शिव डोला भजन – निमाड़ी शिव डोला गीत | खरगोन | Udhav Bhai Yadav

🎵 Song Introduction (English)
Song Title: Bhadav Mahina Ma Ghar Ganpatiji Laava
Category: Nimadi Folk Devotional Song
Language: Nimadi
Singer: GITESH KUMAR BHARGAVA
Lyricist: Govind Bhai Patidar
Theme: Devotion & Faith
Region: Nimar (Madhya Pradesh, India)
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🌿 शिव डोला – निमाड़ी भजन
भोले बाबा को लग्यो दरबार,
चलो शिव डोला मं आई।
श्रावण की आई रे आई रे फुआर,
चलो शिव डोला मं।
1) कैलाशवासी म्हारो भोले भाले
कैलाशवासी म्हारो भोले भाले,
चमक चमा चम चांद-सा निराले।
माथा पर गंगा, गळा नाग काला,
जे कर पूंजी रह्यो सब संसार पाला,
चलो शिव जेला मं…
2) भक्त रम्या बाबा भक्ति का रंग मं
भक्त रम्या बाबा भक्ति का रंग मं,
कण-कण विराज्या शिव-शक्ति संग मं।
झूम-नाच गावे सब भोला की भंग मं,
निमाड़ खरगोन मं महिमा अपार,
चलो शिव डोला मं…
3) म्हारा शिव-शंभु की महिमा छे बांकी
म्हारा शिव-शंभु की महिमा छे बांकी,
बड़ी ही सुहानी लगे डोला मं झांकी।
गीत, उधव, कलम—मनवार की छाँव,
चलो शिवे डोला मं…
Bhole Baba ko lagyo darbaar,
Chalo Shiv dola ma aai.
Shraavan ki aai re aai re phuaar,
Chalo Shiv dola ma.
1)
Kailashvaasi mhaaro Bhole bhaale,
Chamak chama cham chaand-sa niraale.
Maatha par Ganga, gala naag kaala,
Je kar poonji rahyo sab sansaar paala,
Chalo Shiv jela ma…
2)
Bhakt ramya Baba bhakti ka rang ma,
Kan-kan viraajya Shiv-shakti sang ma.
Jhoom-naach gaave sab Bhola ki bhang ma,
Nimad Khargone ma mahima apaar,
Chalo Shiv dola ma…
3)
Mhaara Shiv-Shambhu ki mahima chhe baanki,
Badi hi suhaani lage dola ma jhaanki.
Geet Udhav, kalam—manvaar ki chhaanv,
Chalo Shive dola ma…
शिव डोला झांकी
श्रावण मास भजन
शिव शंभु निमाड़ी गीत
खरगोन निमाड़ी संस्कृति
निमाड़ी फोक साँग
कैलाशवासी भोलेनाथ गीत
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निमाड़ी भजन खरगोन
Udhav Bhai Yadav bhajan
शिव डोला गीत के बोल
निमाड़ लोकगीत
bhole baba nimadi song
Shiv dola lyrics in Hindi
🌸 भजन का पूर्ण भावार्थ – भोले बाबा को लग्यो दरबार
यह भजन भगवान शिव की महिमा, श्रावण मास की भक्ति, और शिव-डोला (झांकी/यात्रा) की अलौकिक अनुभूति को अत्यंत सरल और लोकभावनाओं से भरपूर शब्दों में प्रस्तुत करता है। यह गीत विशेष रूप से श्रावण मास में गाए जाने वाले शिव-भजनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
🌧️ श्रावण मास और शिव भक्ति
भजन की शुरुआत श्रावण मास की फुहारों से होती है। श्रावण को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। वर्षा की हल्की-हल्की बूँदें वातावरण को पवित्र कर देती हैं और भक्तों के मन में भक्ति का भाव स्वतः जागृत हो जाता है।
“भोले बाबा को लग्यो दरबार” का अर्थ है कि इस पावन समय में भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों के बीच विराजमान हो गए हैं।
🛕 शिव डोला का लोकभाव
“चलो शिव डोला मं” की पुकार भक्तों को एक साथ जोड़ती है। शिव डोला यानी भगवान शिव की सजीव झांकी या शोभायात्रा, जिसमें पूरा गांव या नगर सम्मिलित होकर नाच-गान और भक्ति के साथ शिव की आराधना करता है। यह सामूहिक भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
🌙 कैलाशवासी भोलेनाथ का स्वरूप
पहले अंतरे में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन है:
कैलाशवासी – शिव का दिव्य निवास
चंद्रमा-सा उज्ज्वल मुख – शीतलता और सौम्यता का प्रतीक
मस्तक पर गंगा – जीवनदायिनी शक्ति
गले में नाग – निर्भयता और वैराग्य
यह सब मिलकर शिव को संपूर्ण सृष्टि का पालनकर्ता दर्शाते हैं।
💃 भक्तों की भक्ति में डूबी दुनिया
दूसरे अंतरे में दिखाया गया है कि कैसे भक्त भक्ति के रंग में रमे हुए हैं। कण-कण में शिव-शक्ति का वास दिखाई देता है। नृत्य, संगीत और भांग के माध्यम से भक्त अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं।
निमाड़ और खरगोन क्षेत्र का उल्लेख यह दर्शाता है कि यह भजन स्थानीय संस्कृति और लोकआस्था से गहराई से जुड़ा है।
🎨 शिव डोला की झांकी और लोककला
तीसरे अंतरे में शिव डोला की झांकी को अत्यंत सुहावनी बताया गया है। गीतकार उधव की कलम से निकले शब्द मन को शांति देते हैं और भक्तों को भक्ति की छाया में ले आते हैं। यह अंतरा लोककला, संगीत और भक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
🔔 भजन का आध्यात्मिक संदेश
यह भजन यह संदेश देता है कि:
भगवान शिव सरल, भोले और सहज हैं
सच्ची भक्ति सामूहिक और निष्कपट होती है
प्रकृति, संगीत और भक्ति मिलकर जीवन को पवित्र बनाते हैं
🌼 निष्कर्ष
“भोले बाबा को लग्यो दरबार” केवल एक भजन नहीं, बल्कि श्रावण मास की आध्यात्मिक यात्रा है। यह भक्तों को शिव-डोला के साथ जोड़कर आनंद, श्रद्धा और एकता का अनुभव कराता है। निमाड़ी लोकभाषा में रचा गया यह भजन शिवभक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है।


