निमाड़ी कलाकार

रनुबाई पानी क जाय

झुल्यो बांध्यो झुली जाय रणुबाई – Nimadi Gangaur Mata Lokgeet

Nimadi Gangaur Mata Lokgeet Jhuliyo Bandhyo Jhuli Jai Ranubai traditional swing festival

 

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झुल्यो बांध्यो झुली जाय रणुबाई – Nimadi Gangaur Mata Lokgeet


🎵 गीत की जानकारी (Song Information)

  • गीत प्रकार: निमाड़ी पारंपरिक लोकगीत

  • पर्व: गणगौर माता

  • देवी: माता पार्वती (रणूबाई / गणगौर)

  • क्षेत्र: निमाड़ अंचल (मध्यप्रदेश)

  • भाव: भक्ति, लोकपरंपरा, उत्सव


🌺 भूमिका (Introduction)

गणगौर माता निमाड़ की लोकसंस्कृति में स्त्री श्रद्धा, सौभाग्य और पारिवारिक सुख का प्रतीक हैं।
इस लोकगीत में रणूबाई (गणगौर माता) के लिए झूला बाँधने की परंपरा, गाँव–गाँव की सजावट और महिलाओं की सामूहिक भक्ति को बड़े ही सरल और मधुर शब्दों में दर्शाया गया है।


📜 गीत के बोल (Nimadi Lyrics)

🔔 मुखड़ा

झुल्यो बांध्यो झुली जाय रणुबाई,
झुलो बांध्यो झुली जाय।


🔸 अंतरा 1

अम्बा पर झुलो बांध्यो माई,
हो रेशम डोर लगाई।
रणूबाई झुलो बांध्यो झुली जाय।


🔸 अंतरा 2

ऊँचा सी जो निमाड़ु म लाई,
हो गाँव-गाँव क दियो सजाई।
रणूबाई झुलो बांध्यो झुली जाय।


🔸 अंतरा 3

सबई बईण नन खूब मनाई,
हो थारी भक्ति कर।
सब बहूण भाई रणुबाई,
झुलो बांध्यो झुली जाय।


🔸 अंतरा 4

वासुरे न कलम चलाई माई,
गाई रही खूब गिलकाई।
रणूबाई झुलो बांध्यो झुली जाय।

📜 Song Lyrics (Typed in English – Transliteration)

Chorus

Jhulyo bandhyo jhuli jaay Ranubai,
Jhulo bandhyo jhuli jaay.

Verse 1

Amba par jhulo bandhyo maai,
Ho resham dor lagaai.
Ranubai jhulo bandhyo jhuli jaay.

Verse 2

Uncha si jo Nimadu m laai,
Ho gaav-gaav k diyo sajaai.
Ranubai jhulo bandhyo jhuli jaay.

Verse 3

Sabai bain nan khoob manaai,
Ho thaari bhakti kar.
Sab bahun bhaai Ranubai,
Jhulo bandhyo jhuli jaay.

Verse 4

Vasure n kalam chalaai maai,
Gaai rahi khoob gilkaai.
Ranubai jhulo bandhyo jhuli jaay.


🌼 गीत का भावार्थ (Short Meaning)

यह लोकगीत गणगौर पर्व के दौरान रणूबाई (माता पार्वती) के स्वागत और पूजन का भाव दर्शाता है।
रेशम की डोर से बाँधा गया झूला, आम के पेड़, गाँवों की सजावट और महिलाओं का उल्लास—ये सभी निमाड़ी लोकसंस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
गीत सामूहिक भक्ति, नारी सहभागिता और लोकआस्था का सुंदर उदाहरण है।

🌸 गीत का विस्तृत भावार्थ (शुद्ध हिन्दी)

यह लोकगीत निमाड़ अंचल की प्राचीन गणगौर परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसमें रणुबाई (माता पार्वती / गणगौर माता) के स्वागत, पूजन और लोकआस्था को अत्यंत सरल, भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत किया गया है।


🔔 मुखड़े का भावार्थ

“झुल्यो बांध्यो झुली जाय रणुबाई”
इस पंक्ति में गणगौर माता के लिए झूला बाँधने की परंपरा का वर्णन है। झूला यहाँ आनंद, उत्सव और सौभाग्य का प्रतीक है। झूले का झूलना माता की उपस्थिति और कृपा का संकेत माना जाता है।


🔸 अंतरा 1 का भावार्थ

आम के पेड़ पर रेशमी डोर से झूला बाँधना
आम का वृक्ष भारतीय संस्कृति में शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। रेशमी डोर यह दर्शाती है कि माता के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। यह पंक्तियाँ श्रद्धा और सौंदर्य की भावना को दर्शाती हैं।


🔸 अंतरा 2 का भावार्थ

निमाड़ अंचल के ऊँचे स्थानों से झूला लाना और गाँव-गाँव सजावट करना
यह पंक्तियाँ बताती हैं कि गणगौर पर्व केवल एक घर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे क्षेत्र का सामूहिक उत्सव होता है। हर गाँव में सजावट कर माता का स्वागत किया जाता है।


🔸 अंतरा 3 का भावार्थ

स्त्रियों का सामूहिक उल्लास और भक्ति
यहाँ बहनें, बहुएँ और परिवार की सभी महिलाएँ मिलकर माता की पूजा करती हैं। यह लोकगीत नारी श्रद्धा, सौभाग्य की कामना और पारिवारिक एकता का सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है।


🔸 अंतरा 4 का भावार्थ

लोककवयित्री की रचना और गायन
इस अंतरे में कवयित्री/गायिका के माध्यम से यह बताया गया है कि यह गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है। गीत गाते हुए उल्लास और भक्ति दोनों का संगम दिखाई देता है।


🌼 समग्र संदेश

यह लोकगीत गणगौर पर्व की आत्मा को दर्शाता है—गीतेश कुमार भार्गव

  • नारी भक्ति

  • सामूहिक लोकउत्सव

  • पारंपरिक रीति-रिवाज

  • गाँव की सांस्कृतिक एकता

“झुल्यो बांध्यो झुली जाय रणुबाई” वास्तव में निमाड़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और श्रद्धा का जीवंत दस्तावेज़ है।


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