निमाड़ी कलाकार

सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा

सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा LYRICS

🚩 सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा

अयोध्या राम मंदिर निर्माण पर आधारित निमाड़ी लोकगीत

सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा
सरयू स्नान और रामलला दर्शन – निमाड़ी लोकगीत

🎤 स्वर: गितेश कुमार भार्गव
✍️ गीतकार: राजेश भाई रेवाळिया
🎶 शैली: निमाड़ी लोकशैली
🛕 विषय: अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण

गीत को सुनने के लिए यह क्लिक करे

 


🌸 भूमिका (Introduction)

यह निमाड़ी लोकगीत अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक क्षणों पर आधारित है।
गीत में सरयू स्नान, रामलला के दर्शन, मंदिर निर्माण का संघर्ष, कारसेवकों का बलिदान और रामराज्य की भावना को लोकभाषा की सरलता और भावनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
यह गीत निमाड़ अंचल की लोकसंवेदना को अयोध्या से जोड़ता है।


सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा LYRICS

 

📜 मूल गीत

 मुखड़ा

सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा,
खूब सुज्यो अयोध्या धाम,
अपूण भी देखण जावांगा।

सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा,
भगवामय भारत मं धर्म की ध्वजा लहरावांगा।
सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा॥


 अंतरा – 1

मंदिर का लण संघर्ष बड़ो, कई साल सी करता आया,
पुष्य पुरबळा भाग जाग्या, अब जाई न फल पाया।
ढाई लाख ईट न सी, कुर्सी अरु नींव बनाई,
तीन सौ साठे स्तंभन पं मंदिर छत छाई।

मंदिर तो भव्य बनायो, खुशी घर-घर मं मनावांगा,
सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा॥


 अंतरा – 2

साधु-संतन का परिश्रम को, शुभ दिन आयो फलदायी,
कारसेवक बलिदान स्यूं, रामराज की बेला छाई।
हिंदू संगठन सब एक साथ खड़ा, मेहनत उनकी रंग लाई,
झूठ-फरेब अर धोखा पं, सत्य की फिर स्यूं विजय पाई।

जनवरी बाईस की छे दिनांक, दीप उत्सव रे मनावांगा,
सरयू भं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा॥


 अंतरा – 3

हिंदू राष्ट्र की नींव रखा, भगवो भारत मं फैलावांगा,
गली-गली घर-द्वार कं दीया न स्यूं सजावांगा।
मंगलाचार सब गावांगा, आनंद खुशी मनावांगा,
मुरली कहे, इना गीत कं घर-घर मं पोय चावांगा।

भारतवासी सब राजेश, रामजी का गुण हम गावांगा,
सरयू भं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा॥


गीत का भाव (संक्षेप)

यह गीत—

  • राम मंदिर निर्माण के संघर्ष और विजय को याद करता है

  • कारसेवकों और साधु-संतों के बलिदान को नमन करता है

  • सरयू स्नान और रामलला दर्शन की लोकआकांक्षा व्यक्त करता है

  • दीपोत्सव, मंगलाचार और राष्ट्रीय चेतना का उत्सव मनाता है


  • Ayodhya Ram Mandir Nimadi Song

  • सरयू मं करा स्नान रामजी

  • राम मंदिर निर्माण लोकगीत

  • Nimadi Ram Bhajan

  • Rajesh Revaliya Nimadi Song

  • Gitesh Kumar Bhargava Song

🛕 निष्कर्ष

यह निमाड़ी लोकगीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि
👉 आस्था,
👉 संघर्ष,
👉 लोकभावना
और रामभक्ति का सामूहिक स्वर है।

अयोध्या राम मंदिर निर्माण को यह गीत निमाड़ की मिट्टी और लोकभाषा से जोड़ देता है।

 गीत का विस्तृत भावार्थ

 

निमाड़ी लोकशैली में रामभक्ति और ऐतिहासिक विजय का स्वर


🔷 प्रस्तावना

यह निमाड़ी लोकगीत अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक निर्णय और निर्माण कार्य से उपजे जनभावना का प्रतीक है।
गीत में रामभक्ति, संघर्ष, बलिदान, लोक-आस्था और उत्सव—इन सभी तत्वों का सुंदर समन्वय है।
निमाड़ अंचल की लोकभाषा में रचा गया यह गीत अयोध्या को जन-जन से जोड़ देता है।


🎵 मुखड़े का भावार्थ

“सरयू मं करा स्नान, रामजी का दर्शन पावांगा”

गीत का मुखड़ा भक्त की गहरी इच्छा को प्रकट करता है—
सरयू नदी में स्नान कर, श्रीराम के दर्शन करने की।
यह केवल तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और श्रद्धा का प्रतीक है।

“खूब सुज्यो अयोध्या धाम”
अयोध्या का भव्य और दिव्य रूप, राम मंदिर निर्माण के बाद, पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया है।

“भगवामय भारत मं धर्म की ध्वजा लहरावांगा”
यह पंक्ति देश में धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण और रामभक्ति के प्रसार को दर्शाती है।


🎶 अंतरा 1 का भावार्थ

इस अंतरे में राम मंदिर निर्माण के लंबे संघर्ष का वर्णन है।

  • वर्षों तक चले आंदोलन और प्रतीक्षा को कवि स्मरण करता है।

  • “पुष्य पुरबळा भाग जाग्या” से तात्पर्य है—
    शुभ समय आया और प्रयास सफल हुए।

  • ईंट, नींव और स्तंभों का उल्लेख मंदिर के भव्य, स्थायी और ऐतिहासिक स्वरूप को दर्शाता है।

“मंदिर तो भव्य बनायो, खुशी घर-घर मं मनावांगा”
राम मंदिर केवल अयोध्या का नहीं, बल्कि पूरे देश का उत्सव बन गया।


🎶 अंतरा 2 का भावार्थ

यह अंतरा संघर्ष के नायकों को समर्पित है।

  • साधु-संतों का तप,

  • कारसेवकों का बलिदान,

  • हिंदू समाज की एकता—
    इन सबने मिलकर रामराज्य की भावना को पुनर्जीवित किया।

“झूठ-फरेब अर धोखा पं, सत्य की फिर स्यूं विजय पाई”
यह पंक्ति बताती है कि अंततः सत्य और आस्था की जीत हुई।

22 जनवरी का उल्लेख रामलला प्राण-प्रतिष्ठा और दीपोत्सव के ऐतिहासिक दिन की ओर संकेत करता है।


🎶 अंतरा 3 का भावार्थ

यह अंतरा भविष्य की कल्पना और सांस्कृतिक उत्सव को दर्शाता है।

  • गली-गली दीपों से सजे भारत का चित्र,

  • मंगलाचार, भजन और सामूहिक आनंद—
    यह सब रामराज्य की लोककल्पना को साकार करता है।

“मुरली कहे, इना गीत कं घर-घर मं पोय चावांगा”
कवि आशा व्यक्त करता है कि यह गीत हर घर तक पहुँचे और रामभक्ति को फैलाए।

“भारतवासी सब… रामजी का गुण गावांगा”
यह राष्ट्रीय एकता और साझा आस्था का संदेश है।


🌼 समग्र भावार्थ (निष्कर्ष)

यह निमाड़ी लोकगीत—

  • राम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक संघर्ष और विजय का दस्तावेज है

  • कारसेवकों और संतों के त्याग को नमन है

  • सरयू स्नान और राम दर्शन की लोकभावना का प्रतीक है

  • रामभक्ति को लोकभाषा में जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम है

यह गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि
👉 आस्था का घोष,
👉 संस्कृति का उत्सव,
👉 इतिहास की लोक-अभिव्यक्ति है।

Scroll to Top