निमाड़ी कलाकार

निमाड़ी लोकगीत हूयगा दारु म दीवाना – शराब के सामाजिक प्रभाव पर आधारित गीत का चित्र

हूयगा दारु म दीवाना – निमाड़ी लोकगीत Lyrics – Mohan Bhai Yadav

निमाड़ी लोकगीत हूयगा दारु म दीवाना – शराब के सामाजिक प्रभाव पर आधारित गीत का चित्र

   हूयगा दारु म दीवाना

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हूयगा दारु म दीवाना – निमाड़ी लोकगीत Lyrics – Mohan Bhai Yadav | Nashe Par Samajik Geet

हूयगा दारु म दीवाना” निमाड़ी समाज में गाया जाने वाला एक लोकप्रिय समाजिक चेतना आधारित लोकगीत है, जिसे मोहन भाई यादव ने अपनी विशेष ग्रामीण शैली में प्रस्तुत किया है।
यह गीत युवाओं में बढ़ती शराबखोरी, परिवारिक टूटन और सामाजिक नुकसान को व्यंग्य और हास्य शैली में दर्शाता है।
इस पेज पर नीचे दिए गए हैं इस गीत की पूरी और साफ-सुथरी निमाड़ी Lyrics, ताकि श्रोता और पाठक दोनों इसे सही रूप में समझ सकें।

हूयगा दारु म दीवाना (Nimadi Lokgeet)

 Singer : Gitesh kumar bhargava  गीतेश कुमार भार्गव                                                                                                                                                                                                                                              Lyrics : Mohan Yadav                                                                                                                                                                                                                                                                                                  Theme : Social Massage to become non alcoholic

“दारु की दीवानगी असी बड़ी रही यार, जाति धरम के भुली गया
सब पी रया भरमार
बिगड़ी गया इनी दारू म
अच्छा अच्छा परिवार
पी पी न मरी गया बड़ा बड़ा कलाकार”

मुखड़ा

हूयगा दारु म दीवाना रे राम, आजकल का छोरा
आजकल का छोरा क्वाटर पे कोरा कोरा
नशा म गाव फिल्मी गाना रे राम,

आज कल का छोरा


1) बाप की मेहनत और बेटे की फिजूलखर्ची

बाप पेट क पाटा बाधिन, पाई पाई बचाव
बेटो तो देखो ओ कमय क खाण, पेण म उठाव
मार बाप के उल्टा पीराणा रे राम,

आज कल का छोरा


2) बड़े-बुजुर्गों का मान भूल जाना

बड़ा बोटा को कायदो भुलीगा, मान जरा न रखता
पी रा घटा घट सुखा क्वाटर, पानी जरा नी नाखता
पेण हुय जाय सुबह सी रावना रे राम,

आज कल का छोरा


3) शादी में शराब का दिखावा

शादि नमण तो पेटी न लाव, पी न खोब चंदरात
दुल्लव कदी नी दारू पेवाड, कोई नी जाय बरात
असा कर ढोंग मनमाना रे राम,

आज कल का छोरा


4) बचपन में नशा करने की समस्या

शादी शुदा की छोड़ो, पी रया पन्द्रह साल का कुवारा
दूध पेण की उमर म कसा, करी रहा रे उतारा
मोहन गाव गीत तराना रे राम,

आज कल का छोरा

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“Daaru ki deewangi asi badi rahi yaar,
Jaati dharam ke bhooli gaya,
Sab pee raya bharmaar.
Bigdi gaya ini daaru ma,
Achha-achha parivaar,
Pee-pee na mari gaya bada-bada kalakaar.”


🎵 Mukhda

Huyga daaru ma deewana re Ram, aajkal ka chhora,
Aajkal ka chhora, quarter pe kora-kora.
Nasha ma gaav filmi gaana re Ram,
Aajkal ka chhora.


🎵

Baap pet ka paata baandhin, pai-pai bachaav,
Beto to dekho vo kamai ka khaan, pen ma uthaav.
Maar baap ke ulta peerana re Ram,
Aajkal ka chhora.


🎵

Bada-bota ko kaaydo bhuliga, maan zara na rakhta,
Pee ra ghata-ghat sukha quarter, paani zara ni naakhta.
Pen huy jaay subah si raavna re Ram,
Aajkal ka chhora.


🎵

Shaadi naman to peti na laav, pee na khoob chandraat,
Dulhav kadi ni daaru pevaad, koi ni jaay baraat.
Asa kar dhong manmaana re Ram,
Aajkal ka chhora.


🎵

Shaadi-shuda ki chhodo, pee raya pandrah saal ka kuwaara,
Doodh pen ki umar ma kasa, kari raha re utaara.
Mohan gaav geet taraana re Ram,
Aajkal ka chhora.

🌿 गीत का विस्तृत भावार्थ एवं सामाजिक संदेश

यह गीत शराब की बढ़ती लत (दारू की दीवानगी) पर करारा प्रहार करता है। गीतकार ने आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर लड़कों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को समाज के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में प्रस्तुत किया है। गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि चेतावनी और सुधार का संदेश है।


🔹 प्रस्तावना (प्रारंभिक पंक्तियाँ)

गीत की शुरुआत में कहा गया है कि—

  • शराब की लत इतनी बढ़ गई है कि लोग जाति, धर्म, मर्यादा और रिश्ते तक भूल गए हैं।

  • अच्छे-अच्छे घर-परिवार और बड़े कलाकार तक शराब के कारण बर्बाद हो गए।

👉 संदेश:
नशा किसी एक वर्ग को नहीं, बल्कि पूरे समाज को अंदर से खोखला कर देता है।


🔹 मुखड़ा का भाव – “आजकल का छोरा”

मुखड़े में आज के युवक को दिखाया गया है—

  • जो शराब में डूबकर फिल्मी गाने गाता,

  • “क्वार्टर” को अपनी शान समझता है,

  • और नशे को आधुनिकता मान बैठा है।

👉 संदेश:
आधुनिकता का अर्थ अनुशासनहीनता या नशा नहीं, बल्कि संयम और जिम्मेदारी है।


🔹 अंतरा 1 – पिता की मेहनत और बेटे की फिजूलखर्ची

यह अंतरा बताता है कि—

  • पिता जीवनभर मेहनत करके पैसा जोड़ता है,

  • जबकि बेटा उसी कमाई को शराब में उड़ा देता है।

  • उल्टा वह अपने पिता का ही अपमान करता है।

👉 संदेश:
नशा केवल शरीर नहीं बिगाड़ता, बल्कि पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते को भी तोड़ देता है।


🔹 अंतरा 2 – बड़े-बुजुर्गों के प्रति अनादर

यहाँ दिखाया गया है कि—

  • नशे में डूबा युवक बड़ों की सीख और संस्कार भूल जाता है।

  • वह सुबह से रात तक शराब पीता रहता है, पानी तक नहीं पीता।

👉 संदेश:
शराब इंसान से संस्कार, संयम और विवेक छीन लेती है।


🔹 अंतरा 3 – शादी में शराब का दिखावा

इस अंतरे में सामाजिक विडंबना दिखाई गई है—

  • शादी जैसे पवित्र अवसर पर भी शराब को शान समझा जाता है।

  • दूल्हा शराब न पिलाए तो बारात में लोग नहीं आते।

👉 संदेश:
यह दिखाता है कि समाज ने दिखावे को परंपरा और नशे को सम्मान बना लिया है, जो अत्यंत चिंताजनक है।


🔹 अंतरा 4 – कम उम्र में नशे की लत

यह सबसे गंभीर अंतरा है—

  • जहाँ बताया गया है कि 15 साल के बच्चे भी शराब पी रहे हैं।

  • दूध पीने की उम्र में शराब पीना समाज के भविष्य के लिए खतरा है।

👉 संदेश:
अगर आज बच्चों को नहीं रोका गया, तो कल समाज को अपराध, बीमारी और विनाश ही मिलेगा।


🌺 समग्र सामाजिक संदेश

यह गीत हमें सिखाता है कि—

  • शराब व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार और समाज को बर्बाद करती है

  • नशा रिश्तों, संस्कारों, सम्मान और भविष्य—सबका दुश्मन है।

  • माता-पिता, समाज और सरकार—तीनों को मिलकर युवाओं को सही दिशा दिखानी होगी।

👉 अंतिम संदेश:
नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो।
आज का छोरा अगर सुधर गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रहेंगी।

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