निमाड़ी कलाकार

किरसान भाई कसो करि रयो काम - 2026

किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

SINGER – Gitesh Kumar Bhargava
Lyrics -Govind Bhai Patidar
किरसान भाई कसो करि रयो काम - 2026
किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

 

लगिगो उढालो कायड़ो पड़ी रयो काम
किरसान भाई कसो करि रयो काम

रुखड़ा खोदाड़ कोई खाद उठाडड
ट्रेक्टर भरी न कोई खेत म नखाड़
जरा भी बैठी न कर नई आराम
किरसान भाई कसो करि रयो काम

कोई गैर वक्खर कोई खेत माँ कलाड़
कोई खेत धारच कोई कटा काटड
सुबह सी खेत म हुए जाय शाम
किरसान भाई कसो करि रयो काम

कोई लपट डिरिप कोई इनलाइन बिछाव
उंडाला म कोई ज्वार मूंग लगाव
फिर भी फसल का मील नहीं दाम
किरसान भाई कसो करि रयो काम

कोई लव सुकलो कोई मजदूर बुलाव
कोई डाल्या ढाणी सी काम धकाव
चारा पानी को फिर भी कर इंतजाम
किरसान भाई कसो करि रयो काम

गोविन्द किरसान का गीत बनाव
किरसान की म्हणत की कहानी सुनाव
किरसान भाई न क करा राम राम
किरसान भाई कसो करि रयो काम


Kirsan Bhai Kaso Kari Rayo Kaam – 2026

किरसान भाई कसो करि रयो काम - 2026
किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

Lagigo udhalo kaydo padi rayo kaam
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam

Rukhda khodad koi khaad uthadad
Tractor bhari n koi khet m nakhad
Jara bhi baithi n kar nai aaram
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam

Koi gair vakkhar koi khet maa kalad
Koi khet dharach koi kata katad
Subah si khet m huye jay shaam
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam

Koi lapat drip koi inline bichhav
Undala m koi jwar moong lagav
Phir bhi fasal ka meel nahi daam
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam

Koi lav suklo koi majdoor bulav
Koi dalya dhaani si kaam dhakav
Chaara paani ko phir bhi kar intajaam
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam

Govind kirsan ka geet banav
Kirsan ki mehnat ki kahani sunav
Kirsan bhai n k kara Ram Ram
Kirsan bhai kaso kari rayo kaam


किरसान भाई कसो करि रयो काम - 2026
किरसान भाई कसो करि रयो काम – 2026

यह निमाड़ी लोकगीत “किरसान भाई कसो करि रयो काम” किसान के जीवन, उसकी अथाह मेहनत और संघर्ष को बहुत ही जीवंत और भावुक तरीके से प्रस्तुत करता है। गीत में एक किसान की दिनभर की मेहनत, गर्मी में तपती धरती पर उसका संघर्ष और परिवार व समाज के लिए उसके समर्पण को दिखाया गया है। यह केवल एक मनोरंजन गीत नहीं है, बल्कि किसान के जीवन का वास्तविक चित्रण है।

गीत की शुरुआत में ही बताया गया है कि भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद किसान लगातार खेतों में काम कर रहा है। “लागिगो उढालो कायदो पड़ी रयो काम” पंक्ति यह दर्शाती है कि मौसम कितना कठिन हो गया है, फिर भी किसान रुकने का नाम नहीं लेता। वह खेतों में मेहनत करता रहता है क्योंकि उसकी मेहनत पर ही पूरे समाज का जीवन टिका हुआ है।

आगे गीत में किसान के रोजमर्रा के कामों का विस्तार से वर्णन किया गया है। कोई खेत खोद रहा है, कोई खाद उठा रहा है, कोई ट्रैक्टर से खेत तैयार कर रहा है। किसान को आराम करने का समय नहीं मिलता। सुबह से शाम तक वह खेतों में लगा रहता है। यह हिस्सा किसान की शारीरिक मेहनत और उसकी जिम्मेदारियों को दर्शाता है।

गीत में खेती की आधुनिक तकनीकों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे ड्रिप और इनलाइन पाइप बिछाना। इससे यह पता चलता है कि आज का किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीकों का उपयोग करके अच्छी फसल उगाने की कोशिश कर रहा है। कोई ज्वार और मूंग की बुवाई कर रहा है, ताकि अच्छी उपज मिल सके। लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिलता। यह पंक्तियाँ किसान की आर्थिक परेशानी और उसकी मजबूरी को उजागर करती हैं।

गीत में किसान के पारिवारिक और सामाजिक जीवन की झलक भी दिखाई देती है। कोई मजदूर बुला रहा है, कोई ढाणी से काम संभाल रहा है, कोई पशुओं के लिए चारा-पानी का इंतजाम कर रहा है। यानी किसान सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे खेती के साथ-साथ परिवार, पशुधन और घर की जिम्मेदारियाँ भी निभानी पड़ती हैं।

गीतकार गोविंद भाई पाटीदार ने इस गीत के माध्यम से किसान की मेहनत को सम्मान देने की कोशिश की है। उन्होंने बहुत सरल और स्थानीय निमाड़ी भाषा में किसान की भावनाओं और संघर्ष को लोगों तक पहुँचाया है। गीत यह संदेश देता है कि किसान चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियों में हो, वह कभी हार नहीं मानता और पूरे समर्पण के साथ अपना काम करता रहता है।

यह गीत सुनने वालों के मन में किसानों के प्रति सम्मान, अपनापन और संवेदना पैदा करता है। साथ ही यह एहसास भी कराता है कि खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाला किसान ही देश की असली ताकत और अन्नदाता है।

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