श्याम का दीवाना

गीत: श्याम का दीवाना
गीतकार: राजेश रेवलिया
गायक: गितेश कुमार भार्गव
म्यूज़िक प्रोडक्शन: MSG Productions
वीडियो: Kanak Photography
प्रकाशन: निमाड़ी कलाकार (Nimadi Kalakar)
श्याम का दीवाना : भावनाओं से भरा खाटू श्याम भजन लिरिक्स
दीवाना, दिवाना मैं श्याम का दीवाना,
जाऊँ न खाटू को छोड़ के।
ठिकाना, ठिकाना अब यही है ठिकाना,
जाऊँ न खाटू को छोड़ के।
तेरे दर को, तू ही बता, छोड़ूँ कैसे?
लगन लगी है तुझसे, तो तोड़ूँ कैसे?
ये मेरा जीवन तुझको ही अर्पण,
बंधन ये माया के तोड़ के।
दीवाना, दिवाना मैं श्याम का दीवाना,
जाऊँ न खाटू को छोड़ के।
झूठी है ये दुनिया, कोई सच्चा नहीं,
तेरे सिवा लगे कोई अच्छा नहीं।
दर तेरे आऊँ, सर को झुकाऊँ,
जाना न मुख को मोड़ के।
दीवाना, दिवाना मैं श्याम का दीवाना,
जाऊँ न खाटू को छोड़ के।
हारे का सहारा, बाबा तू ही बना,
झोली मेरी भर दे, नहीं करना मना।
जग का सताया, आस ले के आया,
नाता ये तुझसे जोड़ के।
दीवाना, दिवाना मैं श्याम का दीवाना,
जाऊँ न खाटू को छोड़ के।
Shyam Ka Deewana

Deewana, deewana main Shyam ka deewana,
Jaun na Khatu ko chhor ke.
Thikana, thikana ab yahi hai thikana,
Jaun na Khatu ko chhor ke.
Tere dar ko, tu hi bata, chhorun kaise?
Lagan lagi hai tujhse, to todun kaise?
Ye mera jeevan tujhko hi arpan,
Bandhan ye maya ke tod ke.
Deewana, deewana main Shyam ka deewana,
Jaun na Khatu ko chhor ke.
Jhoothi hai ye duniya, koi sachcha nahi,
Tere siwa lage koi achcha nahi.
Dar tere aaun, sar ko jhukaun,
Jaana na mukh ko mod ke.
Deewana, deewana main Shyam ka deewana,
Jaun na Khatu ko chhor ke.
Haare ka sahaara, Baba tu hi bana,
Jholi meri bhar de, nahi karna mana.
Jag ka sataaya, aas le ke aaya,
Naata ye tujhse jod ke.
Deewana, deewana main Shyam ka deewana,
Jaun na Khatu ko chhor ke.
राजेश भाई रेवलिया जी की कलम से –

“दीवाना, दिवाना मैं श्याम का दीवाना” भजन एक ऐसे भक्त की अंतरात्मा की पुकार है, जिसने अपना सर्वस्व खाटू श्याम जी के चरणों में अर्पित कर दिया है। यह भजन केवल शब्दों का संगम नहीं, बल्कि उस प्रेम की अभिव्यक्ति है जिसमें भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी शेष नहीं रहती। भक्त स्वयं को श्याम बाबा का दीवाना कहकर संबोधित करता है, क्योंकि अब उसके लिए संसार की चमक-दमक, सुख-सुविधाएँ और रिश्ते सब गौण हो चुके हैं। खाटू धाम ही उसका ठिकाना बन गया है, जहाँ उसे सुकून, आश्रय और जीवन का सच्चा अर्थ मिलता है।
भजन में भक्त का हृदय प्रश्न करता है—जब प्रभु से लगन लग गई, तो उसे कैसे तोड़ा जाए? यह लगन कोई साधारण भावना नहीं, बल्कि आत्मा से निकला हुआ वह बंधन है, जो माया के सभी जालों को काट देता है। संसार को झूठा बताकर भक्त यह स्वीकार करता है कि सच्चाई केवल श्याम बाबा की शरण में ही है। वह बाबा के दर पर शीश झुकाकर पूर्ण समर्पण भाव से खड़ा है, बिना किसी अपेक्षा के।
अंतिम पंक्तियों में श्याम बाबा को “हारे का सहारा” कहकर पुकारना उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो टूटे हुए मन को भी नई आशा और शक्ति प्रदान करता है। यह भजन हर उस भक्त की भावना को स्वर देता है, जो हारकर भी श्याम बाबा से कभी दूर नहीं जाना चाहता।
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