निमाड़ी कलाकार

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे – Gangaur Geet

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे – Gangaur Geet

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे - Gangaur Geet
चंदा की चांदनी चकोर बोल रे – Gangaur Geet

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे
रनू बाई गणगौर आई रे

चेत का महीना, सखी मन हरसाई
घर-घर मैया गणगौर पधारी आई

सखियाँ संग पूजा थाल सजाई
कंकु चंदन आरती उतारी

रनू बाई का सुंदर श्रृंगार
चूड़ी, बिंदी, चुनरी अपार

झालरिया गावत सखी सहेली
गणगौर माता की महिमा निराली


चंदा की चांदनी चकोर बोल रे - Gangaur Geet
चंदा की चांदनी चकोर बोल रे – Gangaur Geet

Chanda ki chandni chakor bol re
Runu Bai Gangaur aayi re

Chet ka mahina, sakhi man harsai
Ghar-ghar Maiya Gangaur padhari aayi

Sakhiyan sang pooja thaal sajai
Kanku chandan aarti utari

Runu Bai ka sundar shringar
Chudi, bindi, chunari apaar

Jhalariya gavat sakhi saheli
Gangaur Mata ki mahima nirali


गीत का भाव:
यह निमाड़ी गणगौर गीत माता रनू बाई (गणगौर माता) के आगमन की खुशी को दर्शाता है। इसमें चाँदनी रात, चकोर पक्षी और चैत्र महीने का वर्णन करके उत्सव का वातावरण बनाया गया है। सखियाँ मिलकर पूजा करती हैं, माता का श्रृंगार करती हैं और झालरिया (लोकगीत/गरबा) गाती हैं।

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