धनियर जी आया बैलगाड़ी म – निमाड़ी गणगौर गीत 2026 Lyrics
Singer :- Megha Parsai & Mehndi Birla Lyrics :- Subhash Yadav


हाऊ दर्शन करन क गई वाड़ी म
वहां धनियर जी आया बैलगाड़ी म
हाऊ दर्शन करन क गई वाड़ी म
वहां धनियर जी आया बैलगाड़ी म
इनी वाड़ी म गणपति जी आया
मोदक लड्डू का भोग लगाया
लाया रिद्धि-सिद्धि संग दुई लाड़ी न
वहां धनियर जी आया बैलगाड़ी म
इनी वाड़ी म देखो ब्रह्मा जी आया
माता सरस्वती क संग म लाया
ब्रह्माजी चतुर्मुख दाढ़ी म
वहां धनियर जी आया बैलगाड़ी म
वात निराली छे धनियर राजा की
सजी गई झांकी गणगौर माता की
सजी गई झांकी गणगौर माता की
लिख सुभाष यादव निमाड़ी म
वहां धनियर जी आया बैलगाड़ी म

Hau darshan karan k gayi vaadi m
Wahan Dhaniyar ji aaya bailgaadi m
Hau darshan karan k gayi vaadi m
Wahan Dhaniyar ji aaya bailgaadi m
Ini vaadi m Ganpati ji aaya
Modak laddu ka bhog lagaya
Laya Riddhi-Siddhi sang dui laadi n
Wahan Dhaniyar ji aaya bailgaadi m
Ini vaadi m dekho Brahma ji aaya
Mata Saraswati k sang m laya
Brahma ji chaturmukh daadhi m
Wahan Dhaniyar ji aaya bailgaadi m
Vaat niraali chhe Dhaniyar raja ki
Saji gayi jhaanki Gangaur mata ki
Saji gayi jhaanki Gangaur mata ki
Likh Subhash Yadav Nimadi m
Wahan Dhaniyar ji aaya bailgaadi m

यह गीत एक स्त्री (या भक्त) की भावना को व्यक्त करता है, जो वाड़ी (बगीचे/मंदिर स्थल) में भगवान के दर्शन करने जाती है। वहाँ पहुँचकर वह देखती है कि धनियर जी (ईसर/भगवान शिव का लोक रूप) बैलगाड़ी में विराजमान होकर आए हैं। यह दृश्य बहुत ही आनंद और श्रद्धा से भरा हुआ है।
गीत के अगले हिस्से में बताया गया है कि उसी वाड़ी में भगवान गणेश जी भी पधारते हैं। उनके लिए मोदक और लड्डुओं का भोग लगाया जाता है और वे अपनी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के साथ आते हैं। यह दर्शाता है कि पूजा में सभी देवी-देवताओं का स्वागत और सम्मान किया जाता है।
आगे गीत में ब्रह्मा जी और माता सरस्वती के आगमन का वर्णन है। ब्रह्मा जी को उनके चार मुख और दाढ़ी के साथ बताया गया है, जो सृष्टि के रचयिता हैं। उनके साथ ज्ञान की देवी सरस्वती का होना इस आयोजन को और भी पवित्र और ज्ञानमय बना देता है।
अंत में गीत में कहा गया है कि धनियर राजा (भगवान शिव) की महिमा निराली है और उनके कारण गणगौर माता की सुंदर झांकी सजाई गई है। पूरा वातावरण भक्ति, उत्सव और आनंद से भर जाता है। गीत के रचनाकार (सुभाष यादव) ने निमाड़ी भाषा में इस सुंदर दृश्य और भावना को व्यक्त किया है।
सारांश:
यह गीत गणगौर पर्व के दौरान भगवान शिव (ईसर/धनियर जी) और माता गौरा (पार्वती) की पूजा, उनके स्वागत, और अन्य देवी-देवताओं के आगमन को दर्शाता है। इसमें भक्ति, उत्सव, और लोक संस्कृति की झलक मिलती है, जहाँ पूरा माहौल श्रद्धा और खुशी से भर जाता है।



