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लिंबुआ तोड़ी लावजों – Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952

लिंबुआ तोड़ी लावजों – Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952

लिंबुआ तोड़ी लावजों - Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952
लिंबुआ तोड़ी लावजों

तोड़ो तोड़ो रे डेडम डेड ,

लिंबुआ तोड़ी लावजों ।

म्हारा छोटा देवरिया रो बगा ,

लिंबुआ तोड़ी लावजो।

म्हारी रनुवाई नाख अचार ,

लिंबुआ तोड़ी लावजो ।

म्हारा धणियेर चाख अचार ,

लिंबुआ तोड़ी लावजो।


लिंबुआ तोड़ी लावजों – Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952

Limbua Todi Laavjo

Traditional Gangaur Geet (1952)

Todo todo re dedam ded,
Limbua todi laavjo.

Mharo chhoto devariya ro baga,
Limbua todi laavjo.

Mharo runuvai naakh achaar,
Limbua todi laavjo.

Mharo dhaniyer chaakh achaar,
Limbua todi laavjo.


🌼 गीत का नाम

लिंबुआ तोड़ी लावजों – Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952

लिंबुआ तोड़ी लावजों - Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952
लिंबुआ तोड़ी लावजों – Traditional Gangaur Geet Lyrics 1952
🎎 गीत का सांस्कृतिक संदर्भ

यह गीत राजस्थान–मालवा–निमाड़ क्षेत्र में गाया जाने वाला गणगौर पर्व का पारंपरिक लोकगीत है।
गणगौर मुख्यतः सुहाग, विवाह, पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख का पर्व माना जाता है।
इस गीत को प्रायः विवाहित स्त्रियाँ और कुंवारी कन्याएँ मिलकर, खेल–खेल में, हल्के हास्य और स्नेहपूर्ण भाव से गाती हैं।


🎵 गीत की व्याख्या – Gitesh Kumar Bhargava

🔸 1.

“तोड़ो तोड़ो रे डेडम डेड, लिबुआ तोड़ी लावजों”

👉 यहाँ “डेडम” संबोधन है, जो घर के किसी छोटे सदस्य या स्नेहपूर्ण पुकार का प्रतीक है।
“लिंबुआ” (नींबू) मांगना प्रतीकात्मक है — यह ताजगी, शुभता और मंगल कार्य का संकेत है।

🔹 यह पंक्ति स्त्रियों की हँसी–मज़ाक भरी फरमाइश को दर्शाती है, जिसमें वे घर–परिवार के लोगों से स्नेहपूर्वक कुछ मांगती हैं।


🔸 2.

“म्हारा छोटा देवरिया रो बगा, लिबुआ तोड़ी लावजो”

👉 यहाँ छोटे देवर का उल्लेख परिवार के आत्मीय रिश्तों को दर्शाता है।
देवर का बगीचा उस घर की समृद्धि और हरियाली का प्रतीक है।

🔹 स्त्री अपने मायके या ससुराल के छोटे सदस्य से प्रेमपूर्वक नींबू तोड़ लाने को कहती है।


🔸 3.

“म्हारी रनुवाई नाख अचार, लिबुआ तोड़ी लावजो”

👉 “रनुवाई” अर्थात घर की गृहिणी या स्वयं स्त्री।
यहाँ नींबू का अचार घरेलू जीवन, स्त्री की गृहस्थी कुशलता और पारंपरिक खानपान का प्रतीक है।

🔹 यह पंक्ति दर्शाती है कि कैसे त्योहारों में स्त्री का श्रम, स्वाद और प्रेम घर की पहचान बनता है।


🔸 4.

“म्हारा धणियेर चाख अचार, लिबुआ तोड़ी लावजो”

👉 “धणियेर” यानी पति।
पति का अचार चखना दांपत्य प्रेम, अपनापन और घरेलू सुख को दर्शाता है।

🔹 यहाँ गणगौर का मुख्य भाव उभरता है —
पति–पत्नी का स्नेह, सम्मान और मंगल कामना।


🌸 5. गीत का भावार्थ

यह गीत किसी भौतिक वस्तु की मांग नहीं, बल्कि
👉 स्नेह, रिश्तों की मिठास, घरेलू प्रेम और सुहाग की कामना को दर्शाता है।

नींबू और अचार जैसे छोटे–छोटे प्रतीक
➡️ परिवार, स्त्री जीवन, परंपरा और उत्सव की आत्मा को जीवंत कर देते हैं।


🪔 लोकसंस्कृति में महत्व
  • यह गीत स्त्री–केन्द्रित लोक परंपरा को दर्शाता है

  • घरेलू रिश्तों में हास्य, प्रेम और अपनापन झलकता है

  • गणगौर पर्व की जीवंत लोकधारा का सुंदर उदाहरण है

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