भारत के गणतंत्र का पावन पर्व 2026 – Samrath Bhargava
INDIAN REPUBLIC DAY 2026 -SAMRATH BHARGAVA

लेखक – समरथ भार्गव
संपादक – गीतेश कुमार भार्गव
26 जनवरी – भारत के गणतंत्र का पावन पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस विचारधारा का उत्सव है जिसने भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और समानता पर आधारित राष्ट्र बनाया। यह दिन हमें हमारे संविधान, संविधान निर्माताओं और उन अमर शहीदों की याद दिलाता है, जिनके बलिदान से हम आज स्वतंत्र हवा में सांस ले पा रहे हैं। इसी भावना को शब्दों में पिरोता यह लेख, 26 जनवरी 2026 के अवसर पर दिए जाने वाले एक प्रेरणादायी भाषण के मूल भाव को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है।
🇮🇳 गणतंत्र दिवस 2026: संविधान, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम का संकल्प
“चाहे आप गीता पढ़ते हों या कुरान, हमारे सीने में सदा हिन्दुस्तान होना चाहिए” — यह पंक्ति ही भारत की आत्मा को परिभाषित करती है। भारत विविधताओं का देश है, जहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ होते हुए भी राष्ट्र सर्वोपरि है।
🕊️ अमर शहीदों और संविधान निर्माताओं को नमन

गणतंत्र दिवस का प्रथम कर्तव्य है —
माँ भारती के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम और
उन सभी अमर शहीदों को नमन, जिन्होंने देश की आन-बान-शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
साथ ही हम कृतज्ञ हैं संविधान निर्माताओं के —
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. हरिसिंह गौर जैसे महान विद्वानों के, जिनके अथक परिश्रम से विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान हमें प्राप्त हुआ।
👉 भारतीय संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे — यह स्वयं में लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
📜 अधिकार नहीं, कर्तव्य भी उतने ही आवश्यक
आज अक्सर देखा जाता है कि लोग मौलिक अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन मौलिक कर्तव्यों को भूल जाते हैं।
जब कर्तव्य पालन की बारी आती है, तो वही लोग पीछे हट जाते हैं — और यही मानसिकता राष्ट्र के लिए घातक है।
🇮🇳 राष्ट्रभक्ति केवल—
26 जनवरी या 15 अगस्त को
राष्ट्रगान के समय 2 मिनट सावधान खड़े रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए
बल्कि हर दिन, हर कर्म में दिखनी चाहिए।
🚨 सतर्क नागरिक ही मजबूत गणतंत्र की पहचान
आज देश को आवश्यकता है सजग और सतर्क नागरिकों की।
हमें सावधान रहना होगा—
धार्मिक कट्टरता फैलाने वालों से
राजनीतिक बेईमानी से
विदेशी फंडिंग और पोषित आतंकवाद से
नक्सलवाद, नस्लवाद और हिंसक विचारधाराओं से
जातिवाद और समाज को तोड़ने वाली मानसिकता से
जो लोग “जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं”, वे लोकतंत्र के सबसे बड़े शत्रु हैं।
👉 जब नागरिक जागरूक होंगे, तभी
देश, गणतंत्र और लोकतंत्र सुरक्षित व मजबूत रहेगा।
🚀 भारत की उपलब्धियाँ और वैश्विक परिदृश्य
आज़ादी के बाद भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
चंद्रयान मिशन ने विश्व में भारत का मान बढ़ाया
स्वदेशी फाइटर जेट, मिसाइलें और युद्धक टैंक
विदेशी निर्भरता में लगातार कमी
लेकिन दुःखद सत्य यह भी है कि
“आदमी चाँद पर तो पहुँच गया,
पर धरती पर कैसे रहना है — यह अभी तक नहीं सीख पाया।”
यूक्रेन-रूस युद्ध और हमास-इजराइल संघर्ष इस बात का प्रमाण हैं कि
मानवता, शांति और सह-अस्तित्व आज भी सबसे बड़ी चुनौती है।
🌏 क्या भारत विश्वगुरु बन सकता है?
यह दावा नहीं कि भारत आज विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश है,
लेकिन यह विश्वास अवश्य है कि—
👉 यदि भारत का हर नागरिक ईमानदारी और निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करे,
तो भारत को विश्व महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
❤️ संदेश जो हर दिल तक पहुँचना चाहिए

भाषण का समापन जिस शायरी से होता है, वह आज के भारत की आत्मा है—
“नफरत बुरी है , न पालो इसे
दिलों में चुभन है , हटा लो इसे
न तेरा, न मेरा, न इसका , न उसका
ये वतन है हम सबका , संभालो इसे “
✍️ निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि
संविधान केवल एक किताब नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्गदर्शन है।
आइए 26 जनवरी 2026 पर यह संकल्प लें कि—
हम अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करेंगे
नफरत नहीं, राष्ट्रहित को प्राथमिकता देंगे
और भारत को एक सशक्त, समरस और विश्व-पथप्रदर्शक राष्ट्र बनाएँगे



