कुंदा नदी खरगोन, मध्य प्रदेश : सतपुड़ा से नर्मदा तक बहती जीवनरेखा

मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में स्थित खरगोन जिला अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है कुंदा नदी, जो न केवल क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को समृद्ध करती है, बल्कि स्थानीय जनजीवन, कृषि, पेयजल और धार्मिक आस्था से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
1. कुंदा नदी का उद्गम और प्रवाह मार्ग

कुंदा नदी का उद्गम सतपुड़ा पर्वतमाला में, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा के समीप स्थित अंबा और सिरवेल गाँवों के सघन वन क्षेत्र से होता है। यह क्षेत्र प्राकृतिक जलस्रोतों और हरियाली से परिपूर्ण है।
प्रवाह की दिशा: कुंदा नदी दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बहती है, जो इसे क्षेत्र की कुछ विशिष्ट नदियों में शामिल करती है।
लंबाई: नदी की कुल लंबाई लगभग 140 से 169 किलोमीटर मानी जाती है।
समापन: यह नदी आगे चलकर खरगोन के पास वेदा नदी में मिल जाती है, तथा कुछ धाराएँ मंडलेश्वर के समीप नर्मदा नदी में समाहित हो जाती हैं। इस प्रकार कुंदा नदी, मां नर्मदा की एक प्रमुख सहायक नदी के रूप में जानी जाती है।
2. कुंदा नदी पर बने प्रमुख बांध
कुंदा नदी क्षेत्र की कृषि और जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से इस पर कुछ प्रमुख बांधों का निर्माण किया गया है:
🔹 देजला-देवड़ा बांध

यह खरगोन जिले का एक प्रमुख बांध है।
इससे लगभग 8000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है।
आसपास के किसानों के लिए यह बांध जीवनरेखा के समान है।
🔹 वनहार बांध
कुंदा नदी पर स्थित एक अन्य महत्वपूर्ण जलाशय।
यह भी सिंचाई और जल संचयन के लिए उपयोगी है।
3. धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व
कुंदा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की धरोहर भी है।
खरगोन शहर: यह नगर कुंदा नदी के तट पर बसा हुआ है। शहर का प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर भी इसी नदी के किनारे स्थित है, जहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं।

सिरवेल महादेव मंदिर: नदी के उद्गम क्षेत्र के पास स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर अत्यंत पौराणिक महत्व रखता है। मान्यता है कि लंका नरेश रावण ने यहाँ भगवान शिव को अपने शीश अर्पित किए थे।

पेयजल स्रोत: कुंदा नदी, खरगोन शहर के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी है, जिससे इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।
4. कुंदा नदी की वर्तमान स्थिति (2026)
वर्तमान समय में कुंदा नदी कई चुनौतियों का सामना कर रही है:
प्रदूषण: हाल के वर्षों में शहर के गंदे नालों का पानी नदी में मिलने से जल प्रदूषण की समस्या बढ़ी है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है।
संरक्षण प्रयास: सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर ‘नदी पुनर्जीवन अभियान’ और स्वच्छता योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य कुंदा नदी को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखना है।
5. कुंदा नदी से संबंधित एक महत्वपूर्ण तथ्य
भारत के अन्य राज्यों में भी ‘कुंदा’ नाम की नदियाँ पाई जाती हैं, जैसे:
तमिलनाडु के ईरोड जिले की कुंदा नदी,
आंध्र प्रदेश की कुंदू (Kundu) नदी।
लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की कुंदा नदी अपनी भौगोलिक स्थिति, नर्मदा से संबंध, धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय जीवन में योगदान के कारण एक विशिष्ट पहचान रखती है।
निष्कर्ष
कुंदा नदी खरगोन जिले की प्राकृतिक, धार्मिक और सामाजिक जीवनरेखा है।
इसका संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल, संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखने के लिए भी अनिवार्य है।


