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क्योंकि वो अटल है – अटल बिहारी वाजपेयी पर प्रेरणादायक कविता-Rajesh Bhai Revaliya

क्योंकि वो अटल है – अटल बिहारी वाजपेयी पर प्रेरणादायक कविता-Rajesh Bhai Revaliya

 

क्योंकि वो अटल है

(कविता)


वो विफल नहीं, वो सफल है,
क्योंकि वो अटल है।
जिनके श्रम से खिला कमल है,
उनका विश्वास प्रबल है,
क्योंकि वो अटल है।

जिनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम,
मातृभूमि का पावन वंदन है,
राजनीति में पारंगत,
संसद-भवन का वो महकता चंदन है,
क्योंकि वो अटल है।

महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी जैसा
अदम्य साहस जिनमें विराजमान है,
वीर-रस वक्ता,
जिनकी मधुर वाणी में
माँ सरस्वती का वास है,
क्योंकि वो अटल है।

कहाँ तक करूँ मैं बखान उनका,
उच्च कोटि का उनका स्थान है,
नमन करता है राजेश उस महापुरुष को,
वो भारत रत्न, अटल महान है,
क्योंकि वो अटल है।


✍️ काव्य रचिता

राजेश रेवलिया-Rajesh Bhai Revaliya

क्योंकि वो अटल है – विस्तृत भावार्थ

 

यह कविता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के महान व्यक्तित्व, उनके अडिग संकल्प, अदम्य साहस और राष्ट्रनिष्ठ जीवन-दर्शन को भावपूर्ण शब्दों में नमन करती है। कवि ने “अटल” शब्द को केवल नाम के रूप में नहीं, बल्कि उनके चरित्र, विचार और कर्म के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।

कविता की शुरुआत इस विश्वास से होती है कि अटल कभी विफल नहीं हो सकते, क्योंकि उनकी शक्ति परिणामों में नहीं बल्कि निरंतर प्रयास, श्रम और विश्वास में निहित है। उनके परिश्रम से “कमल” का खिलना केवल राजनीतिक सफलता का संकेत नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जो त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा पर आधारित है। उनका विश्वास इसलिए प्रबल है क्योंकि वह स्वार्थ से नहीं, बल्कि देशहित से जुड़ा हुआ है।

कवि आगे बताता है कि अटल बिहारी वाजपेयी के हृदय में माँ शारदे (सरस्वती) का वास है, अर्थात् वे विद्या, विवेक और वाणी की पवित्रता से युक्त हैं। उनकी वाणी केवल भाषण नहीं होती, बल्कि वह विचारों को दिशा देने वाली शक्ति है, जिसने न केवल भारत बल्कि विश्व को प्रभावित किया। उनकी भाषण शैली में सौम्यता, मर्यादा और प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।

कविता में अटल जी के साहित्यिक पक्ष को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मातृभूमि के प्रति समर्पण और मानवीय संवेदनाएँ स्पष्ट रूप से झलकती हैं। राजनीति में उनकी दक्षता उन्हें संसद-भवन का “महकता चंदन” बनाती है—जो अपनी सुगंध से पूरे वातावरण को पवित्र करता है। इसका आशय यह है कि उन्होंने राजनीति को मर्यादा, गरिमा और नैतिकता से जोड़े रखा।

कवि अटल जी के साहस की तुलना महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे वीरों से करता है। यह तुलना उनके अदम्य आत्मबल, कठिन परिस्थितियों में भी न झुकने वाले स्वभाव और राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा के संकल्प को दर्शाती है। वे वीर-रस के वक्ता हैं, जिनकी मधुर वाणी में भी ओज और तेज समाया हुआ है। उनकी वाणी में माँ सरस्वती का वास होना इस बात का प्रतीक है कि उनकी शक्ति शब्दों में है, तलवार में नहीं।

कविता के अंतिम भाग में कवि स्वीकार करता है कि ऐसे महान व्यक्तित्व का संपूर्ण वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। अटल जी का स्थान उच्च कोटि का है—इतिहास, राजनीति और साहित्य तीनों में। अंततः कवि श्रद्धा और विनम्रता के साथ उस महापुरुष को नमन करता है, जिसने भारत रत्न के रूप में देश को गौरवान्वित किया।

समग्र रूप से यह कविता केवल एक व्यक्ति का गुणगान नहीं, बल्कि आदर्श नेतृत्व, नैतिक राजनीति, साहित्यिक चेतना और राष्ट्रप्रेम का भावपूर्ण दस्तावेज है। “क्योंकि वो अटल है” यह पंक्ति अटल बिहारी वाजपेयी के नाम, स्वभाव और जीवन-दर्शन—तीनों का सार बनकर उभरती है।

गीतेश कुमार भार्गव


🟢 11.  FAQ

 

Q. यह कविता किस पर आधारित है?
A. यह कविता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और विचारों पर आधारित है।

Q. कविता का मुख्य भाव क्या है?
A. राष्ट्रप्रेम, साहस, नेतृत्व और अटल संकल्प।

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