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खेला डोडय्यो – निमाड़ी डोडगलयी गीत

खेला डोडय्यो – निमाड़ी डोडगलयी गीत – उद्धव भाई यादव |

खेला डोडय्यो – निमाड़ी डोडगलयी गीत – उद्धव भाई यादव

खेला डोडय्यो – निमाड़ी डोडगलयी गीत

खेला डोडय्यो” निमाड़ का एक पारंपरिक डोडगलयी लोकगीत है, जिसे बरसात के स्वागत और गांव के त्योहारों में गाया जाता है।
उद्धव भाई यादव द्वारा प्रस्तुत इस गीत में गांव की खुशियों, बरखा रानी की कृपा और पारंपरिक खेलों का सुंदर वर्णन मिलता है।
यह गीत निमाड़ी संस्कृति और लोकसंगीत की जीवंत परंपरा को दर्शाता है।
नीचे आप इस गीत के पूरे lyrics को साफ़ और पढ़ने में आसान फॉर्मेट में देख सकते हैं।

Song Details 

  • Song Title: खेला डोडय्यो

  • Singer: गीतेश कुमार भार्गव

  • Language: निमाड़ी

  • Genre: लोकगीत / डोडगलयी गीत

  • Category: Folk Song / वर्षा-उत्सव गीत

  • Region: निमाड़, मध्य प्रदेश

गाना सुनाने के लिए यहाँ क्लिक करे

Lyrics 

डोहगळ्य को आयो त्योहार, खेला डोडय्यो
नाखो डेडरा प पाणी की धार, खेला डोडय्यो


(1) पहला अंतरा 

डेड्रा का ऊपर म्हारी काकीजी जेतरो ना खोज पाणी
खुशी हुई न इना साल खोब बरसग बरखा राणी

कृपा करग, प्रतिपाल भी                                                                                                                                                                                                                                          बरसग बरखा इना साल भी ,

छाई गई रे खुशि की बहार
खेला डोडय्यो……..


(2) दूसरा अंतरा 

पळाश का पान्टा जंगल जाईन न

बाळक मिली नन ला व

शेरी गली नम डेडरा बणी न
घर घर अलख जगांवां


“कोठी प हाडको न थारो बेटो लाडको
 माथा प धरी न पळाश को झाड़को

करा घर घर अ असी पूकार
खेला डोडय्यो……..


(3) तीसरा अंतरा 

राज कय की सुण रे छोटिया
आज डोड्य्यो खेलागा
भलय नाख कोई कतरो भी पाणी
आज व क सेलांगा
टोलय बणय नन छोटी छोटी

खावा मीली न न सब बाग रोटी

गित उद्धव पवन को सार
खेला डोडय्यो…….

🌾 गीत का विस्तृत भावार्थ (Detailed Explanation)

यह गीत निमाड़ी अंचल के एक पारंपरिक लोक-पर्व “डोहगळा / डोडय्यो” से जुड़ा है। यह पर्व विशेष रूप से बरसात, जल, फसल और बाल-संस्कृति से संबंधित है। गीत में बच्चों की टोली, गाँव की गलियाँ, पेड़-पौधे और वर्षा की कामना—सब मिलकर ग्रामीण जीवन की सुंदर तस्वीर बनाते हैं।


🎶 मुखड़ा का भावार्थ

“डोहगळ्य को आयो त्योहार, खेला डोडय्यो
नाखो डेडरा प पाणी की धार”

मुखड़े में बताया गया है कि डोहगळा पर्व आ गया है और सब लोग “डोडय्यो” खेल रहे हैं।
डेडरा पर पानी की धार डालना वर्षा का प्रतीक है—मानो लोग प्रकृति से बरखा (बारिश) की प्रार्थना कर रहे हों।

👉 यह पर्व जल-पूजन और वर्षा-आह्वान का रूप भी है।


🎵 पहला अंतरा – भावार्थ

इस अंतरे में बरसात की खुशी और कृषि-जीवन की आशा दिखाई देती है।

  • काकीजी छत पर पानी खोजती हैं—यह संकेत है कि लंबे समय से बारिश का इंतज़ार था।

  • इस साल अच्छी बारिश हुई, इसलिए गाँव में खुशी फैल गई

  • “बरखा राणी” से कृपा की कामना की गई है कि वह इस वर्ष भी भरपूर वर्षा करें

  • बारिश से खेतों में हरियाली आए और खुशी की बहार छा जाए

👉 यह अंतरा किसान के मन की भावना को व्यक्त करता है।


🎵 दूसरा अंतरा – भावार्थ

यह अंतरा बच्चों की भूमिका और सामाजिक समरसता को दर्शाता है।

  • बच्चे जंगल से पलाश के पत्ते और डालियाँ लाते हैं।

  • उनसे डेडरा (प्रतीकात्मक ढांचा) बनाया जाता है।

  • बच्चे घर-घर जाकर गीत गाते हैं और अलख जगाते हैं

  • पलाश की टहनी सिर पर रखना शुभ माना जाता है—यह प्रकृति और मनुष्य के संबंध का प्रतीक है।

👉 यहाँ लोक-परंपरा में बच्चों की भागीदारी और सामूहिकता को महत्व दिया गया है।


🎵 तीसरा अंतरा – भावार्थ

अंतिम अंतरे में पर्व की मस्ती, त्याग और साझेदारी दिखाई देती है।

  • बच्चों को कहा जाता है—आज “डोडय्यो” खेलना है।

  • चाहे पानी कम हो या ज्यादा, सब मिलकर खेलेंगे।

  • छोटी-छोटी टोलियाँ बनती हैं।

  • खाने में साधारण रोटी मिलती है—यह दर्शाता है कि खुशी साधनों से नहीं, मिलजुल कर रहने से आती है

  • गीतकार उद्धव पवन इस लोकभाव को गीत के माध्यम से जीवंत करते हैं।

👉 यह अंतरा सिखाता है कि सादगी और सहभागिता ही लोकजीवन की आत्मा है


🌼 गीत का सांस्कृतिक महत्व

  • यह गीत निमाड़ी लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर है।

  • वर्षा, खेती, बच्चों के खेल और सामूहिक जीवन को जोड़ता है।

  • यह पर्व प्रकृति के साथ मानव संवाद का उदाहरण है।

  • बच्चों को परंपरा से जोड़ने का माध्यम है।


✨ निष्कर्ष

“डोहगळ्य को आयो त्योहार – खेला डोडय्यो”
सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि:

  • वर्षा की आशा

  • किसान का भरोसा

  • बच्चों की मासूम खुशी

  • और गाँव की सामूहिक संस्कृति

का सुंदर लोकचित्र है।
यह गीत सुनने-पढ़ने वाले को मिट्टी, पानी और परंपरा से जोड़ देता है।

🎵 Dohaglya Ko Aayo Tyohar – Lyrics

Dohaglya ko aayo tyohar,
Khela Dodayyo।
Naakho dedra pa paani ki dhaar,
Khela Dodayyo॥


(1) Pehla Antara

Dedra ka upar mhari kaakiji,
Jetro na khoj paani।
Khushi hui n ina saal,
Khob barsag Barkha Raani।

Kripa karag, Pratipal bhi barsag,
Barkha ina saal bhi,
Chhaayi gai re khushi ki bahaar।

Khela Dodayyo……


(2) Doosra Antara

Palash ka paanta jungle jaain n,
Baalak mili nan laav।
Sheri gali nam dedra bani n,
Ghar-ghar alakh jagaavan।

Kothi pa haadko n thaaro beto laadko,
Maatha pa dhari n Palash ko jhaadko।

Kara ghar-ghar a aisi pukaar,
Khela Dodayyo……


(3) Teesra Antara

Raaj kai ki sun re chhotiya,
Aaj dodyyo khelaga।
Bhalay naakho koi katro bhi paani,
Aaj va k selanga।

Tolay banay nan chhoti-chhoti,
Khaava mili nan sab baag roti।

Geet Uddhav Pavan ko saar,
Khela Dodayyo……

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