कुवां पाणी कसी जाऊ रे, नजर लग जाये। नजर लगी जाय, हवा लगी जाय ॥| म्हारा साहेबजी का बाग घणा छें, फूलड़ा तोड़ण कसी जाऊ रे, नजर लगी जाये। म्हारा साहेबजी का कुवां घणा छें, पाणी भरणा कसी जाऊं रे, नजर लगी जाय । नजर लगी जाय, हवा लगी जाय ॥
Najar Lag Jaye – Nimadi Shrangar Geet (1952)
Kuwan paani kasi jaau re, najar lag jaye Najar lagi jay, hawa lagi jay
Mhara sahebji ka baag ghana chhe Phoolda todan kasi jaau re, najar lagi jaye
Mhara sahebji ka kuwa ghana chhe Paani bharna kasi jaau re, najar lagi jay
Najar lagi jay Hawa lagi jay
यह प्रसिद्ध निमाड़ी लोकगीत “नजर लग जाये” (1952) ग्रामीण जीवन की सादगी, सौंदर्य और भावनाओं को बहुत सुंदर तरीके से व्यक्त करता है। इस गीत में एक युवती अपने रूप और सौंदर्य को लेकर संकोच व्यक्त करती है और कहती है कि कहीं उसे किसी की नज़र न लग जाए। नीचे गीत का सरल हिंदी में भावार्थ / explanation दिया गया है।
नजर लग जाये – Nimadi shrangar geet Lyrics 1952
1. कुवां पाणी कसी जाऊ रे, नजर लग जाये
नजर लगी जाय, हवा लगी जाय
भावार्थ : इस पंक्ति में युवती कहती है कि वह कुएँ पर पानी भरने कैसे जाए, क्योंकि उसे डर है कि कहीं उसे किसी की नज़र न लग जाए। यहाँ “नज़र लगना” का मतलब है कि किसी की बुरी नज़र उसके सौंदर्य या खुशियों को प्रभावित न कर दे। “हवा लगना” भी इसी भाव को दर्शाता है कि कोई अनचाही नज़र या असर न पड़ जाए।
2. म्हारा साहेबजी का बाग घणा छें,
फूलड़ा तोड़ण कसी जाऊ रे, नजर लगी जाये
भावार्थ : युवती कहती है कि उसके साहेबजी (प्रिय / पति या मालिक) का बड़ा सुंदर बगीचा है, जिसमें बहुत सारे फूल खिले हुए हैं। लेकिन वह सोचती है कि वह वहाँ फूल तोड़ने कैसे जाए, क्योंकि उसे डर है कि कहीं उसके रूप को देखकर लोगों की नज़र न लग जाए।
3. म्हारा साहेबजी का कुवां घणा छें,
पाणी भरणा कसी जाऊं रे, नजर लगी जाय
भावार्थ : यहाँ युवती फिर से वही चिंता व्यक्त करती है कि उसके साहेबजी का कुआँ भी बहुत बड़ा और प्रसिद्ध है, जहाँ लोग आते-जाते रहते हैं। इसलिए वह कहती है कि वह वहाँ पानी भरने कैसे जाए, क्योंकि उसे डर है कि कहीं उसे किसी की बुरी नज़र न लग जाए।
✅ समग्र भावार्थ : यह गीत निमाड़ क्षेत्र की लोकसंस्कृति और भावनाओं को दर्शाता है। इसमें एक सुंदर युवती का संकोच, उसकी लज्जा और ग्रामीण जीवन की सरलता दिखाई देती है। “नज़र लगना” का भाव यहाँ सौंदर्य और खुशियों की रक्षा की भावना को दर्शाता है। इस प्रकार यह गीत निमाड़ी लोकजीवन की भावनाओं, संस्कृति और परंपराओं का सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। 🎵