निमाड़ी कलाकार

Nimaadi Rakhi Song Veera Mhara – Raksha Bandhan Folk Song

वीरा म्हारा – निमाड़ी इरपोस राखी भजन | Ghisilal Yadav | Lyrics

वीरा म्हारा – निमाड़ी इरपोस राखी भजन | Ghisilal Yadav | Lyrics

 

Nimaadi Rakhi Song Veera Mhara – Raksha Bandhan Folk Song

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Introduction 

 

निमाड़ी लोकभाषा में गाया गया “वीरा म्हारा” राखी भजन बहन के अपने भाई के प्रति प्रेम, इंतज़ार और भावनाओं को बेहद सुंदर तरीके से व्यक्त करता है।
घीसीलाल यादव की मधुर आवाज़ और निमाड़ी संस्कृति के पारंपरिक भाव इस गीत को और भी हृदयस्पर्शी बनाते हैं।

लेखक : श्री घीसीलालजी यादव
गायक : गीतेश कुमार भार्गव


 “वीरा म्हारा” – निमाड़ी इरापोस राखी भजन (मूल गीत)

 

 
वीरा म्हारो मन भरी आयो राह तक बैचेन
सांझ हुई पर तू नी आयो भरी आया म्हारा नैन
 
इरपीस को आज छे त्योहार रे
वीरा म्हारा तू क्यों नी आयो
कय भूली गयो बचपन को प्यार रे
वीरा म्हारा तू क्यों नी आयो
 
अगळ्य पकड़ी न वीरा चलनू सिखाडी
लुला गाड़ी तो बीरा खोब भगाड़ी
झूला झुलय न हुयो बेज़ार रे
वीरा म्हारा तू क्यों नी आयो
 
हव छे गरीब बीरा तु छे धनवान रे
अयजा रे वीरा म्हारों सुनो मकान
पाँच पस गरु को अपणु करार रे
वीरा म्हारा तू क्यों नी आयो
 
पड्टो झड़तो भाई संजा तक आयो
भाई न अपनो वचन निभायो
गीत घीसीलाल गाव बार बार रे
वीरा म्हारा तू क्यों नी आयो
 

 

Irpos ko aaj chhe tyohaar re,
Veera mhara tu kyon ni aayo.
Kay bhooli gayo bachpan ko pyaar re,
Veera mhara tu kyon ni aayo.


Anglay pakdi na veera chalnu sikhaadi,
Loola gaadi to beera khob bhagaadi.
Jhoola jhulay na huyo bezaar re,
Veera mhara tu kyon ni aayo.


Hav chhe gareeb beera, tu chhe dhanvaan re,
Aaja re veera, mharo soono makaan.
Paanch pashu-garu ko apnu karaar re,
Veera mhara tu kyon ni aayo.


Padto jhadto bhai, saanjha tak aayo,
Bhai na apno vachan nibhaayo.
Geet Gheesilaal gaav baar-baar re,
Veera mhara tu kyon ni aayo.


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 गीत का विस्तृत भावार्थ – वीरा म्हारो तू क्यों नी आयो

 

यह गीत भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, विरह, स्मृतियों और टूटती-जुड़ती उम्मीदों का मार्मिक चित्रण है। गीत में बहन अपने भाई की राह देखते-देखते भावुक हो जाती है और उससे प्रश्न करती है कि वह पर्व के दिन भी क्यों नहीं आया।

 विरह और प्रतीक्षा की पीड़ा

गीत की शुरुआत में बहन कहती है कि उसका मन भर आया है और वह दिन-भर रास्ता देखती रही। साँझ हो गई, लेकिन भाई नहीं आया। यह दृश्य उस गहरी पीड़ा को दर्शाता है, जब प्रतीक्षा उम्मीद में बदलती है और अंत में आँसू बन जाती है।

 पर्व का महत्व और टूटती उम्मीद

यह पर्व इरपीस (रक्षाबंधन) का है, जो भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे पावन अवसर पर भाई का न आना बहन को भीतर से तोड़ देता है। वह भाई से पूछती है—क्या वह बचपन का प्यार भूल गया?

 बचपन की स्मृतियाँ

गीत के मध्य भाग में बहन बचपन की यादें साझा करती है—भाई का उँगली पकड़कर चलना सिखाना, खिलौना गाड़ी चलाना और झूले झूलना। ये स्मृतियाँ यह दर्शाती हैं कि रिश्ता कितना गहरा और निश्छल था।

 गरीबी-अमीरी का अंतर

बहन यह स्वीकार करती है कि वह गरीब है और भाई धनवान हो गया है, फिर भी वह भाई को अपने सूने घर आने का आग्रह करती है। यह भाग यह संदेश देता है कि रिश्तों में धन का नहीं, भावनाओं का मूल्य होता है।

 वचन और जिम्मेदारी

गीत के अंत में यह कहा गया है कि भाई ने अपना वचन निभाया। यह संकेत देता है कि चाहे देर से सही, पर रिश्तों की डोर अंततः मजबूत रहती है। गायक घीसीलाल द्वारा बार-बार गीत गाना उस पीड़ा को और गहरा कर देता है।

🎵 सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

यह गीत यह सिखाता है कि:

  • भाई-बहन का रिश्ता जीवनभर साथ देता है

  • पर्व केवल रस्म नहीं, भावनाओं का उत्सव होते हैं

  • व्यस्तता और दूरी रिश्तों से बड़ी नहीं हो सकती


 निष्कर्ष

“वीरा म्हारो तू क्यों नी आयो” एक भावुक निमाड़ी लोकगीत है, जो बहन के मन की पीड़ा, प्रतीक्षा और प्रेम को अत्यंत सरल लेकिन गहरे शब्दों में व्यक्त करता है। यह गीत हर उस व्यक्ति को छूता है जिसने कभी किसी अपने की राह देखी हो।

Meaning & Significance 

इस भजन में एक बहन अपने भाई से कहती है —

  • वह बचपन की यादों में खो जाती है

  • भाई के आने की प्रतीक्षा में उसकी आँखें भर आती हैं

  • राखी का त्यौहार है, पर भाई अभी तक नहीं पहुँचा

  • अंत में भाई अपना वचन निभाते हुए संध्या तक लौट आता है

यह निमाड़ी राखी गीत भाई-बहन के अटूट प्रेम और अपनत्व की विशिष्ट भावना को दर्शाता है।


 

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