वेदा नदी: नर्मदा घाटी की जीवनरेखा और निमाड़ क्षेत्र की कृषि का आधार
प्रस्तावना
मध्य प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित खरगोन जिला, नर्मदा घाटी की समृद्ध भौगोलिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी घाटी में बहने वाली वेदा नदी न केवल जिले की प्रमुख नदियों में गिनी जाती है, बल्कि यह निमाड़ क्षेत्र की कृषि, सिंचाई, जल प्रबंधन और स्थानीय जीवनशैली की आधारशिला भी है। वेदा नदी, अपनी सहायक धाराओं और सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से नर्मदा घाटी के उपजाऊ मैदानों को सींचती है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाती है।
भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक स्वरूप
खरगोन जिले का भौगोलिक परिदृश्य
खरगोन जिला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित है। यही पर्वतीय संरचना जिले की जल निकासी प्रणाली और नदियों के प्रवाह को दिशा देती है।
उत्तर दिशा – विंध्याचल पर्वतमाला
दक्षिण दिशा – सतपुड़ा पर्वतमाला
मध्य भाग – नर्मदा नदी घाटी के उपजाऊ मैदान
इस भौगोलिक संरचना के कारण क्षेत्र में अनेक छोटी-बड़ी नदियाँ और जलधाराएँ विकसित हुई हैं, जिनमें वेदा नदी का विशेष महत्व है।
वेदा नदी का परिचय
वेदा नदी, जिसे कई स्थानों पर अपर वेदा भी कहा जाता है, खरगोन जिले की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नदी मुख्य रूप से कुंदा नदी प्रणाली से जुड़ी हुई है और नर्मदा घाटी की जल व्यवस्था को सशक्त बनाती है।
वेदा नदी की प्रमुख विशेषताएँ
यह नर्मदा घाटी की सहायक नदी प्रणाली का हिस्सा है
कृषि एवं सिंचाई के लिए अत्यंत उपयोगी
वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण में सहायक
स्थानीय ग्रामों और कस्बों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति
नदियों का जाल और जल निकासी प्रणाली

खरगोन जिले में नदियों का एक सघन नेटवर्क विकसित हुआ है—
नर्मदा नदी – जिले में लगभग 50 किलोमीटर तक प्रवाहित
वेदा नदी (अपर वेदा) – आंतरिक सिंचाई की मुख्य धारा
कुंदा नदी – वेदा प्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण नदी
यह नदी तंत्र न केवल वर्षा जल को समेटता है, बल्कि उसे खेतों और गांवों तक पहुँचाकर क्षेत्र को सूखा-मुक्त बनाए रखने में सहायक होता है।
वेदा नदी और सिंचाई परियोजनाएँ
वेदा नदी प्रणाली पर अनेक सिंचाई परियोजनाएँ विकसित की गई हैं, जिन्होंने निमाड़ क्षेत्र की कृषि को नई दिशा दी है।

प्रमुख परियोजनाएँ
अपर वेदा सिंचाई परियोजना
देजला-देवड़ा बांध (कुंदा नदी पर स्थित, परंतु वेदा प्रणाली से संबद्ध)
इन परियोजनाओं के माध्यम से:
हज़ारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव हुई
वर्षा पर निर्भर खेती को स्थायित्व मिला
किसानों की आय में वृद्धि हुई
कृषि और आर्थिक महत्व

वेदा, कुंदा और नर्मदा नदियाँ मिलकर खरगोन जिले को कृषि-प्रधान क्षेत्र बनाती हैं।
कृषि में योगदान
गेहूं, कपास, सोयाबीन जैसी फसलें
खरगोन की प्रसिद्ध लाल मिर्च, जो पूरे प्रदेश में पहचान रखती है
सब्ज़ी और दलहन उत्पादन
इन नदियों के कारण मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है और सिंचाई की निरंतर उपलब्धता से फसल उत्पादन स्थिर रहता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
महेश्वर – नर्मदा तट का गौरव
खरगोन जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित महेश्वर एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है।
यह नगर:
भव्य घाटों
अहिल्याबाई होल्कर की विरासत
के लिए प्रसिद्ध है। नर्मदा के साथ-साथ वेदा जैसी सहायक नदियाँ भी क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत बनाए रखती हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहा जाए तो वेदा नदी, खरगोन जिले के भौगोलिक, कृषि और आर्थिक ढांचे की एक अनिवार्य कड़ी है। यह नदी नर्मदा घाटी के उपजाऊ मैदानों को जीवन प्रदान करती है, सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाती है और निमाड़ क्षेत्र की समृद्ध परंपरा को निरंतर प्रवाहित करती है। वेदा नदी न केवल एक जलधारा है, बल्कि यह निमाड़ की जीवनरेखा है।





