पंखिड़ा प्यारा – निमाड़ी निर्गुणी भजन – उद्धव भाई यादव | Lyrics

“पंखिड़ा प्यारा” एक लोकप्रिय निमाड़ी निर्गुणी भजन है, जिसे प्रसिद्ध लोकगायक उद्धव भाई यादव ने अपनी गहरी, आध्यात्मिक और मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है। यह भजन जीवन की नश्वरता, विनम्रता, त्याग, और आत्मचिंतन का संदेश देता है। गीत के शब्द निमाड़ की लोकभावना और निर्गुण भक्ति परंपरा को खूबसूरती से दर्शाते हैं।
यहाँ आप इस भजन के पूरा lyrics सुंदर और साफ़ रूप में पढ़ सकते हैं।
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📌 Song Details
Song: पंखिड़ा प्यारा
Genre: निमाड़ी निर्गुणी भजन
Singer: GITESH KUMAR BHARGAVA
Language: निमाड़ी
Category: Nimaadi Bhajan / Spiritual Folk
🎵 पंखिड़ा प्यारा Lyrics – Udhav Bhai Yadav
अपणा मुख सी तो राम राम कयणु (×2)
पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ रयणु
(1) पहला अंतरा
तको पराई मत परधन नार पराई (×2)
करो मृत दुनिया म कोई सी बुराई
नही तो पड़ेग नरक तुमक सयणु
पंखिड़ा प्यारा…
(2) दूसरा अंतरा
रयो रे गुमान मतू रयो अभिमान म (×2)
समय तुक जानू शमशान म
सब उतारी ले गा थारो गयनु
पंखिड़ा प्यारा…
(3) तीसरा अंतरा
गयो रे बाळपन, गई रे जवानी (×2)
देख बुढ़ापो आख म पाणी (×2)
गित उधव को मान जरा कयणु
पंखिड़ा प्यारा…
🎵 Pankhida Pyara Lyrics – Udhav Bhai Yadav
Apna mukh si to Ram Ram kayanun (×2)
Pankhida pyara do din ko yahan rayanun
(1) Pehla Antara
Tako paraai mat, pardhan naar paraai (×2)
Karo mrit duniya ma koi si buraai
Nahi to padeg narak tumak sayanun
Pankhida pyara…
(2) Dusra Antara
Rayo re guman, matu rayo abhimaan ma (×2)
Samay tuk jaanu shamshaan ma
Sab utaari le ga tharo gayanun
Pankhida pyara…
(3) Teesra Antara
Gayo re baalpan, gayi re jawaani (×2)
Dekh budhaapo aakh ma paani (×2)
Geet Udhav ko maan zara kayanun
Pankhida pyara…
🎵 पंखिड़ा प्यारा – व्याख्या (Meaning in Hindi)
यह निर्गुणी भजन मनुष्य को उसके असली स्वरूप, जीवन की अस्थिरता और विनम्रता का संदेश देता है।
पूरे भजन में कवि “मनुष्य” को “पंखिड़ा” यानी पंछी के रूपक से समझाता है—
कि जीवन केवल कुछ दिनों का पड़ाव है, इसलिए अहंकार, पाप और बुराइयों से बचो।
✨ मुख्य पंक्ति का अर्थ: “अपणा मुख सी तो राम राम कयणु, पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ रयणु”
कवि कहता है—
अपने मुख से “राम-राम” ज़रूर कहो, क्योंकि
यह संसार अस्थायी है।
हम मनुष्य इस धरती पर बस “दो दिन के मेहमान” हैं।
इसलिए जीवन को पवित्र, शांत और प्रेम से जीना चाहिए।
1️⃣ पहला अंतरा – बुराई, पराई की नज़र, लालच से दूर रहो
तको पराई मत, परधन नार पराई
कवि समझाता है कि—
पराई नारी पर बुरी नज़र मत डालो
किसी का धन हड़पने की इच्छा मत रखो
ये दोनों बुराइयाँ इंसान को सबसे तेजी से अधर्म के रास्ते पर ले जाती हैं।
करो मत दुनिया म कोई सी बुराई
किसी के साथ अन्याय, छल, धोखा, ईर्ष्या—ये सब गलत हैं।
नहीं तो पड़ेग नरक तुमक सयणु
यदि इंसान अपने कर्म न बदले,
तो अंत में उसे कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ेगा।
➡️ संदेश:
सच्चाई, संयम और पवित्रता ही मानव का असली धर्म है।
2️⃣ दूसरा अंतरा – अहंकार छोड़ो, समय सबका घमंड तोड़ देता है
रयो रे गुमान, मतू रयो अभिमान म
कवि चेतावनी देता है—
घमंड और अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
समय तुक जानू श्मशान म
एक दिन समय सबको श्मशान तक पहुँचा देता है।
दुनिया की शान, धन-दौलत, पद—सब यहीं रह जाते हैं।
सब उतारी लेगा थारो गयनु
मृत्यु के बाद सब कुछ उतार लिया जाता है—
शरीर भी छोड़ना पड़ता है।
➡️ संदेश:
जिस चीज़ को हम अपनी समझकर घमंड करते हैं, वह असल में कुछ भी नहीं है।
3️⃣ तीसरा अंतरा – जीवन क्षणभंगुर है, बुढ़ापे से पहले समझ जाओ
गयो रे बाळपन, गई रे जवानी
कवि जीवन की गति बताता है—
बचपन कब चला गया,
युवावस्था कब बीत गई—पता ही नहीं चला।
देख बुढ़ापो, आख म पाणी
जब बुढ़ापा आता है,
तो आँखों में आँसू आ जाते हैं—
क्योंकि तब इंसान समझता है कि
वह जीवन व्यर्थ कर आया है।
गीत उद्धव को मान जरा कयणु
कवि विनती करता है—
मेरी सीख मानो,
अभी भी समय है।
➡️ संदेश:
जीवन का सही उपयोग भक्ति, सेवा, विनम्रता और सद्गुणों में करो।
🌻 संपूर्ण सार (Essence of the Bhajan)
भजन हमें सीख देता है कि—
जीवन बहुत छोटा है
बुराइयों से दूर रहो
पराई धन-नारी से बचो
अहंकार मत करो
समय सबको झुका देता है
बुढ़ापा आने से पहले सुधार कर लो
सच्ची भक्ति कर्म और चरित्र में है
उद्धव भाई यादव का यह गीत मनुष्य को
विनम्रता, सजगता और सच्चे जीवन-पथ की ओर ले जाता है।


