गली गली में जोगी आया – Lyrics 2026

LYRICS – GITESH KUMAR BHARAGAV
गीत का परिचय
भारत की संत परंपरा में जोगी केवल भिक्षा माँगने वाला नहीं, बल्कि वैराग्य, भक्ति और लोकजागरण का संदेश देने वाला होता है। यह गीत ऐसे ही एक रमता जोगी की कहानी कहता है, जो गली-गली घूमकर अपनी बीन की मधुर धुन के साथ हरि नाम का संदेश फैलाता है। उसकी झोली भले ही खाली हो, लेकिन उसका मन भक्ति और आशीर्वाद से भरा है। आइए, सुनते हैं एक लोकभाव से ओत-प्रोत यह सुंदर प्रस्तुति—“गली-गली में जोगी आया”।
गली गली में जोगी आया – Lyrics 2026
गली-गली में जोगी आया, झोली में लाया साँप।
घर-घर जाकर अलख जगाए, करे हरि का जाप।
मैं जमके बीन बजाऊँ,
भिक्षा दे दो मुझको आज॥
(अंतरा 1)
सुबह-सबेरे आस लगाकर जोगी दर पे आया।
दे दो मैया, दे दो भैया, खाली झोली लाया।
लाल जिए, गोपाल जिए तेरा,
पूरण होगा काज॥
मैं जमके बीन बजाऊँ,
भिक्षा दे दो मुझको आज॥
(अंतरा 2)
मैं पानी-सा रमता जोगी, कौन दशा है जाना।
ना कोई संगी, ना कोई साथी, ना कोई पता-ठिकाना।
भजन-गीत मैं सबको सुनाऊँ,
रोज सजाऊँ साज़॥
मैं जमके बीन बजाऊँ,
भिक्षा दे दो मुझको आज॥
Gali-Gali Mein Jogi Aaya – Lyrics 2026

Gali-gali mein jogi aaya, jholi mein laaya saanp.
Ghar-ghar jaakar alakh jagaaye, kare Hari ka jaap.
Main jamke been bajaaun,
Bhiksha de do mujhko aaj.
(Antara 1)
Subah-sabere aas lagaakar jogi dar pe aaya.
De do Maiya, de do Bhaiya, khaali jholi laaya.
Laal jiye, Gopal jiye tera,
Pooran hoga kaaj.
Main jamke been bajaaun,
Bhiksha de do mujhko aaj.
(Antara 2)
Main paani-sa ramta jogi, kaun dasha hai jaana.
Na koi sangi, na koi saathi, na koi pata-thikaana.
Bhajan-geet main sabko sunaaun,
Roz sajaaun saaz.
Main jamke been bajaaun,
Bhiksha de do mujhko aaj.
गीत का भावार्थ

यह गीत एक ऐसे रमता जोगी की कथा प्रस्तुत करता है, जो गाँव-गाँव और गली-गली घूमकर भगवान का नाम स्मरण कराता है। उसकी झोली में साँप और हाथ में बीन है, जो उसकी पारंपरिक पहचान का प्रतीक हैं। वह घर-घर जाकर “अलख” जगाता है, अर्थात लोगों को ईश्वर की भक्ति, सत्य और आध्यात्मिक चेतना की ओर प्रेरित करता है। वह अपनी बीन की मधुर धुन सुनाकर लोगों से प्रेमपूर्वक भिक्षा की याचना करता है।
प्रथम अंतरे में जोगी सुबह-सुबह लोगों के द्वार पर आशा लेकर पहुँचता है। वह विनम्रता से माता और भाइयों से भिक्षा माँगता है। बदले में वह उन्हें हृदय से आशीर्वाद देता है कि उनके बच्चे दीर्घायु हों, परिवार सुखी रहे और उनके सभी शुभ कार्य सफलतापूर्वक पूरे हों। यह लोकजीवन में साधुओं द्वारा दिए जाने वाले मंगल आशीर्वाद की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है।
दूसरे अंतरे में जोगी अपने जीवन का परिचय देता है। वह स्वयं को पानी की तरह निरंतर बहने वाला, किसी एक स्थान पर न रुकने वाला यात्री बताता है। उसका कोई स्थायी घर, साथी या ठिकाना नहीं है। उसका जीवन केवल भक्ति, लोकसेवा और ईश्वर के संदेश का प्रचार करने के लिए समर्पित है। वह गाँव-गाँव जाकर भजन और लोकगीत सुनाता है, अपने साज़ को सजाकर लोगों के मन में श्रद्धा, प्रेम और भक्ति का संचार करता है।
समग्र रूप से यह गीत त्याग, वैराग्य, भक्ति, लोकसंस्कृति और मानवता का संदेश देता है। यह बताता है कि सच्चा जोगी धन-संपत्ति का नहीं, बल्कि ईश्वर के नाम, प्रेम और आशीर्वाद का धनी होता है। उसका उद्देश्य लोगों में आध्यात्मिक जागृति लाना और समाज में सद्भाव, करुणा तथा भक्ति का प्रकाश फैलाना है।


