मोबाईल नाम कमयगो – मोहन भाई यादव | निमाड़ी लोकगीत

📱 मोबाईल नाम कमयगो – Nimadi Lokgeet | Mohan Bhai Yadav |Lyrics
मोबाईल नाम कमयगो – मोहन भाई यादव | निमाड़ी लोकगीत | मोबाइल पर व्यंग्य, फायदे–नुकसान
लेखक: मोहन भाई यादव
गायक : गीतेश कुमार भार्गव
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नीचे आपका निमाड़ी व्यंग्य–लोकगीत
“मोबाईल नाम कमयगो – मोहन भाई यादव”
का पूर्ण, गहरा, अर्थपूर्ण और आसान भाषा में Explanation (व्याख्या) दिया जा रहा है।
दुनिया म मोबाईल केत्तरो नाम कमयगो
नाना सा डीब्बा म संसार समयगो
भजन भी आव ऐ म, गाना भी आव
पूरी दुनिया की यो पिक्चर बताव
सबका जीवन म अपनी छाप जमय गो।
काम निपटाव भाई जोभी होय जरूरी,
एकाज म बैंक न एका म तिजोरी।
अपनी ताकत भाई यो तो सबक रमय गो—
नाना सा डीब्बा म संसार समयगो
ऐकाज देवी न ऐकाज म देवता
जेक भी बुलाओ, सब रय आवता-जावता।
अंगळ्य धरत सी दिल्ली-बंबई बतयगो—
नाना सा डीब्बा म संसार समयगो
नाना नाना बालक भी की हुआ एका आदि
एक बिना नहीं बण याव शादि।
मोहन का मोबाइल प गीत सुनायगो—
नाना सा डीब्बा म संसार समयगो
Duniya ma mobile kettaro naam kamaygo,
Naana sa dibba ma sansaar samaygo.
Bhajan bhi aav ai ma, gaana bhi aav,
Poori duniya ki yo picture bataav.
Sabka jeevan ma apni chhaap jamaygo—
Naana sa dibba ma sansaar samaygo.
Kaam niptaav bhai jobhi hoy zaroori,
Ekaaj ma bank na ekaa ma tijori.
Apni taakat bhai yo to sabak ramaygo—
Naana sa dibba ma sansaar samaygo.
Ekaaj devi na ekaaj ma devta,
Jek bhi bulaavo, sab ray aavta-jaavta.
Angli dharat si Dilli–Bombay bataygo—
Naana sa dibba ma sansaar samaygo.
Naana naana baalak bhi ki hua eka aadhi,
Eka bina nahi ban yaav shaadi.
Mohan ka mobile p geet sunaaygo—
Naana sa dibba ma sansaar samaygo.
Mobile Naam Kamaygo Lyrics
Mohan Bhai Yadav Song
Mobile ke nuksan geet
Nimadi vyang geet
Mobile addiction folk song
गीत का अर्थ / सार
यह गीत मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग पर एक व्यंग्यात्मक निमाड़ी लोकगीत है।
मोहिन भाई यादव इस छोटे से “नाना सा डब्बा” के माध्यम से दिखाते हैं कि—
मोबाइल फोन ने पूरे संसार को एक छोटे box में समाहित कर दिया है।
भजन, गाने, पिक्चर, दुनिया की खबर—सब एक ही जगह उपलब्ध हो गया है।
बैंकिंग, तिजोरी, पूजा-पाठ, देवी-देवता—सब मोबाइल में।
छोटी उम्र के बच्चों से लेकर बड़े-बुज़ुर्ग तक सब मोबाइल के आदी हो चुके हैं।
शादी जैसे बड़े काम भी अब मोबाइल के बिना नहीं हो पाते।
गीत यह भी बताता है कि मोबाइल की वजह से
सुविधा तो बढ़ी है लेकिन आदत और निर्भरता भी बढ़ी है।
मोहन भाई यादव का यह निमाड़ी लोकगीत आज की बदलती दुनिया पर एक सटीक और मज़ेदार कटाक्ष है।
गीत दिखाता है कि मोबाइल फोन—एक छोटा सा “नाना सा डब्बा”—कैसे मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
यह गीत मोबाइल के फायदे और नुकसान दोनों को हास्य और व्यंग्य में पिरोकर प्रस्तुत करता है।
मुखड़ा (मुख्य संदेश)
**“दुनिया म मोबाईल केत्तरो नाम कमयगो
नाना सा डीब्बा म संसार समयगो”**
कवि कहता है कि मोबाइल ने इतना नाम कमा लिया है कि
दुनिया का पूरा संसार—
जानकारी, संपर्क, मनोरंजन, बैंक, फोटो, वीडियो—
सबकुछ इस छोटे से डिब्बे में समा गया है।
मोबाइल अब सिर्फ एक उपकरण नहीं रहा,
पूरी दुनिया का दरवाज़ा बन गया है।
व्याख्या भाग-दर-भाग
1️⃣ पहला भाग – मोबाइल की शक्तियाँ
“भजन भी आव ऐ म, गाना भी आव
पूरी दुनिया की यो पिक्चर बताव”**
मोबाइल एक तरह से मनुष्य के मनोरंजन,
सूचना और आध्यात्मिकता का साधन बन चुका है।
भजन, गीत, फिल्में—सब कुछ मोबाइल पर उपलब्ध है।
“सबका जीवन म अपनी छाप जमय गो”
मोबाइल ने हर उम्र, हर वर्ग, हर घर में अपनी जगह बना ली है।
अब यह जीवन का हिस्सा नहीं—जीवन की जरूरत बन चुका है।
**“काम निपटाव भाई जो भी होय जरूरी
एकाज म बैंक न एका म तिजोरी”**
कवि यहाँ मोबाइल की उपयोगिता बताता है—
बैंकिंग
पैसे भेजना
बिल भरना
डिजिटल तिजोरी
सब मोबाइल से संभव है।
मोबाइल अब एक चलता-फिरता बैंक और दफ़्तर बन गया है।
2️⃣ दूसरा भाग – मोबाइल: देवता भी, सेवा भी
**“ऐकाज देवी न ऐकाज म देवता
जेक भी बुलाओ सब रय आवता–जावता”**
मोबाइल पर देवी-देवता के भजन, दर्शन, पूजा—
सब उपलब्ध है।
अब लोग मंदिर से ज़्यादा फोन में ही दर्शन करते हैं।
मोबाइल ने धार्मिक दुनिया को भी अपनी स्क्रीन में कैद कर लिया है।
“अंगळ्य धरत सी दिल्ली-बंबई बतयगो”
थोड़ी सी उंगली चलाओ,
और दिल्ली–मुंबई की खबरें तुरंत मिल जाएँ।
मोबाइल ने दूरी, समय और इंतज़ार का मतलब बदल दिया है।
➡️ मतलब:
मोबाइल ने दुनिया को बस “एक टच” पर ला दिया है।
3️⃣ तीसरा भाग – मोबाइल की लत और समस्या
**“नाना नाना बालक भी की हुआ एका आदि
एक बिना नहीं बण याव शादि”**
आज छोटे-छोटे बच्चे तक मोबाइल के आदी हो गए हैं।
खाना खिलाना हो या रोना सुलाना—मोबाइल का सहारा लिया जाता है।
यहाँ कवि कटाक्ष करता है कि—
अब तो शादी जैसे बड़े काम भी मोबाइल के बिना नहीं हो पाते—
वीडियो कॉल, फोटो, मैसेज, लोकेशन—सब मोबाइल पर निर्भर है।
➡️ यह भाग मोबाइल की लत और अत्यधिक निर्भरता की ओर संकेत करता है।
4️⃣ मोहन भाई का व्यंग्य – गीत सुनाने वाला भी मोबाइल हुआ
“मोहन का मोबाइल प गीत सुनायगो”
यह पंक्ति सबसे मजेदार है।
कवि बताता है कि आजकल गीत भी मोबाइल में हैं—
यानी
लोकगीत, संस्कृति, परंपरा तक मोबाइल में कैद हो गई है।
मोबाइल के बिना इंसान न मन बहला पा रहा,
न काम कर पा रहा,
न समाज चला पा रहा।
🌻 पूरे गीत का सार
मोहन भाई यादव इस गीत के माध्यम से यह कहना चाहते हैं:
✔ मोबाइल ने जीवन आसान बनाया है
शिक्षा
बैंकिंग
जानकारी
पूजा
मनोरंजन
सब एक ही छोटे से डब्बे में।
✔ लेकिन इसके नुकसान भी गहरे हैं
बच्चों की लत
परिवार में दूरी
समय की बर्बादी
वास्तविक जीवन से कटाव
शादियों, त्योहारों, समारोहों की परंपरा बदल जाना
✔ मोबाइल अब “सहायक” से बढ़कर “स्वामी” बन चुका है।
कवि इस बदलाव पर व्यंग्य करते हुए बताता है—
कि यह “नाना सा डब्बा” आज पूरे संसार को अपने अंदर चला रहा है।


