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इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

इंदिरा सागर बांध परियोजना : भारत की सबसे बड़ी जल भंडारण योजना

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

भूमिका

इंदिरा सागर बांध परियोजना भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। नर्मदा नदी पर निर्मित यह बांध न केवल जल भंडारण की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा बांध है, बल्कि सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और क्षेत्रीय विकास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह परियोजना नर्मदा घाटी विकास योजना की रीढ़ मानी जाती है।


परियोजना का इतिहास

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

इंदिरा सागर परियोजना की आधारशिला 23 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा रखी गई थी। हालांकि वास्तविक निर्माण कार्य कुछ वर्षों बाद, वर्ष 1992 में प्रारंभ हुआ। लगभग एक दशक से अधिक समय तक चले निर्माण कार्य के बाद मई 2005 में इस परियोजना को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह परियोजना स्वतंत्र भारत की सबसे महत्वाकांक्षी जल संसाधन योजनाओं में शामिल रही है।


भौगोलिक स्थिति

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

इंदिरा सागर बांध मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के पुनासा क्षेत्र में, नर्मदा नगर कस्बे के पास नर्मदा नदी पर स्थित है। इसका जलाशय अत्यंत विशाल है, जिसके कारण इसे आम बोलचाल में “नर्मदा सागर” भी कहा जाता है। यह जलाशय कई जिलों तक फैला हुआ है और आसपास के क्षेत्रों की जलवायु, कृषि तथा जल उपलब्धता पर गहरा प्रभाव डालता है।


बांध की संरचना

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत एक विशाल कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण बांध का निर्माण किया गया है। इस बांध की ऊँचाई लगभग 92 मीटर तथा लंबाई 653 मीटर है। इसकी संरचना को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह भारी जल दबाव को सहन कर सके और दीर्घकाल तक सुरक्षित रूप से कार्य करता रहे। अपनी भव्यता और तकनीकी विशेषताओं के कारण यह बांध इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।


जल भंडारण क्षमता

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

जल भंडारण की दृष्टि से इंदिरा सागर बांध भारत का सबसे बड़ा जलाशय है। इसकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 12.22 बिलियन घन मीटर (12.2 किमी³) है। इस मामले में इसके बाद उत्तर प्रदेश का रिहंद बांध और तेलंगाना–आंध्र प्रदेश सीमा पर स्थित नागार्जुन सागर बांध का स्थान आता है। इतनी विशाल जल क्षमता इसे नर्मदा नदी प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रक बनाती है।


सिंचाई सुविधा

इंदिरा सागर परियोजना मध्य प्रदेश के कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसके माध्यम से खंडवा और खरगोन जिलों की लगभग 1,230 वर्ग किलोमीटर भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होती है। इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। यह परियोजना सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए वरदान सिद्ध हुई है।


विद्युत उत्पादन

इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984
इंदिरा सागर बांध परियोजना -1984

जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी इंदिरा सागर बांध का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना की स्थापित विद्युत क्षमता 1,000 मेगावाट (8 × 125 मेगावाट) है। इसकी वार्षिक विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 2.7 बिलियन यूनिट है, जो मध्य प्रदेश सहित आसपास के राज्यों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है। यह स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।


अनुप्रवाह परियोजनाएँ

इंदिरा सागर परियोजना नर्मदा नदी पर स्थित अन्य प्रमुख परियोजनाओं के साथ समन्वय में कार्य करती है। इसकी प्रमुख अनुप्रवाह परियोजनाओं में ओंकारेश्वर, महेश्वर और सरदार सरोवर शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएँ मिलकर नर्मदा नदी के जल का समग्र और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करती हैं।


सामाजिक प्रभाव और पुनर्वास

इस विशाल परियोजना के निर्माण का सामाजिक प्रभाव भी व्यापक रहा है। इसके लिए लगभग 22,000 लोगों के एक कस्बे तथा 100 से अधिक गाँवों का विस्थापन किया गया। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया इस परियोजना का एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण पक्ष रही है। यद्यपि इससे विकास को गति मिली, लेकिन सामाजिक चुनौतियाँ भी सामने आईं।


प्रबंधन एवं क्रियान्वयन

इंदिरा सागर बांध का निर्माण मध्य प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया। परियोजना के संचालन और रखरखाव में आधुनिक तकनीकों और प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, ताकि इसकी दीर्घकालिक उपयोगिता बनी रहे।


निष्कर्ष 

इंदिरा सागर बांध परियोजना भारत की सबसे बड़ी जल भंडारण परियोजना होने के साथ-साथ एक बहुउद्देशीय विकास योजना है। यह सिंचाई, विद्युत उत्पादन, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नर्मदा घाटी विकास योजना के अंतर्गत यह परियोजना आधुनिक भारत की जल संसाधन नीति का एक सशक्त प्रतीक मानी जाती है।

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