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सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा गणगौर गीत निमाड़ी लोकगीत

सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा – निमाड़ी गणगौर गीत | Lyrics

सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा गणगौर गीत निमाड़ी लोकगीत

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गणगौर गीत — निमाड़ी लोकगीत
 उद्धव भाई यादव

🎵 Song Introduction 

Song Title: Sakhi sang mata ki baadi
Category: Nimadi Folk Devotional Song /Gangour bhajan geet
Language: Nimadi
Singer: Gitesh kumar bhargava
Lyricist: udhav yadav
Theme: Gangour mata
Region: Nimar (Madhya Pradesh, India)


मुखड़ा

सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा,
माता रानी का दर्शन पाऊँगा — (2)


1) पूजा की थाली मं कंकू और बाती

पूजा की थाली मं कंकू और बाती,
सखी-सहेली सब खेलांगर पाती।
लाड़ा-लाड़ी का खेल सजाऊँगा,
सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा…


2) सजी-धजी जाऊँगा पेटरी लंहगो

सजी-धजी जाऊँगा पेटरी लंहगो,
आव भला कइतरों भी मैं हंगो।
लाल बिंदी माथा पर लगाऊँगा,
सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा…


3) उधव कहे माई सुन गीत मन का

उधव कहे माई सुन गीत मन का,
गाऊँ-बजाऊँ, लगाऊँगा दुमका।
लाल चुनरी माँ के सजाऊँगा,
सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा…

🎵 Sakhi Sang Mata Ki Baadi Ma Jaunga

Sakhi sang Mata ki baadi ma jaunga,
Mata Rani ka darshan paunga — (2)


1) Pehla Antara

Pooja ki thaali man kanku aur baati,
Sakhi-saheli sab khelangar paati.
Laada-laadi ka khel sajaunga,
Sakhi sang Mata ki baadi ma jaunga…


2) Doosra Antara

Saji-dhaji jaunga petri lahango,
Aav bhala kaitaro bhi main hango.
Laal bindi maatha par lagaunga,
Sakhi sang Mata ki baadi ma jaunga…


3) Teesra Antara

Udhav kahe mai sun geet man ka,
Gaun-bajaun, lagaunga dumka.
Laal chunri Maa ke sajaunga,
Sakhi sang Mata ki baadi ma jaunga…

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🌸 गीत का भावार्थ (हिन्दी व्याख्या)

यह गीत माता रानी के प्रति गहरी श्रद्धा, भक्ति और लोक-परंपरा को बहुत सरल और मधुर शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें एक बालिका या भक्त स्त्री अपने सखियों के साथ माता की बाड़ी (देवी मंदिर या पवित्र स्थल) में जाकर दर्शन करने की भावना प्रकट करती है। गीत में भक्ति के साथ-साथ लोक-संस्कृति, स्त्री-मन की कोमल भावनाएँ और उत्सव का उल्लास झलकता है।


🔹 मुखड़ा का भाव

“सखी संग माता की बाड़ी म जाऊँगा,
माता रानी का दर्शन पाऊँगा”

यहाँ गायक अपनी सखियों के साथ माता के पवित्र स्थान पर जाने की इच्छा प्रकट करता है। माता रानी के दर्शन को वह अपने जीवन का सौभाग्य मानता है। यह पंक्ति सामूहिक भक्ति और आपसी प्रेम का प्रतीक है।


🔹 पहला अंतरा – पूजा की तैयारी

पूजा की थाली में कुमकुम और बाती,
सखियाँ मिलकर पूजा की तैयारी करती हैं। यह दर्शाता है कि माता की आराधना पूरी विधि-विधान और श्रद्धा से की जा रही है।
लाड़ा-लाड़ी का खेल लोक-परंपरा और बाल-सुलभ आनंद का प्रतीक है, जो बताता है कि भक्ति में आनंद और उल्लास भी शामिल है।


🔹 दूसरा अंतरा – श्रृंगार और उत्सव भाव

यहाँ भक्त माता के दर्शन हेतु सजी-धजी अवस्था में जाने की बात करता है।
लहंगा, लाल बिंदी जैसे प्रतीक नारी सौंदर्य, शुभता और देवी भक्ति को दर्शाते हैं। यह संकेत करता है कि माता के दर्शन केवल आस्था नहीं, बल्कि उत्सव और आनंद का अवसर भी हैं।


🔹 तीसरा अंतरा – मन की बात और भक्ति संगीत

“उधव कहे माई सुन गीत मन का”
यह पंक्ति बताती है कि गीतकार अपने मन की भावना को गीत के माध्यम से माता तक पहुँचाना चाहता है।
गाना-बजाना और ढोलक (दुमका) बजाना लोक-भक्ति की परंपरा को दर्शाता है।
लाल चुनरी माता को समर्पण और शक्ति का प्रतीक है।


🌺 समग्र भाव

यह गीत केवल देवी भक्ति का गीत नहीं है, बल्कि—

  • लोक-संस्कृति

  • नारी श्रद्धा

  • सामूहिक पूजा

  • आनंद, उत्सव और भक्ति

इन सभी भावों का सुंदर संगम है। गीत यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति सरल मन, श्रद्धा और प्रेम से की जाती है, न कि केवल दिखावे से।

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