हरदीप सिंह पुरी — जीवनी 2026

प्रस्तावना
भारत की समकालीन राजनीति में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने प्रशासन, कूटनीति और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभाव छोड़ा है। हरदीप सिंह पुरी उन्हीं चुनिंदा नेताओं में से एक हैं। एक करियर राजनयिक से लेकर भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री तक की उनकी यात्रा अनुशासन, अनुभव और वैश्विक दृष्टि का अनूठा उदाहरण है।
जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
हरदीप सिंह पुरी का जन्म 15 फ़रवरी 1952 को दिल्ली में हुआ। उनका परिवार शिक्षित और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित था। बचपन से ही उनमें अध्ययन के प्रति रुचि और सार्वजनिक जीवन के प्रति आकर्षण दिखाई देता था।
भारत स्वतंत्रता के बाद निर्माण के दौर से गुजर रहा था, और इसी वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया — अनुशासन, राष्ट्रीयता और वैश्विक समझ का संगम।
शिक्षा — इतिहास से विश्व राजनीति तक

उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहाँ उन्होंने इतिहास विषय में स्नातकोत्तर किया। इतिहास का अध्ययन उनके लिए केवल अकादमिक विषय नहीं था; यह विश्व राजनीति, साम्राज्यवाद, कूटनीति और राष्ट्र निर्माण को समझने का माध्यम बना।
इसी अवधि में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक और विदेश सेवाओं की तैयारी शुरू की।
भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश

1974 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा (IFS) में हुआ — जो भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है।
एक युवा अधिकारी के रूप में उन्हें विभिन्न देशों में तैनाती मिली, जहाँ उन्होंने भारत के हितों का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिलताओं को नज़दीक से समझा।
वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़
पुरी ने कई देशों में महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर कार्य किया, जिनमें शामिल हैं:
ब्राज़ील
यूनाइटेड किंगडम
स्विट्ज़रलैंड
संयुक्त राष्ट्र मिशन
उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही:
🌐 संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि

उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। यह पद भारत की वैश्विक नीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
इस दौरान उन्होंने:
सुरक्षा परिषद में भारत की स्थिति मजबूत की
आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा
बहुपक्षीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभाई
उनका कार्यकाल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के दौर से मेल खाता था।
कूटनीतिक शैली और व्यक्तित्व
हरदीप सिंह पुरी को एक स्पष्टवादी, तथ्य-आधारित और दृढ़ वार्ताकार माना जाता है। वे पश्चिमी देशों और विकासशील देशों दोनों के साथ संवाद बनाने में सक्षम रहे।
उनकी शैली के मुख्य तत्व:
संतुलित कूटनीति
रणनीतिक सोच
संस्थागत प्रक्रिया पर भरोसा
भारत के हितों की दृढ़ रक्षा
सेवानिवृत्ति के बाद नया अध्याय — राजनीति
राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वे नीति, लेखन और सार्वजनिक विमर्श में सक्रिय रहे।
कुछ वर्षों बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ गए।
संसद तक का सफर
2016 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। संसद में उनका अनुभव और अंतरराष्ट्रीय समझ विशेष रूप से उपयोगी साबित हुई।
वे विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और शहरी विकास जैसे विषयों पर प्रभावी वक्ता के रूप में उभरे।
मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्हें केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं।
प्रमुख मंत्रालय

⛽ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मंत्री के रूप में उन्होंने:
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर काम किया
तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई
गैस अवसंरचना का विस्तार किया
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग बढ़ाया
🏙️ शहरी विकास क्षेत्र
उन्होंने स्मार्ट सिटी और शहरी सुधारों से जुड़े कार्यक्रमों में भी भूमिका निभाई।
वैश्विक संकटों के समय नेतृत्व
रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। इस अवधि में भारत ने वैकल्पिक तेल स्रोतों से आयात बढ़ाया — जिसमें मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अध्याय 10: लेखक, विचारक और सार्वजनिक वक्ता
पुरी केवल प्रशासक या राजनेता ही नहीं, बल्कि एक लेखक और विचारक भी हैं। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति, विदेश नीति और शासन पर लेख लिखते रहे हैं।
उनकी सार्वजनिक छवि एक “नीति-विशेषज्ञ राजनेता” की रही है।
निजी जीवन
हरदीप सिंह पुरी का पारिवारिक जीवन अपेक्षाकृत निजी रहा है। वे सादगीपूर्ण जीवन शैली और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं।
उनकी रुचियों में शामिल हैं:
इतिहास
अंतरराष्ट्रीय मामलों का अध्ययन
लेखन
सार्वजनिक चर्चा
व्यक्तित्व और विरासत
हरदीप सिंह पुरी की यात्रा कई मायनों में विशिष्ट है:
👉 एक करियर डिप्लोमैट से शीर्ष राजनेता
👉 प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक नेतृत्व का संयोजन
👉 भारत की वैश्विक भूमिका को समझने वाला दृष्टिकोण
उन्हें उन नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने “नीति” और “राजनीति” के बीच पुल का काम किया।
उपसंहार
हरदीप सिंह पुरी का जीवन आधुनिक भारत की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जिसने स्वतंत्र भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में योगदान दिया। उनका करियर बताता है कि प्रशासनिक दक्षता, बौद्धिक तैयारी और राष्ट्रीय दृष्टि मिलकर किस प्रकार एक व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर का नेता बना सकती है।

