निमाड़ी कलाकार

गणगौर माता खोल ए किवाड़ी – gangaur lyrics

गणगौर माता खोल ए किवाड़ी – gangaur lyrics

गणगौर माता खोल ए किवाड़ी - gangaur lyrics
गणगौर माता खोल ए किवाड़ी – gangaur lyrics
गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी
बाहर ऊबी थारी पूजण वाली।
पूजो ए पूजो बाईयां , काई काई मांगों
म्हे मांगा अन्न धन , लाछर लक्ष्मी।
जलहर जामी बाबुल मांगा, राता देई मायड़
कान कंवर सो बीरो मांगा , राई सी भौजाई।
ऊँट चढयो बहनोई मांगा , चूंदड़ वाली बहना
पूस उड़ावन फूफो मांगा , चूड़ला वाली भुवा।
काले घोड़े काको मांगा , बिणजारी सी काकी
कजल्यो सो बहनोई मांगा , गौरा बाई बहना।
भल मांगू पीहर सासरो ये भल मांगू सौ परिवार ये
गौर ए गणगौर माता ,,,,,

Gaur e Gangaur mata khol e kiwaadi

गणगौर माता खोल ए किवाड़ी - gangaur lyrics
गणगौर माता खोल ए किवाड़ी – gangaur lyrics

Gaur e Gangaur mata khol e kiwaadi
Bahar uubi thaari poojan wali.

Poojo e poojo baiyaan, kai kai maango
Mhe maanga ann dhan, laachar Lakshmi.

Jalhar jaami babul maanga, raata dei maayad
Kaan kanwar so beero maanga, rai si bhaujai.

Oont chadhyo behnoi maanga, choondad wali behna
Poos udaavan foofo maanga, choodla wali bhuwa.

Kaale ghode kaako maanga, binjaari si kaaki
Kajlyo so behnoi maanga, Gaura bai behna.

Bhal maangu peehar saasro ye
Bhal maangu sau parivaar ye

Gaur e Gangaur mata…


गणगौर लोकगीत: “गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी” 

गणगौर माता खोल ए किवाड़ी - gangaur lyrics
गणगौर माता खोल ए किवाड़ी – gangaur lyrics

यह गणगौर का पारंपरिक लोकगीत है, जिसे महिलाएँ और लड़कियाँ गणगौर पर्व के दौरान माता गौरा (पार्वती) की पूजा करते समय गाती हैं। इस गीत में भक्त माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और रिश्तों की मंगलकामना करती हैं। गीत में पूरे परिवार के लिए आशीर्वाद माँगे जाते हैं, जो भारतीय पारिवारिक संस्कृति और प्रेम को दर्शाता है।


1. गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी, बाहर ऊबी थारी पूजण वाली

इस पंक्ति में भक्त माता गणगौर से प्रार्थना करती है कि हे माता! अपने द्वार खोलो, आपकी पूजा करने वाली भक्त बाहर खड़ी है।
यह माता के प्रति श्रद्धा, विनम्रता और भक्ति का भाव दर्शाता है।


2. पूजो ए पूजो बाईयां, काई काई मांगों

म्हे मांगा अन्न धन, लाछर लक्ष्मी
यहाँ महिलाएँ कहती हैं कि आओ बहनों, माता की पूजा करें और उनसे वरदान माँगें।
वे माता से अन्न, धन और लक्ष्मी की कृपा माँगती हैं ताकि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।


3. जलहर जामी बाबुल मांगा, राता देई मायड़

कान कंवर सो बीरो मांगा, राई सी भौजाई
इस भाग में भक्त अपने मायके के परिवार के लिए आशीर्वाद माँगती है।
वह माता से प्रार्थना करती है कि पिता (बाबुल) सुखी रहें, माता स्नेह देने वाली हों, भाई वीर और योग्य हो तथा भाभी अच्छी और स्नेही हो।


4. ऊँट चढयो बहनोई मांगा, चूंदड़ वाली बहना

पूस उड़ावन फूफो मांगा, चूड़ला वाली भुवा
यहाँ वह अपने अन्य रिश्तों के लिए भी मंगलकामना करती है।
वह चाहती है कि बहनोई सम्मानित हों, बहन सुहागिन और खुशहाल रहे, फूफा और बुआ भी समृद्ध और खुश रहें।


5. काले घोड़े काको मांगा, बिणजारी सी काकी

कजल्यो सो बहनोई मांगा, गौरा बाई बहना
इन पंक्तियों में परिवार के अन्य सदस्यों जैसे काका-काकी और रिश्तेदारों के सुख-समृद्ध जीवन की कामना की गई है।


6. भल मांगू पीहर सासरो ये, भल मांगू सौ परिवार ये

इस अंतिम भाग में गायिका माता से प्रार्थना करती है कि मेरा मायका (पीहर) और ससुराल दोनों सुखी रहें और पूरा परिवार खुशहाल रहे।
यह पंक्ति भारतीय संस्कृति में दोनों घरों के प्रति समान प्रेम और सम्मान को दर्शाती है।


सार:
यह लोकगीत केवल पूजा का गीत नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, रिश्तों, प्रेम और समृद्धि की कामना छिपी हुई है। गणगौर माता को सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली की देवी माना जाता है, इसलिए महिलाएँ इस गीत के माध्यम से अपने पूरे परिवार के लिए आशीर्वाद माँगती हैं।


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