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नर्मदाष्टकम् NARMADASTKAM

नर्मदाष्टकम् NARMADASTKAM – HINDI ENGLISH LYRICS

सविन्दु सिन्धु सुस्खलत्तरंग भंगरंजितं

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नर्मदाष्टकम् NARMADASTKAM - HINDI ENGLISH LYRICS
नर्मदाष्टकम्

नर्मदाष्टकम् NARMADASTKAM – HINDI ENGLISH LYRICS

नर्मदाष्टकम् मोक्षदायिनी मां नर्मदा की एक पावन स्तुति है।
इस दिव्य स्तोत्र को गीतेश कुमार भार्गव ने श्रद्धा, भाव और भक्ति के साथ गाया है।
यह प्रस्तुति श्रोताओं को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

॥ नर्मदाष्टकम् ॥

१.
सविन्दु सिन्धु सुस्खलत्तरंग भंगरंजितं
द्विषत्सु पापजात जात कारिवारि संयुतम् ।
कृतान्तदूत कालभूत भीतिहारि वर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ १ ॥
२.
त्वदम्बुलीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकं
कलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थनायकम् ।
सुमत्स्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक शर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ २ ॥
३.
महागभीर नीरपूर पापधूत भूतलं
ध्वनत्समस्त पातकारि दारिता पदाचलम् ।
जगल्लये महाभये मृकण्डुसूनु हर्म्यदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ३ ॥
४.
गतं तदैव मे भयं त्वदम्बु वीक्षितं यदा
मृकण्डुसूनु शौनका सुरारि देवि सर्वदा ।
पुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःखवर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ४ ॥
५.
अलक्ष लक्ष किन्नरामरासुरादि पूजितं
सुलक्ष नीर तीर धीर पक्षिलक्ष कूजितम् ।
वशिष्ठ शिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ५ ॥
६.
सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षट्पदैः
धृतं स्वकीय मानसेषु नारदादि षट्पदैः ।
रवीन्दु रन्ति देव देव राज कर्म शर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ६ ॥
७.
अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्षसार सायुधं
ततस्तु जीव जन्तु तन्तु भुक्ति मुक्तिदायकम् ।
विरञ्चि विष्णु शंकरम् स्वकीय धाम वर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ७ ॥
८.
अहो मृतं स्वनं श्रुतं महेश केश जातटे
किरात सूत वाडवेषु पण्डिते शठे नटे ।
दुरन्त पाप ताप हारि सर्वजन्तु शर्मदे
त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ८ ॥
9.
इदन्तु नर्मदाष्टकं त्रिकालमेव ये सदा ।
पठन्ति ते निरन्तरं न यान्ति दुर्गतिं कदा ॥
सुलभ्य देहदुर्लभं महेशधाम गौरवं ।
पुनर्भवा नरा न वै विलोकयन्ति रौरवम् ॥

॥ नर्मदा प्रार्थना ॥

” ॐ नमो नर्मदायै नमः प्रातः नर्मदायै नमः निशि ,
      नमस्ते नर्मदे देवि , त्राहि मां भवसागरात् ॥ “

॥ Narmadashtakam ॥

1.
Savindu Sindhu Sushkhalattarang Bhangaranjitam
Dvisatsu Paapjaat Jaata Kariwaari Sanyutam |
Kritantadoota Kaalbhoota Bheetihaari Varmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 1 ||

2.
Tvadambulina Deena Meena Divya Sampradaayakam
Kalau Malaugh Bhaarahari Sarvatirtha Naayakam |
Sumatsya Kachchha Nakra Chakra Chakravaaka Sharmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 2 ||

3.
Mahaagabheera Neerpoora Paapdhoota Bhootalam
Dhvanatsamasta Paatakaari Daarita Padaachalam |
Jagallaye Mahaabhaye Mrikandusoonu Harmyade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 3 ||

4.
Gatam Tadaiva Me Bhayam Tvadambu Veekshitam Yadaa
Mrikandusoonu Shaunaka Suraari Devi Sarvadaa |
Punarbhavaabdhi Janmajam Bhavaabdhi Duhkhavarmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 4 ||

5.
Alaksha Laksha Kinnaraamaraasuraadi Poojitam
Sulaksha Neer Teera Dheera Pakshi Laksha Koojitam |
Vashishtha Shishta Pippalaada Kardamaadi Sharmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 5 ||

6.
Sanatkumara Naachiketa Kashyapaatri Shatpadaiḥ
Dhritam Swakeeya Maanaseshu Naaradaadi Shatpadaiḥ |
Raveendu Ranti Deva Devaraaja Karma Sharmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 6 ||

7.
Alakshalaksha Lakshapaapa Lakshasaara Saayudham
Tatastu Jeeva Jantu Tantu Bhukti Muktidaayakam |
Viranchi Vishnu Shankaram Swakeeya Dhaama Varmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 7 ||

8.
Aho Mritam Svanam Shrutam Mahesha Kesha Jaatate
Kiraata Soota Vaadaveshu Pandite Shathe Nate |
Duranta Paapa Taapa Haari Sarvajantu Sharmade
Tvadeeya Paadapankajam Namaami Devi Narmade || 8 ||


9. Narmadashtaka Phalashruti

Idantu Narmadashtakam Trikaalameva Ye Sadaa |
Pathanti Te Nirantaram Na Yaanti Durgatim Kada ||
Sulabhya Deha Durlabham Maheshadhaama Gauravam |
Punarbhavaa Naraa Na Vai Vilokayanti Rauravam ||


॥ Narmada Prarthana ॥

Om Namo Narmadaayai Namah |
Praatah Narmadaayai Namah |
Nishi Narmadaayai Namah |
Namaste Narmade Devi,
Traahi Maam Bhavasagaraat ||


नर्मदाष्टकम् – विस्तृत हिंदी भावार्थ

नर्मदाष्टकम् NARMADASTKAM - HINDI ENGLISH LYRICS
मां नर्मदा

 भूमिका

नर्मदाष्टकम् मोक्षदायिनी मां नर्मदा की एक अत्यंत पावन स्तुति है।
इस स्तोत्र में मां नर्मदा को पापहरिणी, भय नाशक, भुक्ति-मुक्ति दायिनी और
भगवान शिव के चरणों से प्रकट दिव्य शक्ति के रूप में नमन किया गया है।


 श्लोक 1 – भावार्थ

मां नर्मदा की धाराएँ बिंदु, सिंधु और तरंगों से सुशोभित हैं।
उनका जल शत्रुओं के पापों को नष्ट करने वाला है।
वे यमदूतों, काल और भूत-प्रेत के भय को हरने वाली हैं।
मैं ऐसी मां नर्मदा के कमल समान चरणों को प्रणाम करता हूँ।

भाव: नर्मदा केवल नदी नहीं, बल्कि मृत्यु के भय से रक्षा करने वाली देवी हैं।


 श्लोक 2 – भावार्थ

आपके जल में डूबे हुए दीन-हीन जीव भी दिव्य लोक को प्राप्त करते हैं।
कलियुग के पापों का भार हरने वाली आप सभी तीर्थों में श्रेष्ठ हैं।
आपके तट पर मत्स्य, कछुए, मगर और पक्षी आनंदपूर्वक निवास करते हैं।

भाव: नर्मदा में स्नान मात्र से कलियुग के भारी पाप भी नष्ट हो जाते हैं।


 श्लोक 3 – भावार्थ

मां नर्मदा का जल अत्यंत गहरा और पवित्र है,
जो पृथ्वी के समस्त पापों को धो देता है।
आपके प्रवाह से पर्वत भी कंपित हो जाते हैं।
प्रलय और महाभय में भी आप भक्तों को आश्रय देती हैं।

भाव: नर्मदा आपदा और प्रलय में भी रक्षक शक्ति हैं।


 श्लोक 4 – भावार्थ

जब भी मैंने आपके जल का दर्शन किया, मेरा समस्त भय नष्ट हो गया।
आप मृकण्डु ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय की रक्षक हैं।
आप जन्म-मरण के सागर से मुक्त करने वाली हैं।

भाव: नर्मदा भवसागर से पार लगाने वाली माता हैं।


 श्लोक 5 – भावार्थ

आपकी पूजा किन्नर, देव, असुर सभी करते हैं।
आपके तट सुंदर जल, धैर्यवान पक्षियों और मधुर कलरव से सुशोभित हैं।
वशिष्ठ, पिप्पलाद और कर्दम जैसे महर्षि आपके द्वारा आनंदित हुए।

 भाव: नर्मदा ऋषियों की तपोभूमि और साधना की आधारशिला हैं।


 श्लोक 6 – भावार्थ

सनक, नचिकेता, कश्यप, अत्रि और नारद जैसे महापुरुष
अपने हृदय में मां नर्मदा को धारण करते हैं।
चंद्र, सूर्य और इंद्र भी आपकी कृपा से कर्मफल पाते हैं।

भाव: नर्मदा देवताओं और ऋषियों की भी आराध्या हैं।


 श्लोक 7 – भावार्थ

आप असंख्य पापों को नष्ट करने वाली हैं।
आप जीव-जंतुओं को भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती हैं।
ब्रह्मा, विष्णु और शिव के धाम की रक्षा करने वाली आप ही हैं।

भाव: नर्मदा भुक्ति (सुख) और मुक्ति (मोक्ष) दोनों देने वाली हैं।


 श्लोक 8 – भावार्थ

हे मां! आपका नाम सुनते ही मृत्यु का भय नष्ट हो जाता है।
आप शिव की जटाओं से प्रकट हुई हैं।
आप दुष्टों के पापों और समस्त जीवों के कष्ट हरने वाली हैं।

भाव: नर्मदा नाम-स्मरण मात्र से जीवन पवित्र हो जाता है।


 नर्मदाष्टकम् – पाठ फल

जो व्यक्ति तीनों काल (प्रातः, मध्यान्ह, संध्या)
नर्मदाष्टकम् का नियमित पाठ करता है—

उसे कभी दुर्गति नहीं मिलती

शिवलोक की प्राप्ति होती है

पुनर्जन्म के भय से मुक्ति मिलती है

भाव: यह स्तोत्र मोक्ष का सुनिश्चित मार्ग है।


नर्मदा प्रार्थना – भावार्थ

हे मां नर्मदा!
मैं प्रातः और रात्रि में आपको नमन करता हूँ।
हे देवी! मुझे संसार रूपी सागर से पार उतारिए।


 निष्कर्ष

नर्मदाष्टकम् केवल स्तोत्र नहीं,
बल्कि आस्था, श्रद्धा और मोक्ष का दिव्य मंत्र है।
जो इसे भावपूर्वक पढ़ता या सुनता है,
उसका जीवन पवित्र और कल्याणमय हो जाता है।

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