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म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग निमाड़ी लोकगीत – निमाड़ की संस्कृति और नर्मदा नदी

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग – निमाड़ी लोकगीत | Gitesh Kumar Bhargava

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग निमाड़ी लोकगीत – निमाड़ की संस्कृति और नर्मदा नदी

🎵 म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग

निमाड़ी लोकगीत | Nimadi Lok Geet Lyrics


📌 गीत की जानकारी (Song Details)

  • गीत का नाम: म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग

  • गायक (Singer): गीतेश कुमार भार्गव

  • गीतकार (Lyrics): भगीरथ यादव

  • भाषा: निमाड़ी

  • श्रेणी: निमाड़ी लोकगीत / सांस्कृतिक गीत

गाना सुनने के लिए यहाँ क्लिक करे


📝 गीत के बोल (Lyrics)

प्याराे लग न निरालाे लग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।


म्हारा निमाड़ म संत सिगाजी,
खजूरी म जनम लियो बस्या पिपळ्या जी।
जे को शरद पूणम को मेळो लग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।


म्हारा निमाड़ म सतपुड़ा पहाड़ी,
सतपुड़ा पहाड़ी में छे नागल वाड़ी।
नाग पंचव प जेकी ज्योत जग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।


म्हारा निमाड़ में गढ़ मंदाता,
माहेश्वर नगरी म अहिल्या माता।
पूजी रया भगत भोलानाथ का पग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।


म्हारा निमाड़ म रेवा कावेरी,
परकम्मा पंचकोशी फिर सब फेरी।
भागीरथ नाम जप रग-रग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।

🎵 Mharo Nimad Mak Pyaro Lag

Nimadi Folk Song – English (Roman) Lyrics

Singer: Gitesh Kumar Bhargava
Lyrics: Bhagirath Yadav


Pyaro lag na niralo lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


Mharo Nimad ma Sant Sigaji,
Khajuri ma janam liyo, basya Piplya ji.
Je ko Sharad Poonam ko melo lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


Mharo Nimad ma Satpura pahadi,
Satpura pahadi ma chhe Nagal wadi.
Nag Pancham par jeki jyot jag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


Mharo Nimad ma Garh Mandata,
Maheshwar nagari ma Ahilya Mata.
Pooji raya bhagat Bholanath ka pag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


Mharo Nimad ma Rewa Kaveri,
Parikrama Panchkoshi, phir sab feri.
Bhagirath naam jap rag-rag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


🌿 गीत का विस्तृत भावार्थ

“म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग”

यह गीत निमाड़ अंचल के प्रति गहरे प्रेम, गर्व और सांस्कृतिक आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। गीतकार भगीरथ यादव ने निमाड़ को केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, प्रकृति और संत परंपरा का जीवंत रूप बताया है।


🔸 मुखड़ा का भाव

“प्याराे लग न निरालाे लग,
म्हाराे निमाड़ मक प्याराे लग।”

इस पंक्ति में गायक कहता है कि निमाड़ उसे साधारण नहीं, बल्कि अनोखा और अत्यंत प्रिय लगता है। यहाँ “निरालो” शब्द निमाड़ की विशिष्ट संस्कृति और पहचान को दर्शाता है।


🔸 संत सिगाजी और शरद पूर्णिमा

“म्हारा निमाड़ म संत सिगाजी,
खजूरी म जनम लियो बस्या पिपळ्या जी।
जे को शरद पूणम को मेळो लग…”

इस अंतरे में संत सिगाजी महाराज का स्मरण किया गया है, जिनका जन्म खजूरी में हुआ और जिनकी आस्था पिपल्या से जुड़ी है।
शरद पूर्णिमा का मेला निमाड़ की धार्मिक परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह दर्शाता है कि निमाड़ की भूमि संतों की तपस्या से पवित्र हुई है।


🔸 सतपुड़ा पर्वत और नाग पंचमी

“म्हारा निमाड़ म सतपुड़ा पहाड़ी,
नाग पंचव प जेकी ज्योत जग…”

सतपुड़ा पर्वत निमाड़ की प्राकृतिक पहचान है।
नाग पंचमी पर जलने वाली ज्योत प्राचीन लोक विश्वास, प्रकृति पूजा और सांपों के प्रति श्रद्धा को दर्शाती है। यह बताता है कि निमाड़ में प्रकृति और धर्म साथ-साथ चलते हैं।


🔸 गढ़ मंदाता और अहिल्याबाई होल्कर

“म्हारा निमाड़ में गढ़ मंदाता,
माहेश्वर नगरी म अहिल्या माता…”

गढ़ मंदाता और माहेश्वर निमाड़ के ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र हैं।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर को न्याय, धर्म और भक्ति की प्रतीक माना जाता है।
यह अंतरा निमाड़ की शासन व्यवस्था, संस्कृति और शिव भक्ति की महान परंपरा को उजागर करता है।


🔸 नर्मदा (रेवा), पंचकोशी परिक्रमा और भक्ति

“म्हारा निमाड़ म रेवा कावेरी,
परकम्मा पंचकोशी फिर सब फेरी…”

यहाँ नर्मदा माता (रेवा) को जीवनदायिनी के रूप में नमन किया गया है।
पंचकोशी परिक्रमा श्रद्धा, तपस्या और आत्मशुद्धि का मार्ग मानी जाती है।
“भागीरथ नाम जप रग-रग” से स्पष्ट होता है कि गीतकार के हर कण में निमाड़ और भक्ति बसी है।


🌼 समग्र भाव

यह गीत—

  • निमाड़ की धरती, नदियाँ, पहाड़, संत और देवी-देवताओं का गुणगान है

  • निमाड़ी संस्कृति पर गौरव और अपनापन व्यक्त करता है

  • नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है


✨ निष्कर्ष

“म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग” केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि
👉 निमाड़ की आत्मा की आवाज़ है।
यह गीत बताता है कि निमाड़ सिर्फ रहने की जगह नहीं,
बल्कि आस्था, परंपरा और पहचान है।

🌾 गीत का भाव (संक्षेप में)

यह गीत निमाड़ की भूमि, उसकी धार्मिक परंपराओं, संत सिगाजी, सतपुड़ा पर्वत, नर्मदा (रेवा) और माहेश्वर की ऐतिहासिक-आध्यात्मिक पहचान को प्रेम और गर्व के साथ प्रस्तुत करता है।
गीतकार भगीरथ यादव ने निमाड़ को संस्कृति, भक्ति और प्रकृति का संगम बताया है।

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