🎶 भजन : दयावान महाकाल 🎶

✍️ गीतकार: ब्रजमोहन चौकसे
🎤 गायक: गीतेश कुमार भार्गव
मुखड़ा
दुनिया का है वो मालिक, कालों का काल है,
पूजे जिसे सारा जहाँ, वो तो महाकाल है…
बाबा दयावान महाकाल…
1
सारे जग का ही आधार है,
वो चलाता ये संसार है,
दुखियों के दुख को हरता है ये,
तीनों भवन में ही अधिकार है।
गर आ भी जाए सामने, मृत्यु को देता टाल है,
पूजे जिसे सारा जहाँ, वो तो महाकाल है…
बाबा दयावान महाकाल…
2
देवों के महादेव हो, भोले सबसे बड़ा है नाम,
बैठे ही हो लेकर के समाधि, हर पल करते ध्यान।
माथे पे चंदा का उजाला, कैलाशों पे धाम,
जो भी इनके द्वार पे आता, बिगड़े बनाते काम।
बाबा दयावान महाकाल…
3
कर दो प्रेमी पे बस एक नज़र,
गीत आया हूँ थक-हार कर।
छोड़कर अब न जाऊँ मैं दर,
तेरे चरणों में सर।
सबकी बनाता बिगड़ी, करता निहाल है,
पूजे जिसे सारा जहाँ, वो तो महाकाल है…
बाबा दयावान महाकाल…
4
तन पे भस्मी रमी हुई है, हाथ लिये है भाल,
इनके आगे कुछ नहीं चली, काल की कोई चाल।
खुशियों से सब झोली भरते, करते मालामाल,
मैं भी तुम्हारे द्वार पे आया, कर दो कोई कमाल।
हो बाबा दयावान महाकाल…
🎶 Bhajan: Dayavan Mahakal 🎶
Dayavan Mahakal
✍️ Lyricist: Brajmohan Choukse
🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
Mukhda
Duniya ka hai wo malik, kaalon ka kaal hai,
Pooje jise sara jahan, wo to Mahakal hai…
1
Saare jag ka hi aadhar hai,
Wo chalata ye sansar hai,
Dukhiyon ke dukh ko harta hai ye,
Teenon bhavan mein hi adhikar hai.
Gar aa bhi jaye samne, mrityu ko deta taal hai,
Pooje jise sara jahan, wo to Mahakal hai…
2
Devon ke Mahadev ho, bhole sabse bada hai naam,
Baithe hi ho lekar ke samadhi, har pal karte dhyaan.
Mathe pe chanda ka ujala, kailashon pe dhaam,
Jo bhi inke dwaar pe aata, bigde banate kaam.
Baba Dayavan Mahakal…
3
Kar do premi pe bas ek nazar,
Geet aaya hoon thak-haar kar.
Chhodkar ab na jaun main dar,
Tere charanon mein sar.
Sabki banata bigdi, karta nihaal hai,
Pooje jise sara jahan, wo to Mahakal hai…
4
Tan pe bhasmi rami hui hai, haath liye hai bhaal,
Inke aage kuch nahi chali, kaal ki koi chaal.
Khushiyon se sab jholi bharte, karte malaamaal,
Main bhi tumhare dwaar pe aaya, kar do koi kamaal.
Ho Baba Dayavan Mahakal…
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भजन “दयावान महाकाल” : विस्तृत भावार्थ एवं व्याख्या
यह भजन भगवान शिव के महाकाल स्वरूप को समर्पित है, जहाँ वे केवल संहारकर्ता नहीं, बल्कि करुणामय, रक्षक और न्यायकारी देवता के रूप में प्रकट होते हैं। भजन की प्रत्येक पंक्ति शिव-भक्ति, लोक-आस्था और दार्शनिक गहराई से जुड़ी हुई है।
“दुनिया का है वो मालिक, कालों का काल है”
इस पंक्ति में शिव को समस्त सृष्टि का स्वामी बताया गया है। वे समय के भी अधिपति हैं—अर्थात जन्म, जीवन और मृत्यु तीनों पर उनका नियंत्रण है। “कालों का काल” यह दर्शाता है कि मृत्यु भी उनके आदेश से ही घटित होती है।
“सारे जग का ही आधार है, वो चलाता ये संसार है”
यहाँ शिव को सृष्टि की आधारशिला माना गया है। वे निष्क्रिय होकर भी सक्रिय हैं—समाधि में बैठकर भी पूरा संसार उनके नियमों से संचालित होता है। यह अद्वैत दर्शन की ओर संकेत करता है।
“दुखियों के दुख को हरता है ये”
महाकाल का स्वरूप केवल भयानक नहीं, बल्कि दयालु और करुणामय है। यह पंक्ति जनमानस की उस आस्था को प्रकट करती है कि शिव सच्चे भाव से पुकारने वाले हर भक्त के दुःख हर लेते हैं।
“गर आ भी जाये सामने, मृत्यु को देता टाल है”
यह भाव अत्यंत गहन है—यह दर्शाता है कि शिव अपने भक्तों को अकाल मृत्यु से बचाने वाले हैं। यहाँ महाकाल मृत्यु पर विजय पाने वाले रक्षक के रूप में सामने आते हैं।
“देवों के महादेव हो, भोले सबसे बड़ा है नाम”
इस पंक्ति में शिव की भोलेनाथ की छवि उभरती है। वे सरल हैं, शीघ्र प्रसन्न होते हैं और बिना भेदभाव अपने भक्तों को वरदान देते हैं।
“माथे पे चंदा का उजाला, कैलाशों पे धाम”
चंद्रमा शीतलता, संतुलन और अमृत का प्रतीक है। कैलाश पर्वत शिव की अचल तपस्या और आध्यात्मिक स्थिरता को दर्शाता है।
“कर दो प्रेमी पे बस एक नज़र”
यह भक्त की पूर्ण शरणागति का भाव है। संसार से थक-हार कर भक्त महाकाल के चरणों में आता है और केवल कृपा-दृष्टि की कामना करता है।
“तन पे भस्मी रमी हुई है”
भस्म वैराग्य, नश्वरता और अहंकार-त्याग का प्रतीक है। शिव का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि भौतिक शरीर नश्वर है, आत्मा ही सत्य है।
“इनके आगे कुछ नहीं चली, काल की कोई चाल”
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि काल भी महाकाल के अधीन है। शिव के सामने किसी भी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं चलता।
“खुशियों से सब झोली भरते”
यह दर्शाता है कि शिव केवल मोक्ष ही नहीं, बल्कि लोक-जीवन की सुख-समृद्धि भी प्रदान करते हैं।
Conclusion
यह भजन महाकाल को संहार और सृजन दोनों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत करता है। इसमें भय नहीं, बल्कि विश्वास है; विनाश नहीं, बल्कि कल्याण है। “दयावान महाकाल” भजन हमें यह सिखाता है कि जब भक्त सच्चे मन से शिव की शरण में जाता है, तो वे उसे कभी निराश नहीं करते।


