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कृष्ण जन्म के समय झूले में मुस्कुराते बाल कन्हैया का चित्र – भजन कन्हैया झूले में मुस्कुराये

कन्हैया झूले में मुस्कुराये – कृष्ण जन्म भजन | Lyrics by उद्धव भाई | Singer: Gitesh Kumar Bhargava

कन्हैया झूले में मुस्कुराये – कृष्ण जन्म भजन | Lyrics by उद्धव भाई | Singer: Gitesh Kumar Bhargava

कृष्ण जन्म के समय झूले में मुस्कुराते बाल कन्हैया का चित्र – भजन कन्हैया झूले में मुस्कुराये

 

✨ Short Intro Paragraph 

 

यह सुंदर कृष्ण भजन “कन्हैया, झूले में मुस्कुराये” भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनके बाल स्वरूप की मधुर लीला को दर्शाता है।
उद्धव भाई द्वारा लिखित और गीतेश कुमार भार्गव की आवाज़ में गाया गया यह भक्तिगीत भगवान के जन्मोत्सव, जन्माष्टमी और भजन संध्याओं में विशेष रूप से गाया जाता है। नीचे इस भजन की पूरी, सही और साफ-सुथरी lyrics दी जा रही हैं।

🎵 कृष्ण भजन – कन्हैया झूले में मुस्कुराये

 

लेखक: उद्धव भाई
गायक: गीतेश कुमार भार्गव


रात भयन्कर काली देखो, बिजली दीप जलाये

नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये

 

आज जगत की गल्ली-गली में, देखो खुशियाँ छायी
जगतपति धरती पे है जन्मे, शुभ घड़ी यह आई
पाप मिटाने, जग को बचाने नारायण खुद आये
नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये

मात यशोदा का नंदलाला, देखो कितना प्यारा है
माखन-मिश्री खूब बटी है, सबका राज दुलारा है
देख नज़ारा अम्बर ने भी स्वागत फूल बिछाये
नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये

देव-ऋषिगण श्याम तुम्हारे हरष-हरष गुण गाते हैं
दर्शन पाकर कृष्ण कन्हैया, चरणन शीश झुकाते हैं
उद्धव तुम्हारे स्वागत में हम सब ये गीत सुनाये
नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये

English Lyrics

 

Aaj jagat ki galli-galli mein,
Dekho khushiyaan chhaayi
Jagatpati dharti pe hain janme,
Shubh ghadi yeh aayi

Paap mitaane, jag ko bachaane,
Narayan khud aaye
Nand Baba ke ghar mein Kanhaiya,
Jhule mein muskuraaye


Maat Yashoda ka Nandlala,
Dekho kitna pyaara hai
Makhan-mishri khoob bati hai,
Sabka raaj dulaara hai

Dekh nazara ambar ne bhi,
Swagat phool bichhaaye
Nand Baba ke ghar mein Kanhaiya,
Jhule mein muskuraaye


Dev-rishi-gan Shyam tumhaare,
Harsh-harsh gun gaate hain
Darshan paakar Krishna Kanhaiya,
Charanan sheesh jhukaate hain

Uddhav tumhaare swagat mein hum,
Sab yeh geet sunaaye
Nand Baba ke ghar mein Kanhaiya,
Jhule mein muskuraaye

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भूमिका : श्रीकृष्ण जन्म का अलौकिक प्रसंग

यह भजन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन प्रसंग को दर्शाता है। जब धरती पर पाप, अन्याय और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। यह जन्म केवल एक बालक का आगमन नहीं, बल्कि पूरे जगत के लिए आनंद, आशा और उद्धार का संदेश था। गीत में जन्म की वह रात, गोकुल का उल्लास और ब्रह्मांड का स्वागत भावपूर्ण चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।


प्रथम पंक्ति की व्याख्या

“रात भयन्कर काली देखो, बिजली दीप जलाये”

यह पंक्ति उस घोर अंधेरी रात का वर्णन करती है, जब चारों ओर भय और सन्नाटा छाया था।

  • “भयंकर काली रात” संसार में व्याप्त अज्ञान और अधर्म का प्रतीक है।

  • “बिजली दीप जलाये” यह संकेत देता है कि अंधकार के बीच भी दिव्य प्रकाश प्रकट हो रहा है।

यह प्रकाश श्रीकृष्ण के जन्म की आहट है, जो अंधकार को चीरता हुआ संसार में फैलता है।


“नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये”

यह पंक्ति पूरे भजन का केंद्रीय भाव है।

  • नंद बाबा के घर श्रीकृष्ण का जन्म होना यह दर्शाता है कि भगवान साधारण ग्वाल परिवार में अवतरित होकर भी असाधारण हैं

  • झूले में मुस्कुराते कन्हैया बाल लीलाओं और करुणा के प्रतीक हैं।

यह दृश्य भक्त के हृदय में अपार आनंद और वात्सल्य भाव भर देता है।


दूसरा पद (अंतरा) : जगत का उल्लास

“आज जगत की गल्ली-गली में, देखो खुशियाँ छायी”

यह पंक्ति बताती है कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल गोकुल तक सीमित नहीं रहा।

  • पूरी धरती पर, हर गली-मोहल्ले में आनंद फैल गया।

  • यह आनंद सांसारिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रसन्नता है।


“जगतपति धरती पे है जन्मे, शुभ घड़ी यह आई”

यहाँ श्रीकृष्ण को जगतपति कहा गया है।

  • वही ईश्वर, जो सृष्टि का संचालन करते हैं, आज मानव रूप में धरती पर आए हैं।

  • यह क्षण अत्यंत शुभ और पावन है।


“पाप मिटाने, जग को बचाने नारायण खुद आये”

इस पंक्ति में श्रीकृष्ण अवतार का उद्देश्य स्पष्ट होता है।

  • पाप और अधर्म के विनाश के लिए

  • धर्म और सत्य की स्थापना के लिए

यह भजन केवल जन्म की खुशी नहीं, बल्कि ईश्वर की करुणा और दायित्व को भी दर्शाता है।


तीसरा पद : गोकुल का वात्सल्य

“मात यशोदा का नंदलाला, देखो कितना प्यारा है”

यह पंक्ति मां यशोदा के वात्सल्य को दर्शाती है।

  • यशोदा का लाडला केवल एक बालक नहीं, बल्कि ईश्वर हैं।

  • फिर भी वे मां के लिए एक नटखट, प्यारा बालक ही हैं।


“माखन-मिश्री खूब बटी है, सबका राज दुलारा है”

गोकुल में उत्सव का दृश्य दिखाई देता है।

  • माखन और मिश्री बाँटी जा रही है।

  • कन्हैया सबके प्रिय हैं, गोकुल के राजा समान।

यह लोक-जीवन की सरलता और सामूहिक आनंद को दर्शाता है।


“देख नज़ारा अम्बर ने भी स्वागत फूल बिछाये”

यह पंक्ति बताती है कि केवल धरती ही नहीं, बल्कि आकाश और देवता भी आनंदित हैं

  • अम्बर से पुष्प-वर्षा हो रही है।

  • पूरा ब्रह्मांड इस अवतार का स्वागत कर रहा है।


चौथा पद : देवताओं की भक्ति

“देव-ऋषिगण श्याम तुम्हारे हरष-हरष गुण गाते हैं”

यहाँ देवता और ऋषि भी श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान कर रहे हैं।

  • वे आनंद से भरकर प्रभु की स्तुति करते हैं।

  • यह दर्शाता है कि कृष्ण सभी के आराध्य हैं।


“दर्शन पाकर कृष्ण कन्हैया, चरणन शीश झुकाते हैं”

देव-ऋषि प्रभु के चरणों में शीश नवाते हैं।

  • यह भक्ति, विनम्रता और समर्पण का भाव है।

  • बालक रूप में भी कृष्ण पूजनीय हैं।


“उद्धव तुम्हारे स्वागत में हम सब ये गीत सुनाये”

अंतिम पंक्ति में कवि स्वयं को भक्त के रूप में प्रस्तुत करता है।

  • यह गीत प्रभु के स्वागत और प्रेम का प्रतीक है।

  • भक्त अपने शब्दों से प्रभु की आराधना करता है।


निष्कर्ष : भजन का संदेश

यह भजन हमें यह सिखाता है कि—

  • जब अंधकार बढ़ता है, तब ईश्वर प्रकाश बनकर आते हैं।

  • श्रीकृष्ण का जन्म आनंद, प्रेम और धर्म का संदेश है।

  • भक्ति में सरलता, प्रेम और समर्पण ही सबसे बड़ा मार्ग है।

“नंद बाबा के घर में कन्हैया, झूले में मुस्कुराये” भजन न केवल श्रीकृष्ण जन्म की कथा है, बल्कि हर भक्त के हृदय में उमड़ने वाले आनंद और प्रेम की अभिव्यक्ति है।

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