निमाड़ी कलाकार

ॐ जय हो माँ गणगौर

🌸 ॐ जय हो माँ गणगौर गणगौर माता की आरती | निमाड़ी– लोकगीत lyrics

 ॐ जय हो माँ गणगौर

गणगौर माता की आरती निमाड़ी लोकगीत
माँ गणगौर की आरती – निमाड़ और मारवाड़ का लोकपर्व

🎤 स्वर (गायक): गितेश कुमार भार्गव GITESH KUMAR BHARGAVA
✍️ गीतकार: ओंकारसिंह जी चौहान OMKARSINGH JI CHOUHAN 
📺 प्रस्तुति: निमाड़ी कलाकार (YouTube पर प्रसारित) NIMADI KALAKAR
🎊 पर्व: गणगौर – निमाड़ और मारवाड़ का प्रमुख लोकपर्व NIMAD AUR MARVAAD KA PRAMUKH LOKPARV


 भूमिका (Introduction)

गणगौर निमाड़ और मारवाड़ अंचल का सबसे प्राचीन, लोकप्रिय और श्रद्धा से जुड़ा लोकपर्व है।
यह पर्व माँ पार्वती (गणगौर माता) को समर्पित है और विशेष रूप से सुहाग, समृद्धि और पारिवारिक सुख की कामना के लिए मनाया जाता है।
प्रस्तुत आरती गीत “ॐ जय हो माँ गणगौर” भक्ति, लोकपरंपरा और सामूहिक श्रद्धा का सुंदर उदाहरण है।


📜 गणगौर माता की आरती –

 आरती (मुखड़ा)

ॐ जय हो माँ गणगौर, मैया जय माता गणगौर।
सब मिल आरती गावां, नित संध्या और भोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 1

निर्मल ज्योत कपूर की, जगमग उजियारी,
ढीलक साँझ बजावा, शंखनाद घनघोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 2

पेल्य चुंदड़ी साजे, गळा आम को हार,
शोभा रथ की प्यारी, छवि अनुपम चितचोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 3

हरिया ज्वारा थारा, लहर-लहर लहराय,
घर-घर खुशी भनावा, छायो उमंग को दौर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 4

गौर न पाती खेला, बाड़ी म लगी गयो ठौर,
जोड़ा गावनि जिमाडा, अरज करा कर जोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 5

सात दिवस माँ भजन करा, करा आरती रोज,
पूरण करजो आशा, विनती करा पूर जोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥


 6

जो जन आरती गाव, पाप कट मन का,
सुमन आरती गाव, हुय मन भाव विभोर॥
ॐ जय हो माँ गणगौर॥

Om Jai Ho Maa Gangaur

Gangaur Mata Ki Aarti | Nimadi–Marwadi Lokgeet – LYRICS


Swar (Singer):

Gitesh Kumar Bhargava

Geetkar (Lyricist):

Omkarsingh Ji Chauhan

Prastuti (Presentation):

Nimadi Kalakar (YouTube par prasaarit)

Parv (Festival):

Gangaur – Nimad aur Marvaad ka pramukh lokparv


Bhoomika (Introduction)

Gangaur Nimad aur Marvaad anchal ka sabse praacheen, lokpriya aur shraddha se juda lokparv hai.
Yeh parv Maa Parvati (Gangaur Mata) ko samarpit hai aur vishesh roop se suhaag, samriddhi aur parivaarik sukh ki kaamna ke liye manaaya jaata hai.
Prastut aarti geet “Om Jai Ho Maa Gangaur” bhakti, lok-parampara aur saamoohik shraddha ka sundar udaharan hai.


📜 Gangaur Mata Ki Aarti – Lyrics (English / Roman)

Aarti (Mukhda)

Om jai ho Maa Gangaur, Maiya jai Mata Gangaur.
Sab mil aarti gaavaan, nit sandhya aur bhor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 1

Nirmal jyot kapoor ki, jagmag ujiyaari,
Dheelak saanjh bajaava, shankhnaad ghanghor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 2

Pelya chundadi saaje, gala aam ko haar,
Shobha rath ki pyaari, chhavi anupam chitchor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 3

Hariyaa jwaara thaara, lahar-lahar lahraay,
Ghar-ghar khushi bhanaava, chhaayo umang ko daur॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 4

Gaur na paati khela, baadi ma lagi gayo thaur,
Joda gaavani jimaada, arj kara kar jor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 5

Saat divas Maa bhajan kara, kara aarti roz,
Pooran karjo aasha, vinti kara poor jor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥


 6

Jo jan aarti gaav, paap kat man ka,
Suman aarti gaav, huy man bhaav vibhor॥
Om jai ho Maa Gangaur॥

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 आरती का विस्तृत भावार्थ

ॐ जय हो माँ गणगौर – निमाड़ी/मारवाड़ी आरती


 प्रस्तावना

गणगौर पर्व निमाड़ और मारवाड़ अंचल में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।
यह पर्व माँ पार्वती (गणगौर माता) को समर्पित है, जिन्हें सुहाग, सौभाग्य, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की देवी माना जाता है।
यह आरती स्त्रियों की आस्था, प्रेम और पारिवारिक मंगलकामना की अभिव्यक्ति है।


 मुखड़े का भावार्थ

“ॐ जय हो माँ गणगौर, मैया जय माता गणगौर
सब मिल आरती गावां, नित संध्या और भोर”

कवि माँ गणगौर की जय-जयकार करता है।
समस्त श्रद्धालु मिलकर प्रतिदिन प्रातः और संध्या आरती करने का संकल्प लेते हैं।
यह सामूहिक भक्ति, अनुशासन और निरंतर श्रद्धा का प्रतीक है।


 1

“निर्मल ज्योत कपूर की, जगमग उजियारी
ढीलक साँझ बजावा, शंखनाद घनघोर”

यहाँ आरती की दिव्य झांकी का वर्णन है।
कपूर की निर्मल ज्योति से वातावरण पवित्र होता है।
ढोलक और शंखनाद से पूजा स्थल भक्तिमय बन जाता है।
यह माँ की उपस्थिति और शक्ति का आह्वान है।


 2

“पेल्य चुंदड़ी साजे, गळा आम को हार
शोभा रथ की प्यारी, छवि अनुपम चितचोर”

माँ गणगौर को सुहाग की देवी के रूप में सजाया जाता है।
चुंदड़ी और आम के हार उनकी सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक हैं।
सजी हुई रथ यात्रा माँ की दिव्यता को दर्शाती है।


 3

“हरिया ज्वारा थारा, लहर-लहर लहराय
घर-घर खुशी भनावा, छायो उमंग को दौर”

हरियाली और ज्वार की बालियाँ समृद्धि, उर्वरता और शुभता का संकेत हैं।
पूरे गांव में आनंद और उत्साह फैल जाता है।
यह पंक्तियाँ प्रकृति और मानव जीवन के सामंजस्य को दर्शाती हैं।


4

“गौर न पाती खेला, बाड़ी म लगी गयो ठौर
जोड़ा गावनि जिमाडा, अरज करा कर जोर”

इस अंतरे में कन्याओं और सुहागिनों की पारंपरिक पूजा का वर्णन है।
बाड़ी (आँगन) में गणगौर की स्थापना होती है।
स्त्रियाँ अपने वैवाहिक जीवन और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं।


 5

“सात दिवस माँ भजन करा, करा आरती रोज
पूरण करजो आशा, विनती करा पूर जोर”

सात दिनों तक निरंतर भजन और आरती करना निष्ठा और संयम का प्रतीक है।
भक्त माँ से अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं।
यह साधना और विश्वास का सुंदर उदाहरण है।


  6

“जो जन आरती गाव, पाप कट मन का
सुमन आरती गाव, हुय मन भाव विभोर”

यह पंक्तियाँ बताती हैं कि श्रद्धा से आरती गाने से
मन के दोष और पाप नष्ट होते हैं।
भक्त का हृदय शुद्ध होकर आनंद और भक्ति से भर जाता है।


🌼 समग्र भावार्थ (निष्कर्ष)

यह आरती—

  • स्त्री आस्था और सुहाग की कामना

  • लोकपरंपरा और सांस्कृतिक एकता

  • प्रकृति, परिवार और भक्ति का संतुलन

को दर्शाती है।

ॐ जय हो माँ गणगौर” केवल आरती नहीं,
बल्कि निमाड़–मारवाड़ की आत्मा और नारी श्रद्धा का प्रतीक है।

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