चंदा की चांदनी चकोर बोल रे – Gangaur Geet

चंदा की चांदनी चकोर बोल रे
चंदा की चांदनी चकोर बोल रे
रनू बाई गणगौर आई रे
चेत का महीना, सखी मन हरसाई
घर-घर मैया गणगौर पधारी आई
सखियाँ संग पूजा थाल सजाई
कंकु चंदन आरती उतारी
रनू बाई का सुंदर श्रृंगार
चूड़ी, बिंदी, चुनरी अपार
झालरिया गावत सखी सहेली
गणगौर माता की महिमा निराली

Chanda ki chandni chakor bol re
Runu Bai Gangaur aayi re
Chet ka mahina, sakhi man harsai
Ghar-ghar Maiya Gangaur padhari aayi
Sakhiyan sang pooja thaal sajai
Kanku chandan aarti utari
Runu Bai ka sundar shringar
Chudi, bindi, chunari apaar
Jhalariya gavat sakhi saheli
Gangaur Mata ki mahima nirali
✅ गीत का भाव:
यह निमाड़ी गणगौर गीत माता रनू बाई (गणगौर माता) के आगमन की खुशी को दर्शाता है। इसमें चाँदनी रात, चकोर पक्षी और चैत्र महीने का वर्णन करके उत्सव का वातावरण बनाया गया है। सखियाँ मिलकर पूजा करती हैं, माता का श्रृंगार करती हैं और झालरिया (लोकगीत/गरबा) गाती हैं।



