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हुया ब्रहमलिन शिरोमणी – निमाड़ी लोकगीत

हुया ब्रहमलिन शिरोमणी – निमाड़ी लोकगीत | Udhav Bhai Yadav • Rajesh Bhai Revaliya | Nimaadi Lokgeet Lyrics

 

🎵 हुया ब्रहमलिन शिरोमणी – निमाड़ी लोकगीत Lyrics

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हुया ब्रहमलिन शिरोमणी – निमाड़ी लोकगीत
Huya Brahmalin Shiromani

(हुया ब्रहमलिन शिरोमणी )

🎶 हुया ब्रहमलिन शिरोमणी – उद्धव भाई यादव, राजेश भाई रेवलिया

 

Song Title: हुया ब्रहमलिन शिरोमणी
Category: Nimadi Folk Devotional Song
Language: Nimadi
Singer: GITESH KUMAR BHARGAVA – गीतेश कुमार भार्गव
Lyricist: UDHAV YADAV ,RAJESH REVALIYA
Theme: Nimadi mrityu geet Lavni
Region: Nimar (Madhya Pradesh, India)

 

 

हुया ब्रहमलिन शिरोमणी,
संत सियाराम – संत सियाराम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम…


1)मोक्षदा एकादशी की तिथि, मांगसिर मास

तन पिजरा सी पंछी उड्या, चल्या रे आकाश
अंतिम दर्शन क लगी, भक्त न की लाम – लाम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम


2) आँख सी भक्तन की असी बही, आसू न की धारा

तुम निमाड़ का जाजल्यवान रे सितारा – सितारा
गमगीन हुयगयो निमाड़, न लोग तमाम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम


3) असा था रे सत सीयाराम, मन का निरमोळा

संसार त्याग कर चलीगा, भोळा भाळा
माँ रेखा भी देख रस्तो, सुबह सी शाम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम


4) अब बची गया रे निसाण – रेवा साहिल म

असी भक्ति की ज्योत लगयगा, भक्त न का दिल म
गील उधव बणायो हार, भजी न थारो नाम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम


5) पाँच तत्व म विलिन हुया रे, दिन बुधवार

अग्नि की गोद म सोया, नर्मदा किनार
गीतराज सियाराम बाबा, अमर हुयो नाम
दिन एकादशी क चलिगा बैकुण्ठ धाम

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🎶 Huya Brahmalin Shiromani – Udhav Bhai Yadav, Rajesh Bhai Revaliya

(English / Roman Typing)

Huya Brahmalin shiromani,
Sant Siyaram – Sant Siyaram
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam…


🎵 Antara 1

Mokshada Ekadashi ki tithi, Maargsir maas,
Tan pinjra si panchhi udya, chalya re aakaash.
Antim darshan ka laagi, bhaktan ki laam-laam,
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam…


🎵 Antara 2

Aankh si bhaktan ki asi bahi, aansu na ki dhaara,
Tum Nimaad ka jajalyavaan re sitaara–sitaara.
Gamgeen huya gayo Nimaad, na log tamaam,
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam…


🎵 Antara 3

Asa tha re Sat Siyaram, man ka nirmola,
Sansaar tyaag kar chaliga, bhola-bhaala.
Maa Rekha bhi dekhe rasto, subah si shaam,
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam…


🎵 Antara 4

Ab bachi gayo re nishaan, Reva saahil ma,
Asi bhakti ki jyot lagya ga, bhaktan ka dil ma.
Geel Udhav banaayo haar, bhaji ne thaaro naam,
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam


🎵 Antara 5

Paanch tattva ma vilin huya re, din Budhwaar,
Agni ki god ma soya, Narmada kinaar.
Geet-raj Siyaram Baba, amar huyo naam,
Din Ekadashi k chaliga Baikunth dhaam…

🌺 भजन का विस्तृत भावार्थ (हिन्दी व्याख्या)

 

यह भजन निमाड़ क्षेत्र के महान संत सियाराम बाबा के ब्रह्मलीन होने (देह त्यागकर परमधाम गमन) की करुण, श्रद्धामय और आध्यात्मिक गाथा प्रस्तुत करता है। गीत में संत के जीवन, उनके तप, त्याग, भक्ति और समाज पर पड़े प्रभाव को अत्यंत भावुक शब्दों में वर्णित किया गया है।


🔹 मुखड़ा का भाव

“हुया ब्रहमलिन शिरोमणी, संत सियाराम…
दिन एकादशी के चलिगा बैकुण्ठ धाम”

यह पंक्तियाँ बताती हैं कि संत सियाराम बाबा एकादशी जैसे पवित्र दिन देह त्यागकर बैकुण्ठ धाम को प्रस्थान कर गए।
यह संकेत करता है कि उनका जीवन और मृत्यु दोनों ही धर्म, भक्ति और वैराग्य से परिपूर्ण थे। ‘शिरोमणी’ शब्द उन्हें संत परंपरा का श्रेष्ठ रत्न सिद्ध करता है।


🔹 अंतरा 1 : मोक्षदा एकादशी और देह त्याग

इस अंतरे में कहा गया है कि—

  • मोक्षदा एकादशी, जो स्वयं मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है, उसी दिन बाबा ने शरीर छोड़ा।

  • शरीर को पिंजरे और आत्मा को पक्षी के रूप में दर्शाया गया है, जो उड़कर आकाश में विलीन हो गया।

यह उपमा बताती है कि आत्मा शाश्वत है, शरीर नश्वर।


🔹 अंतरा 2 : भक्तों का दुःख और निमाड़ का शोक

यहाँ भक्तों के आँसुओं और पूरे निमाड़ क्षेत्र के शोक का वर्णन है।

  • संत सियाराम को निमाड़ का उज्ज्वल सितारा कहा गया है।

  • उनके ब्रह्मलीन होने से संपूर्ण क्षेत्र शोकाकुल हो गया।

यह दर्शाता है कि संत केवल साधु नहीं थे, बल्कि जन-जन के हृदय में बसे मार्गदर्शक थे।


🔹 अंतरा 3 : संत का स्वभाव और त्याग

इस अंतरे में संत के व्यक्तित्व को उजागर किया गया है—

  • वे सत्य, सरलता और निर्मल मन के प्रतीक थे।

  • उन्होंने संसार का मोह त्यागकर पूर्ण वैराग्य अपनाया।

  • माँ नर्मदा (रेवा) को साक्षी मानकर उनका जीवन आध्यात्मिक मार्ग पर बीता।

यह अंतरा संत के आदर्श जीवन को दर्शाता है।


🔹 अंतरा 4 : स्मृति और भक्ति की ज्योति

यहाँ कहा गया है कि—

  • भले ही संत शरीर रूप में न हों, लेकिन उनकी भक्ति की ज्योति आज भी भक्तों के हृदय में जल रही है।

  • नर्मदा तट पर उनके स्मृति-चिह्न आज भी उनकी उपस्थिति का आभास कराते हैं।

यह दर्शाता है कि सच्चे संत कभी मरते नहीं, वे स्मृतियों और संस्कारों में जीवित रहते हैं।


🔹 अंतरा 5 : पंचतत्व में विलय और अमर नाम

अंतिम अंतरे में—

  • देह का पंचतत्वों में विलय होना बताया गया है।

  • नर्मदा तट पर अग्नि संस्कार का उल्लेख है।

  • कहा गया है कि संत सियाराम बाबा का नाम अमर हो गया है।

यह अंतरा आत्मा की अमरता और संत की अविनाशी कीर्ति को दर्शाता है।


🌼 समग्र संदेश

यह भजन हमें सिखाता है कि—

  • सच्चा संत जीवनभर त्याग, सेवा और भक्ति का मार्ग दिखाता है।

  • शरीर नश्वर है, पर सत्कर्म और नाम अमर रहते हैं।

  • एक सच्चे गुरु का जाना शारीरिक अंत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विरासत की शुरुआत होता है।

📌 About the Song (SEO Section)

यह निमाड़ी भजन संत सियाराम बाबा की ब्रह्मलीन होने की कथा का भावपूर्ण वर्णन है।
गीत में—

  • एकादशी तिथि

  • अंतिम दर्शन

  • भक्तों का आंसुओं से भरा माहौल

  • नर्मदा किनारा

  • निमाड़ की आस्था

सबका बेहद मार्मिक चित्रण है।

इस भजन को उद्धव भाई यादव एवं राजेश भाई रेवलिया ने अपनी लोक-धुनों के साथ जीवंत बनाया है।

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