो जाती है।
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FAQ
❓ मां नर्मदा की उत्पत्ति कैसे हुई?
उत्तर: मां नर्मदा की उत्पत्ति अमरकंटक पर्वत पर भगवान शिव के पसीने की बूंद से हुई थी। यह घटना माघ मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि को हुई।
❓ नर्मदा को मोक्षदायिनी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार जहां अन्य नदियों में स्नान से मोक्ष मिलता है, वहीं मां नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से ही मोक्ष प्राप्त होता है, इसलिए उन्हें मोक्षदायिनी कहा गया है।
❓ नर्मदा नदी उल्टी दिशा में क्यों बहती है?
उत्तर: पौराणिक कथा के अनुसार सोनभद्र और जुहिला से जुड़ी घटना के बाद मां नर्मदा विरक्त होकर पूर्व से पश्चिम दिशा में प्रवाहित हुईं, जो अन्य नदियों से भिन्न है।
❓ नर्मदा जयंती कब मनाई जाती है?
उत्तर: नर्मदा जयंती माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जो मां नर्मदा के अवतरण का दिन माना जाता है।
❓ नर्मदा तट के कंकर क्यों पूजनीय हैं?
उत्तर: भगवान शिव के वरदान से नर्मदा तट का प्रत्येक कंकर नर्मदेश्वर महादेव के रूप में पूजनीय माना जाता है।


