निमाड़ी कलाकार

Kasi Badi Rahi Mehangai Re Ram Nimadi folk song lyrics feature image showing inflation impact

कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम – निमाड़ी लोकगीत लिरिक्स

🔷 कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम – निमाड़ी लोकगीत लिरिक्स

कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम निमाड़ी लोकगीत की फीचर इमेज – महंगाई से जूझता ग्रामीण जीवन
“निमाड़ी लोकगीत ‘कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम’ – बढ़ती महंगाई से जूझते आम आदमी की पीड़ा।”

🔷 Intro Paragraph

कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम एक सशक्त निमाड़ी लोकगीत है, जो आज के समय की बढ़ती महंगाई, आम आदमी की परेशानी और जीवन संघर्ष को सच्चे लोकभाव में प्रस्तुत करता है। इस गीत को गीतेश कुमार भार्गव ने स्वर दिया है तथा इसके शब्द गोविन्द पाटीदार द्वारा लिखे गए हैं।


🔷 Song Information Box

Song Title: कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम
Genre: निमाड़ी लोकगीत
Singer: गीतेश कुमार भार्गव
Lyrics: गोविन्द पाटीदार
Language: निमाड़ी
Theme: महंगाई, सामाजिक यथार्थ


🔷 Lyrics Section

कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम – निमाड़ी लोकगीत लिरिक्स

मुखड़ा
कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम,
एना जमाना म।
गैस मंयगी – प्याज मंयगो –
लसुन मंयगी – तेल मंयगो।
असो मंयगो पड़ रे वघार,
इना जमाना म॥


अंतरा 1
बाळ-बच्चा कसा रे भणावा,
कसो सपना को घर हम बणावा।
फिस मंयगी – ड्रेस मंयगी –
ईट मंयगी – रेत मंयगी।
असी सरया प बळ अंगार,
इना जमाना म॥


अंतरा 2
कोई मन की हमारी नी जाणी,
कसा करा भाई किरसाणी।
खाद मंयगो – बीज मंयगो –
दवाई मंयगी – डीजल मंयगो।
सब लावणु पड़ रे उधार,
अब का सी मिल ग उधार,
इना जमाना म॥


अंतरा 3
मेंहंगाई को कवा काई हाल,
बड़ो मंयगो पड़ अस्पताल।
सुई मंयगी – डाक्टर मंयगो –
दवा मंयगी – वार्ड मंयगो।
गीत उधव गोविन्द की सार,
इना जमाना म।
राम करजे मत्ति रे बीमार,
इना जमाना म॥

Kasi Badi Rahi Mehangai Re Ram

Nimadi Folk Song Lyrics (English – Roman)

Singer: Gitesh Kumar Bhargava
Lyrics: Govind Patidar


Mukhda (Chorus)

Kasi badi rahi mehangai re Ram,
Ena zamana mein.
Gas mayangi – pyaj mayango –
Lasun mayangi – tel mayango.
Aso mayango pad re vaghar,
Ena zamana mein.


Antara 1

Baal-bachcha kasa re bhanava,
Kaso sapna ko ghar hum banava.
Fees mayangi – dress mayangi –
Eet mayangi – ret mayangi.
Asi sarya par bal angaar,
Ena zamana mein.


Antara 2

Koi man ki hamari ni jaani,
Kasa kara bhai kirsaani.
Khaad mayango – beej mayango –
Dawai mayangi – diesel mayango.
Sab laavanu pad re udhaar,
Ab ka si mil go udhaar,
Ena zamana mein.


Antara 3

Mehangai ko kava kai haal,
Bado mayango pad aspataal.
Sui mayangi – doctor mayango –
Dawa mayangi – ward mayango.
Geet udhav Govind ki saar,
Ena zamana mein.
Ram karje matti re bimaar,
Ena zamana mein.


🔷 Short Meaning

यह गीत बढ़ती महंगाई से जूझते आम आदमी, किसान और परिवार की व्यथा को उजागर करता है। शिक्षा, घर, खेती और इलाज — जीवन की हर जरूरत महंगी हो गई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग कर्ज में डूबता जा रहा है।

हिन्दी भावार्थ / Explanation

निमाड़ी लोकगीत “कसी बड़ी रही मेंहंगाई रे राम” आज के समय की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या — बढ़ती महंगाई — को सजीव और मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है। यह गीत आम आदमी, किसान और मध्यम वर्ग की रोज़मर्रा की परेशानियों को सरल लोकभाषा में उजागर करता है। गीत का मुखड़ा यह स्पष्ट करता है कि वर्तमान समय में जीवन की हर आवश्यकता महंगी हो गई है, चाहे वह रसोई गैस हो, सब्ज़ियाँ हों या खाने का तेल।

गीत के पहले अंतरे में परिवार और बच्चों की शिक्षा की चिंता दिखाई देती है। बढ़ती फीस, कपड़े और घर बनाने की लागत आम परिवार के सपनों को अधूरा छोड़ने पर मजबूर कर रही है। दूसरे अंतरे में किसान की व्यथा सामने आती है, जहाँ खाद, बीज, दवाइयों और डीज़ल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि खेती करना कर्ज़ के बिना संभव नहीं रह गया। किसान मेहनत करता है, पर उसकी पीड़ा को समझने वाला कोई नहीं है।

तीसरे अंतरे में स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई पर करारा प्रहार किया गया है। अस्पताल, डॉक्टर और दवाइयाँ इतनी महंगी हो गई हैं कि बीमार व्यक्ति भी इलाज कराने से डरने लगा है। गीतकार गोविन्द पाटीदार ने इन सभी स्थितियों को संवेदनशीलता के साथ शब्दों में पिरोया है, जबकि गायक गीतेश कुमार भार्गव की आवाज़ इन भावों को और प्रभावशाली बना देती है।

यह लोकगीत केवल शिकायत नहीं, बल्कि समाज को सोचने और संवेदनशील बनने का संदेश देता है।


🔷 Tags / Keywords

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