धन धन हो रेवा माई – जगत में महिमा थारी छायी -01

✨ Intro
निमाड़ अंचल की आस्था और भक्ति से ओत-प्रोत यह भावपूर्ण भजन “धन धन हो रेवा माई” माँ नर्मदा की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन के गीतकार श्री राजेश रेवलिया हैं तथा इसे अपनी सुमधुर आवाज़ में गायक गीतेश कुमार भार्गव ने प्रस्तुत किया है। यह गीत Nimadi Kalakar Channel पर प्रसारित हुआ है और माँ रेवा की दिव्यता, करुणा एवं मोक्षदायिनी शक्ति को उजागर करता है।
🪔 संक्षिप्त विवरण
यह भजन माँ नर्मदा (रेवा माई) की पावन महिमा का वर्णन करता है। अमरकंटक से निकलने वाली माँ नर्मदा के निर्मल जल को अमृत तुल्य बताया गया है, जो दुखों का हरण और मोक्ष प्रदान करता है। ऋषि-मुनि, साधु-संत और भक्तजन उनके तट पर साधना करते हैं। वेद-पुराणों में वर्णित माँ रेवा की आरती और भक्ति परंपरा को यह गीत सरल शब्दों में जन-जन तक पहुँचाता है।
🎶 Lyrics

धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
जगत म महिमा थारी छायी – तारण कारण जग म आई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
अमरकंठ से निकली मैया, कल-कल बहती जाय
मेकल सुता थारो निर्मल पानी, अमृत सो कवाय
दुख हरणी, सुख करणी, मोक्ष दायी कहाई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
ऋषि मुनि और साधु संत, थारा तट पर धुनि रमाव
नर-नारी थारा निर्मल जळम, डुबकी खूब लगाव – (2)
हो भव सी देती माँ तिराई, कष्ट देती मिटाई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
कंठ पाठ और वेद पुराण, माँ सुबह-शाम होय आरती – (2)
थारा चरण की मुरली सेवक, गीत सुणाव भारती – (2)
अर्जी राजेश ने लगाई, बात दिल की सुणाई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
🎶 Lyrics

Dhan Dhan Ho Rewa Mai – Jagat Mein Mahima Thari Chhayi
Jagat Mein Mahima Thari Chhayi – Taran Karan Jag Mein Aayi
Dhan Dhan Ho Rewa Mai – Jagat Mein Mahima Thari Chhayi
Amarkanth Se Nikli Maiya, Kal-Kal Bahti Jaay
Mekal Suta Tharo Nirmal Pani, Amrit So Kavay
Dukh Harani, Sukh Karani, Moksh Dayi Kahayi
Dhan Dhan Ho Rewa Mai – Jagat Mein Mahima Thari Chhayi
Rishi Muni Aur Sadhu Sant, Thara Tat Par Dhuni Ramav
Nar-Nari Thara Nirmal Jalam, Dubki Khoob Lagav – (2)
Ho Bhav Si Deti Maa Tirai, Kasht Deti Mitai
Dhan Dhan Ho Rewa Mai – Jagat Mein Mahima Thari Chhayi
Kanth Paath Aur Ved Puran, Maa Subah-Shaam Hoy Aarti – (2)
Thara Charan Ki Murli Sevak, Geet Sunav Bharti – (2)
Arji Rajesh Ne Lagayi, Baat Dil Ki Sunayi
Dhan Dhan Ho Rewa Mai – Jagat Mein Mahima Thari Chhayi
भजन का विस्तृत भावार्थ

धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
जगत म महिमा थारी छायी – तारण कारण जग म आई
इन पंक्तियों में कवि माँ नर्मदा (रेवा माई) की वंदना करता है। “धन धन” शब्द माँ की महिमा और सौभाग्य का प्रतीक है। कवि कहता है कि माँ रेवा की महिमा पूरे संसार में फैली हुई है। वे केवल एक नदी नहीं, बल्कि संसार को तारने वाली, पापों से मुक्त करने वाली और मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य शक्ति बनकर इस धरती पर अवतरित हुई हैं।
अमरकंठ से निकली मैया, कल-कल बहती जाय
मेकल सुता थारो निर्मल पानी, अमृत सो कवाय
यहाँ माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का उल्लेख है। कवि बताता है कि माँ रेवा अमरकंटक पर्वत से निकलकर निरंतर कल-कल करती हुई बहती रहती हैं। “मेकल सुता” कहकर उन्हें मेकल पर्वत की पुत्री बताया गया है। उनका जल इतना निर्मल और पवित्र है कि उसकी तुलना अमृत से की गई है, जो जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाता है।
दुख हरणी, सुख करणी, मोक्ष दायी कहाई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
इन पंक्तियों में माँ नर्मदा के गुणों का वर्णन है। कवि कहता है कि माँ रेवा दुखों को हरने वाली, सुख देने वाली और अंततः मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। उनका स्मरण और उनके जल का स्पर्श व्यक्ति को सांसारिक कष्टों से मुक्त कर आत्मिक शांति प्रदान करता है।
ऋषि मुनि और साधु संत, थारा तट पर धुनि रमाव
नर-नारी थारा निर्मल जळम, डुबकी खूब लगाव – (2)
यहाँ माँ नर्मदा के तट की आध्यात्मिक महिमा बताई गई है। ऋषि-मुनि और साधु-संत उनके किनारे तप, साधना और भक्ति में लीन रहते हैं। वहीं सामान्य नर-नारी भी उनके पवित्र जल में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं। यह दर्शाता है कि माँ रेवा सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी हैं।
हो भव सी देती माँ तिराई, कष्ट देती मिटाई
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
इन पंक्तियों में माँ नर्मदा को संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाली बताया गया है। वे भक्तों के जीवन से दुःख, कष्ट और बाधाएँ दूर कर उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं। माँ की कृपा से जीवन के कठिन मार्ग सरल हो जाते हैं।
कंठ पाठ और वेद पुराण, माँ सुबह-शाम होय आरती – (2)
यह पंक्ति बताती है कि वेद-पुराणों में माँ नर्मदा की महिमा का गुणगान किया गया है। सुबह और शाम उनकी आरती होती है, जिससे वातावरण भक्तिमय और पवित्र बन जाता है। यह माँ रेवा की शाश्वत पूजा परंपरा को दर्शाता है।
थारा चरण की मुरली सेवक, गीत सुणाव भारती – (2)
यहाँ कवि स्वयं को माँ के चरणों का सेवक मानते हुए कहता है कि वे भक्ति भाव से माँ के चरणों में गीत गाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। संगीत और भजन को माँ की सेवा का माध्यम बताया गया है।
अर्जी राजेश ने लगाई, बात दिल की सुणाई
इस पंक्ति में गीतकार राजेश रेवलिया अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को व्यक्त करते हैं। वे माँ रेवा से प्रार्थना करते हैं और अपने हृदय की बात सरल शब्दों में उनके सामने रखते हैं, जो सच्ची भक्ति का प्रतीक है।
धन धन हो रेवा माई – जगत म महिमा थारी छायी
अंत में पुनः माँ नर्मदा की महिमा का स्मरण करते हुए भजन समाप्त होता है। यह दोहराव दर्शाता है कि माँ रेवा की महिमा अनंत है और हर भक्त के मन में सदैव बसी रहती है।


