निमाड़ी कलाकार

खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics
खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

 

माता मानो हमारी बात , खजोरी  छोड़ी चला छोड़ी चला
माता मानो हमारी बात , खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला
असो दिन ऊँगियो न परभात , खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला
 हरे गांव खजोरी तो अपनी जन्म भूमि जन्म
अरे  सुख की रे बात , खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला
 हरे गांव खजरी म पुण्या की बसी रयो बसी रयो
हो आसो तन पर कर घात खजोरी , छोड़ी चला छोड़ी चला
 हरे गांव खजरी म शत्रु बसी रयो बसी रयो
हो आसो करि रया रे दावपेच खजोरी , छोड़ी चला छोड़ी चला
माता मानो हमारी बात खजोरी , छोड़ी चला छोड़ी चला
माता मानो हमारी बात खजोरी , छोड़ी चला छोड़ी चला

खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics
खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

Mata mano hamari baat, Khajori chhodi chala chhodi chala
Mata mano hamari baat, Khajori chhodi chala chhodi chala
Aso din ungiyo na parbhat, Khajori chhodi chala chhodi chala

Hare gaon Khajori to apni janm bhoomi janm
Are sukh ki re baat, Khajori chhodi chala chhodi chala

Hare gaon Khajori me punya ki basi rayo basi rayo
Ho aso tan par kar ghat Khajori, chhodi chala chhodi chala

Hare gaon Khajori me shatru basi rayo basi rayo
Ho aso kari raya re daav-peech Khajori, chhodi chala chhodi chala

Mata mano hamari baat Khajori, chhodi chala chhodi chala
Mata mano hamari baat Khajori, chhodi chala chhodi chala


खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics
खजोरी छोड़ी चला छोड़ी चला Singaji Bhajan lyrics

 

भजन का भावार्थ

इस भजन में संत सिंगाजी अपनी माता जी से बहुत विनम्रता और दर्द के साथ निवेदन कर रहे हैं कि अब खजोरी गाँव छोड़ देना ही सही निर्णय है

शुरुआत में वे बार-बार कहते हैं — “माता मानो हमारी बात” — इसका मतलब है कि वे अपनी माता को समझाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि माँ के लिए जन्मभूमि छोड़ना आसान नहीं होता।


पहला भाव:
“असो दिन ऊँगियो न परभात”
👉 सिंगाजी बताते हैं कि समय इतना खराब हो गया है कि अब अच्छे दिनों की सुबह ही नहीं आती
यानी जीवन में सुख-शांति खत्म हो चुकी है।


दूसरा भाव:
“खजोरी तो अपनी जन्म भूमि”
👉 वे मानते हैं कि यह गाँव उनकी जन्मभूमि और सुख की जगह रहा है।
लेकिन सिर्फ पुरानी यादों के कारण वहीं टिके रहना सही नहीं है।


तीसरा भाव:
“खजोरी में पुण्य की बसी रयो… आसो तन पर कर घात”
👉 पहले यह गाँव धार्मिक और पवित्र (पुण्य भूमि) था,
लेकिन अब वही जगह इंसान के जीवन पर घात (खतरा) बन गई है।


चौथा भाव:
“खजोरी में शत्रु बसी रयो… दांव-पेच”
👉 अब गाँव में दुश्मन और चालबाजी करने वाले लोग बस गए हैं।
यह संकेत है कि समाज में बुराई, धोखा और खतरा बढ़ गया है।


अंतिम संदेश:
संत सिंगाजी अपनी माता से कहते हैं कि
👉 जब जगह का माहौल खराब हो जाए, धर्म और शांति खत्म हो जाए, तो मोह छोड़कर आगे बढ़ जाना चाहिए।


💡 गहरा आध्यात्मिक अर्थ:
यह भजन सिर्फ गाँव छोड़ने की बात नहीं करता, बल्कि यह सिखाता है कि:

  • जीवन में गलत माहौल, बुरी संगत और नकारात्मक जगह को छोड़ देना चाहिए
  • चाहे वह कितनी भी प्रिय क्यों न हो
  • क्योंकि सुरक्षा, शांति और धर्म सबसे जरूरी हैं
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