निमाड़ी कलाकार

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1952

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1952

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956
देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics

Intro 

यह भजन निमाड़ी गंगौर की पारंपरिक लोक-परंपरा से जुड़ा हुआ एक अत्यंत भावपूर्ण गीत है। गंगौर पर्व नारी शक्ति, सुहाग, समृद्धि और देवी-पूजन का प्रतीक माना जाता है। इस लोकगीत में भक्त अपने आँगन में देवी के आगमन का उल्लासपूर्वक स्वागत करता है। लाल छड़ी, घोड़े, नृत्य और देवी के विभिन्न स्वरूप—ये सभी प्रतीक निमाड़ अंचल की लोक-आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक भक्ति भाव को जीवंत करते हैं। यह गीत गंगौर उत्सव के दौरान गाया जाता है, जहाँ श्रद्धा, आनंद और लोकसंस्कृति एक साथ प्रकट होती हैं।


देवी आज म्हारा आगणा मंs

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956
देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956

देवी आज म्हारा आगणा मंs लाल छड़ी दीवारों ।
देवी आज म्हारा आगणा मंs रनुबाई रमता आवसे
देवी आज म्हारा आगणा मंs गौरवाई रमता आवसे ,
देवी आज म्हारा आगणा मंs धनियर जी का घोड़िला हिस्या,
देवी आज म्हारा आगणा मंs लाल छड़ी देवासे ।


Devi aaj mhara aangana ma

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956
देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956

Devi aaj mhara aangana ma laal chhadi deewaron
Devi aaj mhara aangana ma Ranubai ramta aavse
Devi aaj mhara aangana ma Gaurabai ramta aavse
Devi aaj mhara aangana ma Dhaniyar ji ka ghodila hisya
Devi aaj mhara aangana ma laal chhadi devase


देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1952

देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956
देवी आज म्हारा आगणा मंs Gangaur Geet -Lyrics 1956

यह भजन लोक-आस्था, देवी-भक्ति और स्वागत भाव से भरा हुआ है। इसके हर चरण में भक्त के हृदय की गहरी श्रद्धा और उत्सव का वातावरण झलकता है।

भजन का भावार्थ और विस्तृत विवरण ( गीतेश कुमार भार्गव ) :-

यह भजन देवी को अपने घर, अपने आँगन में आमंत्रित करने की भावनात्मक पुकार है। “देवी आज म्हारा आगणा में” पंक्ति बार-बार दोहराई जाती है, जो यह दर्शाती है कि आज का दिन साधारण नहीं, बल्कि देवी के आगमन का पावन अवसर है। भक्त अपने आँगन को देवी के स्वागत हेतु पवित्र और सुसज्जित देखना चाहता है।

लाल छड़ी और दीवारों का उल्लेख
लाल छड़ी और लाल रंग शक्ति, साहस और माँ दुर्गा की ऊर्जा का प्रतीक है। दीवारों पर लाल छड़ी का अर्थ है कि पूरा घर देवी की शक्ति से आलोकित हो गया है और वहाँ नकारात्मकता का कोई स्थान नहीं रहा।

रणुबाई और गौरवाई का आगमन
रणुबाई और गौरवाई लोक-देवियों या देवी के स्वरूपों का संकेत हैं। “रमता आवसे” शब्द यह दर्शाता है कि देवी प्रसन्न होकर, नृत्य करते हुए, आनंद भाव में भक्त के घर पधार रही हैं। यह पंक्ति भक्त और देवी के बीच आत्मीय संबंध को प्रकट करती है।

धनियर जी का घोड़िला हिस्या
घोड़ा लोक परंपरा में शक्ति, गति और विजय का प्रतीक माना जाता है। यहाँ धनियर जी के घोड़े का हिनहिनाना या चलना यह बताता है कि देवी का काफिला आ रहा है, और चारों ओर दिव्य हलचल और उत्साह फैल गया है।

लाल छड़ी देवासे
अंतिम पंक्ति में देवी द्वारा लाल छड़ी देने का भाव है, जो आशीर्वाद का प्रतीक है। यह छड़ी शक्ति, सुरक्षा और कृपा का संकेत है—मानो देवी स्वयं भक्त को अपना संरक्षण प्रदान कर रही हों।

समग्र भाव
पूरा भजन एक उत्सव, स्वागत और भक्ति का चित्रण है। इसमें डर या याचना नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और उल्लास है। यह भजन विशेष रूप से जागरन, गरबा, देवी-पूजन और लोक-उत्सवों में गाया जाता है, जहाँ भक्त देवी को अपने जीवन और घर में आमंत्रित करता है।

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