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भजन करो रे मेला चार दिनों का निमाड़ी भक्ति भजन लिरिक्स

भजन करो रे मेला चार दिनों का – भक्ति भजन लिरिक्स | Gitesh Kumar Bhargava

भजन करो रे मेला चार दिनों का – भक्ति भजन लिरिक्स | Gitesh Kumar Bhargava

भजन करो रे मेला चार दिनों का निमाड़ी भक्ति भजन लिरिक्स

🔷 भजन करो रे मेला चार दिनों का -भक्ति भजन लिरिक्स

🎤 Singer (गायक): Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics (लेखक): Brajmohan Choukse (ब्रजमोहन चौकसे)
🎶 Genre: Nimadi Bhakti / Nirgun Bhajan

🔷 Bhajan Karo Re Mela Chaar Dino Ka – Bhakti Bhajan Lyrics

🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics: Brajmohan Choukse
🎶 Genre: Nimadi Bhakti / Nirgun Bhajan


🌼 Chorus

Bhajan karo re mela chaar dino ka – (2)
Chaar dino ka rain basera,
Is pal mein kuch jatan karo re,
Mela chaar dino ka…
Bhajan karo re mela chaar dino ka.


🌿 Antara 1

Is pinjre mein panchhi veerana – (2)
Maalik se kuch lagan karo re…
Mela chaar dino ka…
Bhajan karo re mela chaar dino ka.


🌿 Antara 2

Wo satguru bhav paar lagaaye – (2)
Guru charnan mein naman karo re…
Mela chaar dino ka…
Bhajan karo re mela chaar dino ka.


🌿 Antara 3

Bahut gawaayi, thodi hai baaki,
Neki ka kuch karam karo re…
Mela chaar dino ka…
Bhajan karo re mela chaar dino ka.


🌿 Antara 4

Bhatkat-bhatkat haar gaya hai,
Premi dukhda haran karo re…
Melo chaar dino ka…


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🔶 भजन का भाव

यह निमाड़ी भजन मानव जीवन की नश्वरता को सरल शब्दों में समझाता है। “चार दिनों का मेला” जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है, जो हमें सत्कर्म, भक्ति और गुरु स्मरण का संदेश देता है।

🔶 भजन का भावार्थ / व्याख्या

यह भजन मानव जीवन की क्षणभंगुरता और आध्यात्मिक चेतना का गहरा संदेश देता है। “मेला चार दिनों का” जीवन को एक अस्थायी यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ मनुष्य कुछ समय के लिए इस संसार में आता है और फिर चला जाता है। इसलिए भजन में कहा गया है कि जब तक यह जीवन मिला है, तब तक भक्ति, साधना और सत्कर्म का प्रयास करना चाहिए।

भजन की पंक्तियाँ बताती हैं कि यह शरीर एक पिंजरे के समान है और आत्मा उसमें बंद पंछी की तरह है। यदि मनुष्य संसार की माया में उलझा रहेगा, तो आत्मा विरान और दुखी हो जाएगी। इसलिए ईश्वर से लगन लगाने और मालिक को याद करने का उपदेश दिया गया है।

सतगुरु को जीवन की नाव पार लगाने वाला बताया गया है। गुरु की शरण में जाकर, उनके चरणों में नमन करने से भवसागर से मुक्ति संभव होती है। भजन यह भी स्मरण कराता है कि जीवन का बहुत सा समय व्यर्थ चला गया है, अब जो समय बचा है उसमें नेकी, धर्म और अच्छे कर्म करने चाहिए।

अंत में, थका-हारा भक्त ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसके दुखों को हर लें और उसे प्रेम व भक्ति का मार्ग दिखाएँ। यह भजन वैराग्य, भक्ति और आत्मचिंतन का सुंदर संदेश देता है।

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