ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी Meeraji bhajan Lyrics 26

“ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी” संत-कवयित्री मीराबाई का अत्यंत प्रसिद्ध भजन है। यह भजन मीरा के उस निष्काम, अनन्य और आत्मसमर्पित प्रेम को व्यक्त करता है जो उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण (सांवरिया) के प्रति जिया। इसमें सांसारिक बंधनों से परे, विरह-वेदना, प्रेम की पीड़ा और ईश्वर-मिलन की तीव्र आकांक्षा का मार्मिक चित्रण मिलता है।
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
घायल की गति घायल जाणै,
जो कोई घायल होय ।
जौहरि की गति जौहरी जाणै,
की जिन जौहर होय ॥
सूली ऊपर सेज हमारी,
सोवण किस बिध होय ।
गगन मंडल पर सेज पिया की,
किस बिध मिलणा होय ॥
दर्द की मारी बन-बन डोलूं,
वैद्य मिल्या नहिं कोय ।
मीरा की प्रभु पीर मिटेगी,
जद वैद्य सांवरिया होय ॥
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
— Extra Lines —
ना मैं जानू आरती वन्दन,
ना पूजा की रीत ।
लिए री मैंने दो नैनो के,
दीपक लिए संजोये ॥
Ai ri main to prem-deewani

Ai ri main to prem-deewani,
Mero dard na jaanai koy.
Ghaayal ki gati ghaayal jaanai,
Jo koi ghaayal hoy.
Jauhari ki gati jauhari jaanai,
Ki jin jauhar hoy.
Sooli upar sej hamaari,
Sovan kis bidh hoy.
Gagan mandal par sej piya ki,
Kis bidh milna hoy.
Dard ki maari ban-ban doloon,
Vaidya milya nahin koy.
Meera ki Prabhu peer mitegi,
Jad vaidya saanwariya hoy.
Ai ri main to prem-deewani,
Mero dard na jaanai koy.
Ai ri main to prem-deewani,
Mero dard na jaanai koy.
— Extra Lines —
Na main jaanu aarti vandan,
Na pooja ki reet.
Liye ri maine do naino ke,
Deepak liye sanjoye.



