आइजा रे इन्दर राजा Nimadi Geet Lyrics 2026

आइजा रे इन्दर राजा Nimadi Geet Lyrics 2026
Singer – Gitesh kumar Bhargava
Lyrics – Rajesh bhai Revaliya
“आइजा रे इन्दर राजा” एक मार्मिक निमाड़ी लोकगीत है, जो सूखे की मार झेल रहे किसानों की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है। यह गीत इंद्र देव से वर्षा की प्रार्थना करते हुए किसान के दर्द, मेहनत और प्रकृति पर उसकी निर्भरता का सजीव चित्रण करता है।
आइजा रे इन्दर राजा , बरसय द पाणी
किरसाण भाई पर कर मेहरबानी
काळा काळा वाधला न सी बरसय द बरसा
रात दिन पाणी क सब जन तरसा
जब सी गया हमरी खबर नी जाणी
किरसाण भाई पर कर मेहरबानी
मेहनत करा खूब वंगा चढ़य न
खून पसीनो सब बाल झडय न
मेहनत क माटी क्यों कर न की ठाणी
किरसाण भाई पर कर मेहरबानी
साहूकार सी बीज लाया वू भी उधार म
कर्जा का मरे सब फस्या मझदार म
थारा भरोसा छे या ज़िंदगानी
किरसाण भाई पर कर मेहरबानी
पाणी का लेण या धरती माँ तरसी
इना बार घामलय भी आग जैसी बरसी
राजेश की कलम लिख गीत की ज़ुबानी
किरसाण भाई पर कर मेहरबानी
आइजा रे इन्दर राजा Nimadi Geet Lyrics 2026

Aija Re Inder Raja, Barsay De Paani
Kirsaan Bhai Par Kar Meharbani
Kaala Kaala Vaadhla Na Si Barsay De Barsa
Raat Din Paani Ka Sab Jan Tarsa
Jab Si Gaya Hamri Khabar Ni Jaani
Kirsaan Bhai Par Kar Meharbani
Mehnat Kara Khoob Vanga Chadhay Na
Khoon Paseeno Sab Baal Jhaday Na
Mehnat Ki Maati Kyon Kar Na Ki Thaani
Kirsaan Bhai Par Kar Meharbani
Saahukaar Si Beej Laaya, Wo Bhi Udhaar Mein
Karja Ka Mare Sab Fasya Majhdaar Mein
Thara Bharosa Chhe Ya Zindagani
Kirsaan Bhai Par Kar Meharbani
Paani Ka Len Ya Dharti Maa Tarsi
Ina Baar Ghaamlay Bhi Aag Jaisi Barsi
Rajesh Ki Kalam Likh Geet Ki Zubaani
Kirsaan Bhai Par Kar Meharbani
यह गीत किसान की पीड़ा और वर्षा के देवता इंद्र देव से की गई एक भावुक प्रार्थना है। इसका हिंदी अर्थ इस प्रकार है:
“आइजा रे इन्दर राजा”
आइए हे इंद्र देव, वर्षा कर दीजिए।
हम किसानों पर अपनी कृपा और दया बरसाइए।
काले-काले बादल तो आसमान में छा गए हैं, लेकिन बरस नहीं रहे।
दिन-रात हर व्यक्ति पानी के लिए तरस रहा है।
ऐसा लगता है मानो आपने हमारी पुकार और हमारी खबर ही नहीं सुनी।
हे इंद्र देव, किसानों पर अपनी कृपा कीजिए।
किसानों ने खेतों में बहुत मेहनत की, लेकिन फसल आगे नहीं बढ़ पाई।
उनका खून-पसीना सब व्यर्थ होता दिखाई दे रहा है।
इतनी मेहनत की इस मिट्टी को आखिर क्यों सूखने के लिए छोड़ दिया गया?
हे इंद्र देव, किसानों पर अपनी कृपा कीजिए।
किसान साहूकार से भी उधार लेकर बीज खरीदकर लाया।
अब कर्ज़ के बोझ में फँसकर उसकी ज़िंदगी मुश्किलों से घिर गई है।
अब उसकी पूरी ज़िंदगी केवल आपके भरोसे पर टिकी हुई है।
हे इंद्र देव, किसानों पर अपनी कृपा कीजिए।
पानी के बिना धरती माँ भी प्यास से तड़प रही है।
इस वर्ष धूप भी आग की तरह बरसी है।
कवि राजेश अपनी कलम से किसानों का यह दर्द गीत के रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
हे इंद्र देव, किसानों पर अपनी कृपा कीजिए।
ह गीत किसानों की मेहनत, सूखे की मार, कर्ज़ की परेशानी और वर्षा की उम्मीद को बहुत भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें इंद्र देव से वर्षा की प्रार्थना के माध्यम से किसान के दर्द, संघर्ष और आशा को व्यक्त किया गया है।
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