आँख भर आई – सियाराम बाबा भजन लिरिक्स | Gitesh Kumar Bhargava

🔷 आँख भर आई – सियाराम बाबा
निमाड़ी श्रद्धांजलि भजन लिरिक्स
CLIC TO WATCH ON YOUTUBE
🎤 Singer (गायक): Gitesh Kumar Bhargava ( गीतेश कुमार भार्गव) ✍️ Lyrics (लेखक): Rajesh Revaliya (राजेश रेवलिया)
🎶 Genre: Nimadi Bhakti Bhajan / Shraddhanjali Geet
🕉️ समर्पण: ब्रह्मलीन संत सियाराम बाबा की पावन स्मृति में
🌸 भाव-वाक्य
“प्रेम में भगवान मिल्या, तो भई प्रेम में संसार।
उनको सच्चो प्रेम थो, सो हुयं गया भव सी पार।”
🌼 मुखड़ा
सुनी हुय गई घर आंगनाई, आँख भर आई,
सियाराम बाबा तुम्हारी याद जो आई,
सबकी आँख भर आई।
ग़म की बदरिया छाई, हाँ छाई,
आँख भर आई…
🌿 अंतरा 1
सूनो पड़ीगो मैया रेखा किनारो,
जन-जन पुकारयो बाबा नाम तुम्हारो।
अंतिम दर्शन क लम्बी लाम लगाई…
आँख भर आई…
🌿 अंतरा 2
एकादशी की तिथि स्वर्ग सिधारया,
अंत समय में मुख सी राम पुकारया।
ब्रह्मा की ज्योति में ज्योत समाई…
आँख भर आई…
🌿 अंतरा 3
बित्यो महीनो बाबा, बिती गयो साल रे,
तमरा बिना म्हारा बाबा हुयो बुरो हाल रे।
भक्त जनन प आपणी करुणा लुटाई…
आँख भर आई…
🔶 भजन का भाव
यह भजन ब्रह्मलीन संत सियाराम बाबा के महाप्रयाण के बाद भक्तों की भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। बाबा के प्रेम, करुणा और राम-भक्ति की स्मृतियाँ आज भी भक्तों की आँखें नम कर देती हैं। गीत में अंतिम दर्शन, एकादशी तिथि और ब्रह्म-ज्योति में विलय जैसे आध्यात्मिक भावों का मार्मिक चित्रण है।
🔷 Aankh Bhar Aai – Siyaram Baba
Nimadi Shraddhanjali Bhajan
🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics: Rajesh Revaliya
🌸 Intro Quote
“Prem mein Bhagwan milya,
to bhai prem mein sansaar.
Unko saccho prem tho,
so huyo gaya bhav se paar.”
🌼 Chorus
Suni hui gayi ghar angnai, aankh bhar aai,
Siyaram Baba tumhari yaad jo aai,
Sabki aankh bhar aai.
Gham ki badariya chhai, haan chhai,
Aankh bhar aai…
🌿 Antara 1
Suno padigo maiya rekha kināro,
Jan-jan pukaryo Baba naam tumharo.
Antim daras ki lambi laam lagai…
Aankh bhar aai…
🌿 Antara 2
Ekadashi ki tithi swarg sidhaarya,
Ant samay mein mukh se Ram pukaarya.
Brahma ki jyoti mein jyot samai…
Aankh bhar aai…
🌿 Antara 3
Bityo mahino Baba, biti gayo saal re,
Tamra bina mhara Baba huyo buro haal re.
Bhakt janan par apni karuna lutai…
Aankh bhar aai…
यह भजन सियाराम बाबा के देहावसान के बाद भक्तों के मन में उमड़े गहरे शोक, विरह और श्रद्धा को अत्यंत भावुक शब्दों में व्यक्त करता है। आरंभिक पंक्तियाँ—
“सुनी हुय गई घर आंगनाई, आँख भर आई”
यह दर्शाती हैं कि बाबा के जाने से घर-आँगन सूने हो गए हैं। उनकी स्मृति आते ही केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सभी भक्त भावनाओं से भर उठते हैं। यह सामूहिक दुःख और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है।
अंतरा 1
पहले अंतरे में माँ रेवा के किनारे पसरे सन्नाटे का वर्णन है। बाबा का नाम जन-जन की पुकार बन चुका था, इसलिए उनके अंतिम दर्शन के लिए लंबी कतारों का लगना उनकी लोकप्रियता और भक्तों के प्रेम को दर्शाता है। यह दृश्य हृदय को द्रवित कर देता है, जिससे आँखें भर आती हैं।
अंतरा 2
दूसरे अंतरे में बाबा के एकादशी के पावन दिन स्वर्ग सिधारने का उल्लेख है, जो वैष्णव परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। अंतिम क्षणों में उनके मुख से राम नाम का उच्चारण होना उनकी निष्कलंक भक्ति और जीवनभर की साधना का प्रमाण है। “ब्रह्मा की ज्योति में ज्योत समाई” पंक्ति आत्मा के परम तत्व में विलीन होने का आध्यात्मिक संकेत देती है।
अंतरा 3
तीसरा अंतरा विरह की पीड़ा को और गहरा करता है। समय बीतने पर भी कमी महसूस होना बताता है कि बाबा केवल गुरु नहीं, बल्कि जीवन का सहारा थे। अंत में भक्तों पर करुणा लुटाने की बात यह विश्वास दिलाती है कि बाबा देह से भले न हों, पर उनकी कृपा आज भी भक्तों पर बनी हुई है।
समग्र रूप से यह भजन शोक के साथ-साथ श्रद्धा, भक्ति और अमर आस्था का सजीव चित्रण है।


