निमाड़ी कलाकार

पंखिड़ा प्यारा 2.0

पंखिड़ा प्यारा 2.0 Lyrics – Nimadi Nirgun Lokgeet | Gitesh Kumar Bhargava

 पंखिड़ा प्यारा 2.0

(निमाड़ी नीरगुण लोकगीत | Nimadi Philosophical Song)

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पंखिड़ा प्यारा 2.0

 

📌 Song Details


✨ गीत का दोहा / संदेश

“ये तन काँच कुंभ है, लियो फिरे थे साथ,
टपका लगा फूटी गया, कुछ न आया हाथ।”

👉 यह दोहा जीवन की नश्वरता और मिथ्या मोह को स्पष्ट करता है।


🎶 गीत के बोल (Lyrics)

सबक जाणु पडग अकेलो,
पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ मेलो।


1️⃣ पहला अंतरा

छूटग सब महल अटारी,
कुटुम्ब, कुबिली, दुनिया सारी।
साथ जाये न पैसो घेलो…
पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ मेलो।


2️⃣ दूसरा अंतरा

राजा हो या रंक भिखारी,
जग सी गया सब बारी-बारी।
मौत को जग म छे असो खेलो…
पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ मेलो।


3️⃣ तीसरा अंतरा

रखिन चिता पर दाग लगाव,
“प्रेमी” गीत यो सबक सुणाव।
चार दिन होय ग सब मिल भेलो…
पंखिड़ा प्यारा दो दिन को यहाँ मेलो।

Pankhida Pyara

Singer: Gitesh Kumar Bhargava
Lyrics: Brajmohan Choukse


Pankhida pyara – 2


“Ye tan kaanch kumbh hai, liyo phire the saath,
Tapka laga phooti gaya, kuchh na aaya haath.”


Sabak jaanu pang akelo,
Pankhida pyara do din ko yahan melo.


1) First Antara

Chhootag sab mahal ataari,
Kutumb kubili duniya saari.
Saath jaaye na paiso ghelo…
Pankhida pyara do din ko yahan melo.


2) Second Antara

Raja ho ya rank bhikaari,
Jag si gaya sab baari-baari.
Maut ko jag ma chhe aso khelo…
Pankhida pyara do din ko yahan melo.


3) Third Antara

Rakhin chita par daag lagaav,
“Premi” geet yo sabak sunaav.
Chaar din hoy g sab mil bhelo…
Pankhida pyara do din ko yahan melo.


📝 गीत का भावार्थ (Short Explanation)

यह निमाड़ी नीरगुण गीत मानव जीवन को दो दिन के मेले की तरह बताता है।
धन, परिवार, पद और वैभव — कोई भी मृत्यु के साथ नहीं जाता।
अंत में केवल कर्म और सीख ही शेष रहती है।

🕊️ गीत का विस्तृत भावार्थ

पंखिड़ा प्यारा

(निमाड़ी नीरगुण लोकगीत)


🌿 1. गीत का केंद्रीय भाव (Core Theme)

यह गीत मानव जीवन को दो दिन के मेले के रूप में प्रस्तुत करता है।
यह संसार अस्थायी है, यहाँ का वैभव, रिश्ते और पहचान सब क्षणभंगुर हैं।
मनुष्य एक पंखिड़े (पक्षी) की तरह है, जो थोड़ी देर के लिए इस धरती पर ठहरता है और फिर उड़ जाता है।


🪔 2. दोहे का अर्थ – शरीर की नश्वरता

“ये तन काँच कुंभ है…”

यह दोहा शरीर को काँच के घड़े से तुलना करता है—

  • देखने में मजबूत लगता है

  • पर एक हल्की ठोकर से टूट जाता है

👉 संदेश स्पष्ट है:
शरीर नश्वर है, इस पर घमंड व्यर्थ है।


🧍‍♂️ 3. मनुष्य का अकेला सफर

“सबक जाणु पङ्ग अकेलो”

मनुष्य:

  • जन्म अकेला लेता है

  • मृत्यु भी अकेले ही आती है

👉 जीवन की यात्रा व्यक्तिगत है, कोई भी साथ नहीं जाता।


🏰 4. पहला अंतरा – संसार का मोह

“छूटग सब महल अटारी…”

महल, परिवार, धन-दौलत—
सब कुछ यहीं रह जाता है।
पैसा भी साथ नहीं जाता।

👉 यह पंक्तियाँ मोह-माया से मुक्त होने का संदेश देती हैं।


👑 5. दूसरा अंतरा – सब बराबर हैं

“राजा हो या रंक भिखारी…”

मृत्यु के सामने:

  • राजा

  • गरीब

  • भिखारी

सब बराबर हैं।

👉 मृत्यु संसार का सबसे निष्पक्ष सत्य है।


🔥 6. तीसरा अंतरा – अंतिम सत्य

“रखिन चिता पर दाग लगाव”

चिता और अग्नि:

  • जीवन के अंत का प्रतीक

  • शरीर समाप्त, आत्मा मुक्त

गीतकार “प्रेमी” (कवि) इस सत्य को सीधे और निर्भीक रूप में सुनाता है।


🕰️ 7. “चार दिन” का संकेत

“चार दिन होय ग सब मिल भेलो”

यहाँ “चार दिन” का अर्थ:

  • जीवन बहुत छोटा है

  • रिश्ते क्षणिक हैं

👉 इसलिए:

  • अहंकार छोड़ो

  • प्रेम और सत्य अपनाओ


❤️ 8. पंखिड़ा – आत्मा का प्रतीक

“पंखिड़ा” केवल पक्षी नहीं है,
यह मानव आत्मा का प्रतीक है—

  • स्वतंत्र

  • अस्थायी

  • बंधनों से परे


🌼 9. नीरगुण दर्शन की झलक

यह गीत:

  • कबीर

  • दादू

  • मीरा

की नीरगुण परंपरा से जुड़ता है।
ईश्वर को आकार नहीं, अनुभव माना गया है।


✨ 10. जीवन संदेश (Life Lesson)

यह गीत हमें सिखाता है:

  • जीवन को हल्के में जियो

  • मोह और घमंड छोड़ो

  • सत्य और प्रेम अपनाओ

  • समय रहते आत्मबोध करो


🌺 निष्कर्ष

“पंखिड़ा प्यारा”
सिर्फ लोकगीत नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है।
यह गीत सुनकर मनुष्य रुककर सोचने लगता है—
“मैं कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ और कहाँ जाऊँगा?”

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