कसो रुप बड़ायो रे नरसींग – Nimadi bhajan lyrics

कसो रुप बड़ायो रे नरसींग
ना कोई तुमरा पिता कहावे,
ना कोई जननी माता
खंब फोड़ प्रगट भये हारी
अजरज तेरी माया…
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग…
आधा रुप धरे प्रभू नर का,
आधा रे सिंह सुहाये
हिरणाकुष का शिश पकड़ के
नख से फाड़ गीरायो…
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग…
गर्जना सुन के देव लोग से,
बृम्हा दिख सब आये
हाथ जोड़ कर बिनती की नी
शान्त रुप करायो…
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग…
अन्तर्यामी की महीमा ना जाणे,
वेद सभी बतलाये
हरी नाम को सत्य समझलो
यह परमाण दिखायो…
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग…….
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग – Nimadi bhajan lyrics
Kaso roop badayo re Narsingh – Nimadi bhajan lyrics

Kaso roop badayo re Narsingh
Na koi tumra pita kahave,
Na koi janani mata
Khamb phod pragat bhaye Hari,
Ajaraj teri maya…
Kaso roop badayo re Narsingh…
Aadha roop dhare Prabhu nar ka,
Aadha re singh suhaaye
Hiranyakush ka shish pakad ke,
Nakh se phaad girayo…
Kaso roop badayo re Narsingh…
Garjana sun ke dev log se,
Brahma dikh sab aaye
Haath jod kar binti ki ni,
Shaant roop karayo…
Kaso roop badayo re Narsingh…
Antaryami ki mahima na jaane,
Ved sabhi batlaye
Hari naam ko satya samajh lo,
Yah pramaan dikhayo…
Kaso roop badayo re Narsingh…
कसो रुप बड़ायो रे नरसींग – Nimadi bhajan lyrics

यह भजन भगवान नरसिंह भगवान के अद्भुत और दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। नीचे इसका आसान और भावपूर्ण हिंदी में अर्थ दिया गया है:
मुखड़ा:
“कसो रूप बड़ायो रे नरसींग”
👉 हे नरसिंह भगवान! आपका रूप कितना अद्भुत, अनोखा और आश्चर्यजनक है।
पहला अंतरा:
“ना कोई तुमरा पिता कहावे…”
👉 भगवान नरसिंह का जन्म सामान्य मनुष्य की तरह नहीं हुआ।
ना उनका कोई पिता था, ना माता।
वे एक खंभे (स्तंभ) को फाड़कर प्रकट हुए – यह उनकी दिव्य माया और शक्ति को दर्शाता है।
➡️ मतलब: भगवान किसी नियम या बंधन में नहीं बंधे हैं, वे सर्वशक्तिमान हैं।
दूसरा अंतरा:
“आधा रूप धरे प्रभु नर का…”
👉 भगवान ने आधा मनुष्य और आधा सिंह का रूप धारण किया।
उन्होंने दुष्ट राक्षस हिरण्यकशिपु को पकड़कर अपने नाखूनों से उसका वध किया।
➡️ मतलब: भगवान धर्म की रक्षा के लिए किसी भी रूप में आ सकते हैं और अधर्म का नाश करते हैं।
तीसरा अंतरा:
“गर्जना सुन के देव लोग से…”
👉 जब भगवान नरसिंह ने भयंकर गर्जना की, तो सभी देवता डर और श्रद्धा से वहाँ आ गए।
ब्रह्मा आदि देवताओं ने हाथ जोड़कर भगवान से विनती की कि वे अपना क्रोध शांत करें।
➡️ मतलब: भगवान का क्रोध भी बहुत शक्तिशाली होता है, जिसे देवता भी शांत करने की प्रार्थना करते हैं।
चौथा अंतरा:
“अन्तर्यामी की महिमा ना जाणे…”
👉 भगवान की महिमा को पूरी तरह कोई नहीं जान सकता, यहाँ तक कि वेद भी केवल उसका वर्णन करते हैं।
इसलिए हमें भगवान के नाम को ही सच्चा मानना चाहिए, यही सबसे बड़ा प्रमाण है।
➡️ मतलब: भगवान की भक्ति और उनका नाम ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।
समग्र भाव:
यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान नरसिंह भगवान हमेशा अपने भक्तों (जैसे प्रह्लाद) की रक्षा करते हैं और बुराई का अंत करते हैं।
उनकी लीला, शक्ति और रूप असीम और अद्भुत हैं।


