बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics

भूमिका
“बादलों की चूनर मं बिजली की मगजी” एक अत्यंत प्रतीकात्मक और सौंदर्यपूर्ण परंपरागत निमाड़ी लोकगीत है। इस गीत में प्रकृति, आकाश, देवतत्त्व और श्रृंगार को लोक-कल्पना के माध्यम से जोड़ा गया है। बादलों, बिजली, तारे, चाँद-सूरज और नाग जैसे दिव्य प्रतीकों के सहारे ईश्वर के अलौकिक रूप का श्रृंगार किया गया है।
निमाड़ की लोकपरंपरा में ऐसे गीत केवल मनोरंजन नहीं होते, बल्कि वे आस्था, प्रकृति-पूजन और सांस्कृतिक दर्शन को व्यक्त करते हैं। इस गीत का भावार्थ लोक-संवेदना को आधुनिक शब्दों में समझाने का कार्य गितेश कुमार द्वारा किया गया है, जिससे इसका अर्थ और भाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है।
बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics

शक्र को तारो रे ईश्वर उंगी रह्यो ।
तेकी मख टीकी घड़ाव ॥।
ध्रुव की वादलय रे ईश्वर तुली रही ।
तेकी म ख तहबोल रगाव ॥
सरग की बिजलई रे ईश्वर कड़की रही ।
तेकी मख मगजी लगाव ॥
नव लख तारा रे ईश्वर चमक्रो रह्या ।
तेकी मखड आश आगया सिलाव ॥
चॉद-सूरज रे ईश्वर उगी रहद्या।
तेकी मख टीकी लगाव ॥
वासुकी नाग रे ईश्वर देखई रह्यो।
तेकी मख एणी गुथाव ॥
बड़ों हठ वालई रे, गोर॒ल-गरड़ी ॥।
बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics
बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics

Badlon ki chunar ma bijli ki magji
Shakar ko taro re Ishwar ungi rahyo,
Teki makh tiki ghadav.
Dhruv ki badalya re Ishwar tuli rahi,
Teki makh tahbol ragav.
Sarg ki bijlai re Ishwar kadki rahi,
Teki makh magji lagav.
Nav lakh tara re Ishwar chamkro rahya,
Teki makhad aash aagya silav.
Chand–suraj re Ishwar ugi rahdya,
Teki makh tiki lagav.
Vasuki naag re Ishwar dekhi rahyo,
Teki makh eni guthav.
Badon hath vali re,
Goral–garadi.
गीत की व्याख्या
बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics

1️⃣ बादलों की चूनर और बिजली की मगजी
गीत की पहली पंक्ति में आकाश को एक स्त्री के रूप में कल्पित किया गया है। बादल उसकी चूनर हैं और बिजली उसकी मगजी (किनारी)।
👉 यह प्रतीक दर्शाता है कि प्रकृति स्वयं ईश्वरीय श्रृंगार से सजी हुई है। आकाश का हर रूप ईश्वर की रचना है।
2️⃣ शक्र का तारा और ईश्वर की दृष्टि
शक्र (इंद्र) के तारे का उल्लेख देवताओं की उपस्थिति का संकेत है। ईश्वर उसे निहार रहे हैं और उससे टीका बनवाया जा रहा है।
👉 यहाँ देवत्व, सम्मान और शक्ति का भाव है। टीका लोकसंस्कृति में शुभता और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
3️⃣ ध्रुव तारे की अडिगता
ध्रुव तारा स्थिरता और अटल विश्वास का प्रतीक है। बादलों के बीच उसका तुला रहना यह दर्शाता है कि संसार चाहे कितना भी बदल जाए, धर्म और सत्य स्थिर रहते हैं।
👉 उससे तहबोल (श्रृंगार का एक भाग) रगड़वाना उस स्थिरता को जीवन में धारण करने का संकेत है।
4️⃣ स्वर्गीय बिजली की कड़क
स्वर्ग की बिजली की कड़क ईश्वर की शक्ति और चेतना को दर्शाती है। उससे मगजी लगाने का भाव यह है कि शक्ति भी सौंदर्य का अंग है।
👉 निमाड़ी लोकगीतों में शक्ति और कोमलता दोनों का संतुलन दिखाई देता है।
5️⃣ नव-लख तारों की आभा
नौ लाख तारे ब्रह्मांड की विशालता और अनंतता को दर्शाते हैं। उनकी चमक से मुख पर आशा और उजास सीया जा रहा है।
👉 यह पंक्ति बताती है कि आशा स्वयं ईश्वर का श्रृंगार है।
6️⃣ चाँद-सूरज का उगना
चाँद और सूरज समय, संतुलन और जीवन-चक्र के प्रतीक हैं। उनसे टीका लगाना यह दर्शाता है कि ईश्वर ही समय का नियंता है।
दिन और रात दोनों उसी के श्रृंगार का हिस्सा हैं।
7️⃣ वासुकी नाग का उल्लेख
वासुकी नाग पौराणिक रूप से शक्ति, संरक्षण और कुंडलिनी ऊर्जा का प्रतीक है। उससे एणी (केश-विन्यास) गूंथना बताता है कि भय और शक्ति भी ईश्वरीय सौंदर्य में समाहित हैं।
8️⃣ अंतिम पंक्ति – गोरल-गरड़ी
“बड़ों हठ वालई रे, गोरल-गरड़ी” में ईश्वर को दृढ़, अडिग और शक्तिशाली बताया गया है।
👉 यह संदेश देता है कि ईश्वर का स्वरूप कोमल भी है और कठोर भी, जैसा समय और परिस्थिति की मांग हो।
🔹 सांस्कृतिक महत्व –
बादलों की चूनर म बिजली की मगजी – Gangaur Geet Traditional Lyrics
यह गीत निमाड़ की उस लोकपरंपरा को दर्शाता है जहाँ—
प्रकृति = ईश्वर
श्रृंगार = आस्था
लोककल्पना = दर्शन
ऐसे गीतों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कृति, विश्वास और जीवन-दृष्टि आगे बढ़ती है।



