नर्मदा का जल और इंदौर की आने वाले 50 वर्षों की प्यास की कहानी
नर्मदा जल परियोजना और इंदौर: 400 MLD पानी, अगले 50 सालों की बढ़ती जरूरत

मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी आज इंदौर शहर की प्यास बुझाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही है। वर्तमान में इंदौर नर्मदा से लगभग 400 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) पानी ले रहा है। विशेषज्ञों और योजनाओं के अनुसार, अगले 50 वर्षों में इंदौर को लगभग इतनी ही अतिरिक्त मात्रा की आवश्यकता पड़ेगी।
इंदौर तक नर्मदा जल पहुंचने का सफर

1960 के दशक में जब इंदौर में भीषण सूखा पड़ा, तब शहर के लिए स्थायी जलस्रोत की तलाश शुरू हुई। कई योजनाओं और सर्वे के बाद अंततः 1978 में नर्मदा जल परियोजना के पहले चरण के तहत इंदौर को नर्मदा का पानी मिला।
इसके बाद दूसरे, तीसरे और अब चौथे चरण के माध्यम से शहर की जल आपूर्ति लगातार बढ़ती गई।
आज स्थिति यह है कि:
नर्मदा जल से लगभग 40 लाख की आबादी की प्यास बुझ रही है
प्रतिदिन 430 MLD से अधिक पानी शहर को मिल रहा है
इसका बड़ा हिस्सा पीने के पानी के साथ-साथ उद्योगों और संस्थानों में उपयोग हो रहा है
उद्योगों की बढ़ती मांग

इंदौर अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि औद्योगिक हब बन चुका है।
शहर और उसके आसपास 500 से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों को नर्मदा जल से सप्लाई दी जा रही है।
आईटी पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर — सभी की जल निर्भरता नर्मदा पर बढ़ती जा रही है।
शहरी विस्तार और रियल एस्टेट बूम

नर्मदा जल आने के बाद इंदौर का शहरी विस्तार कई गुना तेज हुआ है।
नई टाउनशिप
मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट
रिंग रोड और सुपर कॉरिडोर
रियल एस्टेट में रिकॉर्ड निवेश
इन सभी विकासों की नींव में नर्मदा का पानी है। जल उपलब्धता ने इंदौर को निवेश और रोजगार का केंद्र बना दिया है।
नर्मदा: सिर्फ नदी नहीं, जीवनदायिनी

नर्मदा नदी की कुल लंबाई 2600 किलोमीटर से अधिक है।
मध्यप्रदेश में: लगभग 1077 किमी
महाराष्ट्र में: 32 किमी
महाराष्ट्र-गुजरात सीमा: 42 किमी
गुजरात में: 161 किमी
यह नदी केवल पानी नहीं देती, बल्कि कृषि, उद्योग, ऊर्जा और शहरों की जीवनरेखा है।
भविष्य की चुनौती
तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण और शहरीकरण के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है:
क्या नर्मदा आने वाले 50 वर्षों तक इसी तरह हमारी जरूरतें पूरी कर पाएगी?
इसीलिए जल संरक्षण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और संतुलित उपयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं।
क्या नर्मदा आने वाले 50 वर्षों तक इंदौर की बढ़ती प्यास बुझा पाएगी?
इसका समाधान है:
जल संरक्षण
वाटर रीसाइक्लिंग
वर्षा जल संचयन
सीमित और समझदारी से उपयोग
नर्मदा जयंती पर संकल्प: जल संरक्षण और नदी स्वच्छता की जिम्मेदारी
आज नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर यह आवश्यक है कि हम केवल पूजा और आरती तक सीमित न रहें, बल्कि नर्मदा और सभी नदियों के संरक्षण का संकल्प भी लें। नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदियाँ तभी भविष्य को बचा पाएंगी, जब समाज उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे।
हमें क्या संकल्प लेना चाहिए?
पानी का संरक्षण करें
आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग न करें। घर, उद्योग और कृषि — हर स्तर पर जल की बचत को आदत बनाएं।पानी का सदुपयोग करें
स्वच्छ पानी का दुरुपयोग रोकें। जहां संभव हो वहां रीसायकल पानी और वर्षा जल संचयन को अपनाएं।नदियों को प्रदूषित न करें
नदियों में गंदा पानी, केमिकल, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट डालना बंद करें। स्वच्छ नदी ही सुरक्षित भविष्य है।नदियों में कचरा न डालें
पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कपड़े या अन्य कचरा नदी में प्रवाहित न करें। आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।आने वाली पीढ़ी के लिए जल बचाएं
आज बचाया गया हर एक बूंद पानी, कल की पीढ़ी का जीवन सुरक्षित करता है।सामाजिक जागरूकता फैलाएं
परिवार, मोहल्ले, स्कूल और समाज में लोगों को जल संरक्षण और नदी स्वच्छता के प्रति जागरूक करें।
नर्मदा का सम्मान, भविष्य की सुरक्षा
नर्मदा नदी केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था और जीवन का प्रतीक है।
नर्मदा जयंती हमें यह याद दिलाती है कि:
नदी बचेगी, तभी शहर बचेगा।
पानी बचेगा, तभी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहेगी।
निष्कर्ष – नर्मदा का जल और इंदौर की आने वाले 50 वर्षों की प्यास की कहानी
इंदौर की आज की चमक और भविष्य की संभावनाएं नर्मदा से गहराई से जुड़ी हैं।
यदि विकास को टिकाऊ बनाना है, तो नर्मदा के जल का सम्मान और संरक्षण ही एकमात्र रास्ता है।



