चल्या अन्न का दाता किरसाण – Nimadi song 2026

🎵 Song Title: चल्या अन्न का दाता किरसाण
🎤 Singer: गितेश कुमार भार्गव
✍️ Lyrics Writer: गितेश कुमार भार्गव
🎶 Genre: निमाड़ी लोकगीत
🌾 Theme: किसान जीवन, खेती, परंपरा एवं ग्रामीण संस्कृति
📺 Published On: Nimadi Kalakar YouTube Channel
🎼 Language: निमाड़ी
निमाड़, मध्य प्रदेश
चल्या अन्न का दाता किरसाण – Nimadi song 2026
चल्या अन्न का दाता चल्या खेत वावण क
हो किरसाण बीज की करी तैयारी जी
बईलिया वधाव नार आरती रही उतारी जी
आखातीज प मोयरीत बीज लगायो
धरती माता का चरनन शीश झुकायो
हो किरसाणsss भरोसो दियो विधाता जी sss
करम का लेख लिख्या धरती पर सब जग जाणी जी sss
हाथ पिराणो बईलिया रास लगाई
नवा झूफाना सी तिफन लियो रे धुराई
हो किरसाणss लगायो सिंघाड सिराणा जीsss
हुयो सवेरो चल्या खेत म सब नर नारी जीsss
मन मोहक सी आवाज़ आव घूघरा सी
मदमस्त चली रहा बैल एक टप्पा सी
हो किरसाणss संग म नार सयानी जीsss
माथा धरी न रोटा को डब्बो चली बराबर जीss
सूरज की पयली किरण क ढोक लगाई
दियो रास क छुपको शुरू करि रे बुवाई
हो किरसाणss दाणो एक जसो पुराई जीsss
बड़ी ख़ुशी सी करि वावणी मन मुसकायी जी sss
Chalya Ann Ka Data Kirsan – Nimadi Song 2026

Chalya ann ka data chalya khet vawan ka,
Ho kirsan beej ki kari taiyari ji,
Bailiya vadhav naar aarti rahi utari ji.
Akhateej pe moyarit beej lagayo,
Dharti Mata ka charanan sheesh jhukayo,
Ho kirsansss bharoso diyo Vidhata ji sss,
Karam ka lekh likhya dharti par sab jag jaani ji sss.
Haath pirano bailiya raas lagayi,
Nava jhufana si tifan liyo re dhurai,
Ho kirsanss lagayo singhad sirana ji sss,
Huyo savero chalya khet mein sab nar naari ji sss.
Man mohak si awaaz aav ghughra si,
Madmast chali raha bail ek tappa si,
Ho kirsanss sang mein naar sayani ji sss,
Matha dhari na rota ko dabbo chali barabar ji sss.
Suraj ki payli kiran ka dhok lagayi,
Diyo raas ka chhupko shuru kari re buwai,
Ho kirsanss dano ek jaso purai ji sss,
Badi khushi si kari vawani man muskaayi ji sss.
🌾 गीत की विस्तृत व्याख्या

“चल्या अन्न का दाता किरसाण” केवल एक लोकगीत नहीं है, बल्कि भारतीय किसान के जीवन, उसकी संस्कृति, मेहनत, आस्था और परिवार के सहयोग का जीवंत चित्रण है। यह गीत निमाड़ अंचल की लोक परंपराओं को संजोते हुए उस किसान को सम्मान देता है जो अपनी मेहनत से पूरे देश का पेट भरता है।
– खेती की तैयारी और शुभारंभ
गीत की शुरुआत किसान के खेत की ओर प्रस्थान करने से होती है। वह बुवाई के लिए बीजों की तैयारी करता है। किसान की पत्नी बैलों की पूजा करती है और उनकी आरती उतारती है। यह दृश्य भारतीय ग्रामीण संस्कृति में पशुओं के प्रति सम्मान और खेती के महत्व को दर्शाता है।
यहाँ किसान केवल खेती नहीं कर रहा, बल्कि वह प्रकृति, पशु और धरती माता के साथ अपने आध्यात्मिक संबंध को भी निभा रहा है।
– धरती माता और ईश्वर के प्रति श्रद्धा
अक्षय तृतीया (आखातीज) जैसे शुभ दिन पर किसान बीज बोने की शुरुआत करता है। वह धरती माता के चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद मांगता है।
इस भाग में यह संदेश दिया गया है कि किसान अपनी मेहनत तो करता ही है, लेकिन साथ ही उसे ईश्वर और प्रकृति की कृपा पर भी विश्वास रहता है। वह जानता है कि उसकी मेहनत तभी सफल होगी जब मौसम और प्रकृति उसका साथ दें।
– बैलों और कृषि उपकरणों का महत्व
किसान अपने बैलों को तैयार करता है और खेती के उपकरणों को व्यवस्थित करता है। सुबह होते ही पूरा परिवार खेत की ओर बढ़ता है।
यह दृश्य ग्रामीण जीवन की सामूहिकता को दर्शाता है। खेती केवल किसान का काम नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार इसमें भागीदारी निभाता है। परिवार का हर सदस्य खेती को सफल बनाने में अपना योगदान देता है।
चौथा अंतरा – परिवार का सहयोग और ग्रामीण सौंदर्य
बैलों के गले में बंधे घुंघरुओं की मधुर ध्वनि वातावरण को आनंदमय बना देती है। किसान की पत्नी भोजन का डिब्बा लेकर उसके साथ खेत की ओर चलती है।
यह अंतरा ग्रामीण जीवन की सादगी, प्रेम और पारिवारिक सहयोग को दर्शाता है। किसान की सफलता के पीछे उसकी पत्नी और परिवार का भी उतना ही योगदान होता है जितना उसका स्वयं का।
पाँचवाँ अंतरा – आशा, परिश्रम और भविष्य के सपने
सूरज की पहली किरण के साथ किसान बुवाई शुरू करता है। वह हर बीज को सावधानीपूर्वक धरती में डालता है और एक उज्ज्वल भविष्य की आशा करता है।
हर बीज किसान के लिए केवल अनाज नहीं होता, बल्कि उसके सपनों, उसके परिवार की खुशियों और पूरे समाज के भविष्य का प्रतीक होता है। बुवाई के समय किसान के चेहरे पर मुस्कान होती है क्योंकि उसे विश्वास है कि उसकी मेहनत रंग लाएगी।


