नर्मदा नदी: भारत की पश्चिम दिशा की जीवनदायिनी नदी
Artical by -Gitesh Kumar Bhargava
भारत की नदियाँ न केवल जल-स्रोत हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और जीवनशैली का भी आधार रही हैं। इनमें नर्मदा नदी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह भारत की कुछ ही प्रमुख नदियों में से एक है, जो पूर्व नहीं बल्कि पश्चिम दिशा में बहती है। इसे भारतीय परंपरा में मोक्षदायिनी नदी भी कहा जाता है। नर्मदा नदी का तट सदियों से धार्मिक साधना, सांस्कृतिक गतिविधियों और मानव जीवन का केंद्र रहा है।
नर्मदा नदी का भौगोलिक परिचय

1. उद्गम स्थल (Origin)
नर्मदा नदी का जन्म मध्य प्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र में स्थित मैकाल पर्वतमाला से होता है। यह स्थल समुद्र तल से लगभग 900–1057 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। अमरकंटक न केवल नर्मदा का पवित्र जन्मस्थल है, बल्कि पर्यटक और तीर्थयात्री भी इसे देखने आते हैं।
2. प्रवाह मार्ग (Course)
नर्मदा नदी अमरकंटक से निकलकर पश्चिम की ओर बहती है। इसका मार्ग विंध्य पर्वतमाला (उत्तर) और सतपुड़ा पर्वतमाला (दक्षिण) के बीच स्थित प्राकृतिक दरार घाटी (Rift Valley) में गुजरता है। नदी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर बहती हुई खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में मिलती है।
3. लंबाई और बेसिन (Length & Basin)
कुल लंबाई: लगभग 1312 किलोमीटर (815 मील)
नदी बेसिन: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में फैला हुआ
नर्मदा की प्रमुख भू-आकृतिक विशेषताएँ
1. विंध्य–सतपुड़ा रिफ्ट वैली

नर्मदा नदी की सबसे खास भू-आकृतिक विशेषता यह है कि यह भारत की एकमात्र प्रमुख नदी है, जो स्पष्ट रूप से रिफ्ट वैली में बहती है। इसका मार्ग सीधा और स्थिर होने के कारण पर्यावरणीय और भूगर्भीय अध्ययन में यह महत्वपूर्ण है।
2. संगमरमर की चट्टानें और धुआंधार जलप्रपात

जबलपुर के पास नर्मदा नदी संगमरमर की विशाल चट्टानों (Marble Rocks) के बीच से बहती है। यहाँ का धुआंधार जलप्रपात इतना तीव्र है कि गिरते पानी से धुएँ जैसी जलवाष्प उठती दिखाई देती है।
3. सहस्त्रधारा जलप्रपात

महेश्वर के समीप नर्मदा कई छोटी-छोटी धाराओं में विभाजित होकर सहस्त्रधारा जलप्रपात बनाती है। यह प्राकृतिक दृश्य और पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यंत आकर्षक है।
4. खंभात की खाड़ी

समुद्र में मिलने से पहले नर्मदा लगभग 21 किलोमीटर चौड़ी खाड़ी बनाती है, जिसमें कई छोटे-छोटे द्वीप हैं। इनमें सबसे बड़ा द्वीप अलियाबेट है।
नर्मदा नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ (Tributaries)
नर्मदा नदी को कई छोटी और बड़ी नदियाँ जल प्रदान करती हैं, जो नर्मदा बेसिन और कृषि जीवन को समृद्ध बनाती हैं। प्रमुख सहायक नदियाँ हैं:
बुरहनेर
हालोन
हेरन
बंजर
दूधी (सतपुड़ा से निकलती)
तवा
बरना
कोलार
गंजाल
बेदा
गोई
ओरसांग
ये सहायक नदियाँ न केवल नदी प्रवाह को स्थिर बनाती हैं, बल्कि क्षेत्र की सिंचाई और जल आपूर्ति में भी योगदान देती हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
नर्मदा नदी को उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सीमा के रूप में देखा जाता है।
हिंदू धर्म में नर्मदा परिक्रमा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
नदी के तट पर पवित्र और ऐतिहासिक नगर बसे हैं:
अमरकंटक
जबलपुर
होशंगाबाद (नर्मदापुरम)
ओंकारेश्वर
महेश्वर
भरूच
नर्मदा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसे अन्य नदियों से अलग करता है और इसे मोक्षदायिनी नदी का दर्जा प्राप्त है।
आर्थिक और विकासात्मक महत्व
नर्मदा नदी पर कई बड़े बाँध और जल परियोजनाएँ बन चुकी हैं, जो सिंचाई, विद्युत उत्पादन और जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:
सरदार सरोवर बाँध (गुजरात)
इंदिरा सागर बाँध (मध्य प्रदेश)
ओंकारेश्वर बाँध
इन परियोजनाओं से मध्य और पश्चिम भारत के लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं।
नर्मदा और पर्यावरण
नर्मदा नदी केवल मानव जीवन का आधार नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता और पारिस्थितिकी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके तट और जलाशयों में अनेक प्रजातियों के पक्षी, मछली और वन्य जीव पाए जाते हैं। नदी के संरक्षण से न केवल मानव जीवन, बल्कि सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है।
निष्कर्ष
नर्मदा नदी सिर्फ जलधारा नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, प्राकृतिक धरोहर और जीवन प्रणाली का प्रतीक है। यह नदी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि कृषि, ऊर्जा और मानव जीवन को निरंतर संबल प्रदान करती है।
नर्मदा — आस्था, प्रकृति और जीवन का अद्भुत संगम।



