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थारो निर्मल निर्मल पानी - Nimadi Narmada bhajan Lyrics

थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics – 1

थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics – 1

“थारो निर्मल निर्मल पानी” माँ नर्मदा की पावन निर्मलता, दिव्यता और करुणा को समर्पित एक भावपूर्ण निमाड़ी भजन है। इस भजन को अपनी मधुर व श्रद्धाभरी आवाज़ में श्री अश्विन यदुवंशी  ने गाया है। यह भजन शुभ वाणी स्टूडियो द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो निमाड़ की लोकसंस्कृति, आस्था और माँ नर्मदा के प्रति अपार श्रद्धा को सजीव रूप में दर्शाता है।

थारो निर्मल निर्मल पानी - Nimadi Narmada bhajan Lyrics
थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics

थारो निर्मल निर्मल पानी

 

थारो निर्मल निर्मल पानी,
नर्मदा महारानी महारानी,
महारानी ने कल्याणी,

माई थारा नीर मां ब्रम्हा जी नहाया,
ब्रम्हा जी नहाया मैया डुबकी लगाया,
थारी पूजा करे हो ब्रम्हाणी,
नर्मदा महारानी महारानी,
थारो निर्मल निर्मल पानी,

माई थारा नीर मां विष्णु जी नहाया,
विष्णु जी नहाया मैया डुबकी लगाया,
थारी सेवा करे हो लक्ष्मी रानी,
माँ नर्मदा निमाड़ी भजन,
नर्मदा महारानी महारानी,
थारो निर्मल निर्मल पानी,

अमरकण्ठ से आई नर्मदा,
घाट न घाट पुजाई नर्मदा,
तू तो सागर जाई न समानी,
नर्मदा महारानी महारानी,
थारो निर्मल निर्मल पानी,

थारो निर्मल निर्मल पानी,
नर्मदा महारानी महारानी,
महारानी ने कल्याणी,


थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics

थारो निर्मल निर्मल पानी - Nimadi Narmada bhajan Lyrics
थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics

Thaaro nirmal nirmal paani

 

Thaaro nirmal nirmal paani,
Narmada Maharani Maharani,
Maharani ne kalyani,

Maai thaara neer maan Brahma ji nahaaya,
Brahma ji nahaaya maiya dubki lagaaya,
Thaari pooja kare ho Brahmani,
Narmada Maharani Maharani,
Thaaro nirmal nirmal paani,

Maai thaara neer maan Vishnu ji nahaaya,
Vishnu ji nahaaya maiya dubki lagaaya,
Thaari seva kare ho Lakshmi Rani,
Maa Narmada Nimadi bhajan,
Narmada Maharani Maharani,
Thaaro nirmal nirmal paani,

Amarkanth se aayi Narmada,
Ghaat na ghaat pujaayi Narmada,
Tu to saagar jaayi na samaani,
Narmada Maharani Maharani,
Thaaro nirmal nirmal paani,

Thaaro nirmal nirmal paani,
Narmada Maharani Maharani,
Maharani ne kalyani.


थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics ( EXPLANATION )

थारो निर्मल निर्मल पानी - Nimadi Narmada bhajan Lyrics
थारो निर्मल निर्मल पानी – Nimadi Narmada bhajan Lyrics

 यह निमाड़ी भजन “थारो निर्मल निर्मल पानी” माँ नर्मदा की पवित्रता, दिव्यता और लोकआस्था को बहुत सरल लेकिन गहरे भावों के साथ व्यक्त करता है।


1. “थारो निर्मल निर्मल पानी”

यह पंक्ति माँ नर्मदा के जल की अद्वितीय पवित्रता को दर्शाती है।
नर्मदा का जल केवल शारीरिक शुद्धि ही नहीं करता, बल्कि मन, आत्मा और संस्कारों को भी निर्मल करता है। लोकमान्यता है कि नर्मदा का जल कभी अशुद्ध नहीं होता, इसलिए इसे “निर्मल-निर्मल” कहा गया है।


2. “नर्मदा महारानी… महारानी ने कल्याणी”

यहाँ माँ नर्मदा को महारानी कहा गया है, यानी वह केवल नदी नहीं बल्कि जीवंत देवी हैं।
“कल्याणी” शब्द यह दर्शाता है कि माँ नर्मदा सभी का कल्याण करने वाली, दुख हरने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली शक्ति हैं।


3. ब्रह्मा जी का स्नान – सृष्टि का शुद्धिकरण
“माई थारा नीर मां ब्रम्हा जी नहाया…”

इस पद में बताया गया है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी स्वयं माँ नर्मदा के जल में स्नान करते हैं।
इसका अर्थ है कि नर्मदा का जल इतना पवित्र है कि देवता भी उससे अपनी दिव्यता को और पुष्ट करते हैं
“ब्रह्माणी पूजा करे” का भाव यह है कि संपूर्ण सृष्टि और देव शक्तियाँ माँ नर्मदा की आराधना करती हैं


4. विष्णु जी का स्नान – पालन और संरक्षण का भाव
“माई थारा नीर मां विष्णु जी नहाया…”

यहाँ भगवान विष्णु, जो पालनकर्ता हैं, माँ नर्मदा के जल में स्नान करते हैं।
इसका भाव यह है कि जीवन का पालन, संतुलन और रक्षा नर्मदा के जल से जुड़ी हुई है
लक्ष्मी रानी द्वारा सेवा करना यह दर्शाता है कि समृद्धि और वैभव भी नर्मदा माता के चरणों में नतमस्तक हैं


5. “माँ नर्मदा निमाड़ी भजन”

यह पंक्ति इस भजन की लोकपरंपरा को दर्शाती है।
यह भजन निमाड़ क्षेत्र की संस्कृति, श्रद्धा और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है।
यह बताता है कि माँ नर्मदा केवल शास्त्रों की देवी नहीं, बल्कि जन-जन की माँ हैं।


6. अमरकंटक से सागर तक – जीवन यात्रा का प्रतीक
“अमरकण्ठ से आई नर्मदा…”

माँ नर्मदा का अमरकंटक से प्रकट होना पवित्र उद्गम का प्रतीक है।
“घाट न घाट पुजाई” का अर्थ है कि हर स्थान, हर तट पर लोग श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं
“सागर जाई न समानी” यह दर्शाता है कि नर्मदा अंतहीन करुणा और ऊर्जा की धारा हैं, जो सागर में मिलकर भी समाप्त नहीं होतीं।


7. समग्र भाव

पूरा भजन माँ नर्मदा को:

  • निर्मलता की देवी

  • जीवनदायिनी शक्ति

  • देवताओं द्वारा पूजित माँ

  • निमाड़ की सांस्कृतिक आत्मा

के रूप में प्रस्तुत करता है।

यह भजन श्रद्धालु के मन में यह भाव जगाता है कि
माँ नर्मदा के स्मरण मात्र से ही जीवन शुद्ध, पवित्र और कल्याणकारी बन जाता है।

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